वाह रे बेटा हीरा नागलिंगम!

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दुनिया (World) मं सबो दुष्ट, राक्षस, गररेता अउ बइमान नइ होवय. कोनो न कोनो विभीसन जइसे महात्मा घलो भेजे रहिथे भगवान हा जउन मुसीबत के बेरा मं नइया पार कर देथे, अइसने कस चेन्नई मं आटो चालक मन बर मसीहा कस अवतरे रिहिस हे नुगंमबाक्कम.

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रायपुर. कोनो ला लांघन-भूखन मरत देख के एक झन मनखे ला ओकर उपर दया आ जथे. ओहर पांच काठा धान ओकर घर मं भेजवा देथे. अब देवइया ला ओहर पूछथे-भइया, मोरे सही चार झन अउ संगवारी भूखन मरत हे, तैं दे हस तेमा के चार काठा धान ला ओमन ला एक-एक काठा बांट दौं का? अब ओ देवइया का काहय, तोर इच्छा भई. दुनिया मं कइसे-कइसे मनखे मिलथे खुद लांघन-भूखन मरत हे, खाय बर घर मं एको दाना नइहे फेर दुसर ला भूखन मरत देख के ओकर दिल रहे नइ जा सकत हे. कुलबुलावत हे, का करंव, कइसे करंव. फेर कर कुछु नइ सकत हे. हाथ सुन्ना हे फेर दिल कुबेर जइसन, हरिश्चंद, कर्ण अउ मोरध्वज दानी सही. एला उदाली मरइ तो नइ कहे जा सकय. अइसने कस एक झन बड़े दिल के मनखे मिलगे.  देखिन, सुनिन ओकर हाल चाल. गरीब हे ते का होगे फेर दिल कोनो दानवीर ले कम नइहे? गरीबी, भुखमरी, बेकारी अउ बीमारी नरक के दुःख सही होथे. जउन एकर मारग ले गुजरे हे अउ गुजरत हें तउन मन जानत होही दुःख का होथे, नरक काला कहिथे? भगवान झन करय कोनो ला कभू अइसन दिन देखे ले दै, ओ मारग ले गुजरे के मौका देवय फेर जेकर करम मं जउन दुःख के लेखा लिखाय हे, ओला कोनो टारे नइ सकय, चाहे कोनो कतको उदीम कर लय?

दुःख के दिन अड़बड़ भारी होथे, मुसकिल मं कटथे. सावन के अंधियारी रात, घपटे बादर, बरसत पानी तइसन दिन मं आधा रात के बसुदेव हा अपन पिलवा कृष्ण ला गोकुल कइसे लाइस होही जमुना नदी पार करके. दुःख काकर उपर नइ खपलाय हे, राम ला कइसे अपन भाई लक्षमन, संगिनी सीता संग जंगल जंगल भटके ले परे रिहिस हे. दुःख के लेखा खराब होथे. एकर बरनन करबे तब आंखी डाहर ले आंसू झरे ले धरथे. छत्तीसगढ़ में सरलग अकाल परिस. सन पैंसठ के अकाल तो जगजाहिर हे. एको दाना अनाज नइ होय रिहिस हे. ओ साल के दुःख अउ पीरा ला तो किसान अउ ओकर परिवार मन कइसे भुला सकत हें? अमरीका सरकार हा सरहा गहुँ अउ चांउर भेजे रिहिस हे तेन ला छत्तीसगढ़िया मन खाए रिहिन हे. जउन अनाज ला आज हमन जानवर ला खवाथन ओला छत्तीसगढ़िया मन खाय रिहिन हे, अपन अउ अपन पिलवा मन के परान ला बचाय रिहिन हे.

सुरता आथे जउन मन ला अजगर सही निगले हे कोरोना
दुःख काला कहिथे, मुसीबत कइसे खपलाथे ओला कोनो जाने नइ जा सकय. ओ तो अचानक आथे. मौत, गिराहिक अउ मेहमान कोनो ला बता के नइ आवय. ओ तो बाज असन झपट्टा मारे असन आथे अउ अपन सिकार ला हथिया के फुर्र ले जिहां के तिहां उड़ा के चले जाथे. एती फड़फड़ावत जटायू असन, खूना-खून होके परे राहय. कोनो मिलगे सहारा तो पाय मान नहिते जय सीताराम, सोलह आना दिखत हे. अइसने कस हाल कोरोना सब के कर दे हे. कोरोना के दुःख ले जउन भुगतथे तउने जानही. दुःख बताय ले घटय नहीं अउ बाढ़ जाथे. सुरता आथे जउन मन ला अजगर सही निगले हे कोरोना.

दुःख के दिन के कोनो संगवारी नइ होवय. सब छटक देथें, मुंह मोड़ लेथे
जउन कभू हीरक के गोठियावय, घर आंवय-जांवय, सदा के संगवारी राहय तेन मन सब किनारा कर लेथे. दुःख मं काबर कोनो मुंह अइठ लेथे, मुंह फेर लेथे, साथ नइ देवय. दू भाखा गोठियाय मं काकर का बिगड़ जथे, फेर वाह रे मनखे ननजतिया जात के हो, दुखिया संग दू भाखा गोठियाय मं तुंहर गठरी, गुबती के एको पइसा तो नइ उरक जाहि? धिक्कार हे तुंहर मन के अइसन तन मन अउ धन ला. सुख-दुःख तो सबके उपर आथे-जाथे, आज मोर करा आय हे तब काल अउ ककरो करा जाही? एकजाई तो ओहर रहइया नोहय. फेर कोन ला का कहिबे ए तो अपन-अपन सुभाव, संस्कार अउ बिचार हे.

ए संसार हे, इहां किसम-किसम के मनखे हे, सबके अलग-अलग सुभाव, संस्कार अउ धरम हे. पांचों अंगुरी ककरो बराबर नइ होवय. अइसनो घलो ये संसार के मिले हे जउन दुःख के संगवारी बने हें, सुग्रीव हनुमान अउ अंगद जइसन अउ कतको नांव हे. सुदामा के संगवारी कृष्ण रिहिस हे. दुःख मं कइसे संग दिस हे, सब ये किस्सा ला जानत हे.  वइसने कस किस्सा इहां कलजुग मं घला देखे ले मिले हे अउ उहू हा अभी कोरोना काल मं. सुनिहौ तब अचरज करिहौ, कहिहौ अजब गजब बात हे.

सोचे लगिन अब एती का होही, कइसे परान बाचही
बात आय चेन्नई(तमिलनाडू) के. एक दिन अइसने ठलहा बइठे रेहेंव. तीर मं माढ़े एक पेपर के पन्ना पलटत रेहेंव तब अचरज बात पढ़े ले मिलगे. नुगंमबाक्कम नांव के एक झन सज्जन रहिथे जउन अपार्टमेंट मं रहिथे. ओ गली के आखरी छोर मं स्कूल हे. ओ स्कूल के पहिली दुआरी मं ऑटो स्टैंड हे. ओ ऑटो चालक मन पढ़इया लइका मन ला स्कूल ले घर अउ घर ले स्कूल लाने लेगे के काम करथे. अपार्टमेंट मं रहइया मन के घला ओमन यातायात के साधन रिहिन हे. इही ऑटो चालक मन के जीवन-यापन के साधन रिहिस हे. कोरोना काल मं लाँकडाउन का लगिस ओकर मन के जीवन उपर पहाड़ टूटगे. धपोरदिन, अकबकागे. खाय पिए के सबो साधन छिना गे. सोचे लगिन अब एती का होही, कइसे परान बाचही.

बाद मं बेटी के मुंह ले सबो बात ला ऑटो चालक सुनि
दुनिया मं सबो दुष्ट, राक्षस, गररेता अउ बइमान नइ होवय. कोनो न कोनो विभीसन जइसे महात्मा घलो भेजे रहिथे भगवान हा जउन मुसीबत के बेरा मं नइया पार कर देथे, अइसने कस चेन्नई मं आटो चालक मन बर मसीहा कस अवतरे रिहिस हे नुगंमबाक्कम. जउन ऑटो रिकसा मं आवय जावय तेकर ओला सुरता आगे. सोचिस, लाँकडाउन लग गे हे तब ओकर धंधा-पानी तो सब चउपट होगे होही. का खात-पियत होही, घर गिरहस्ती ल कइसे चलावत होही. ओ ऑटो चालक के नांव रिहिस हे नागलिंगम. एकर टेलीफोन के नंबर नगंमबाक्कम करा रिहिस हे. ओ नंबर ला लगाथे तब नइ उठाइस. दयालु अउ मदद करइया मनखे के मन नइ माड़य. सोचिस, का करौं कइसे करौं. तब एक दिन ओकर बेटी मिलगे, ओला पूछथे-कहां हे तोर ददा हा वो, फ़ोन लगाथौं उठाबे नइ करय. ओला कहिथे तोर ददा के मोला बैंक अकाउंट के नंबर लाके दे. बेटी न सोचिस न समझिस अउ घर ले लाके ओ नंबर ला दे दिस. दुसर दिन ओ सिहनहा हा ऑटो चालक के बैंक अकाउंट मं दस हजार रूपया डार दिस. बाद मं बेटी के मुंह ले सबो बात ला ऑटो चालक सुनि.

ओ खदान ला मोर पांयलागी
मदद बर ओला धन्यवाद दिस अउ ओकर से हाथ जोड़ के बिनती करत एक दिन कहिथे- ददा मोर सही नौ झन अउ ऑटो चालक संगवारी हे. अनुमति देते ते तोर दे दस हजार रूपया मं से नौ हजार रूपया ओ संगवारी मन ला एक-एक हजार दे देतेंव, ओकरो मन के घर गिरहस्ती आगु सरक जतिस. नागलिंगम के ये बात ला सुन के नुगंमबाक्कम के हिरदय मं ख़ुशी के लहर उमड़े ले धर लिस जइसे सागर मं लहरा उछल मारथे. केहे लगिस-वाह रे नागलिंगम, तोर हिरदय कतेक बड़े हे बेटा. तैं कतेक महान हस. तोर जइसे रतन तो भारत भुइंया मं ही जनम ले सकत हे. तैं हीरा हस बेटा, तोर महतारी के कोख, कोख नोहय ओ हीरा के खदान हे. ओ खदान ला मोर पांयलागी.

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