होम /न्यूज /chhattisgarhi /छत्तीसगढ़ी म पढ़व- पेटेचुआ के कंकालीन मंदिर

छत्तीसगढ़ी म पढ़व- पेटेचुआ के कंकालीन मंदिर

.

.

छत्तीसगढ़ म धमतरी-चारामा राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच म गांव मरकाटोला हे. मरकाटोला ले तीन किलोमीटर के बाद गांव पेटेचुआ हे ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

धूंकी कस कतनो बीमारी ले भारी जन धन के हाड़ा होवई ले कंकालीन देवी ह बचा सकथे. जेकर जस ह काली माई अऊ दुर्गा देवी कस भारी हे. कंकालीन देवी करा के तरिया ल खारून नदिया के उद्गम माने गेहे. जिहें पानी पझरत रथे. इहें बछर म एक घांव जोरदार मेला भराथे. इहां के मेला ह देखनौटी हो जथे देखनौटी. अइसे केहे जाथे जेकर लोग इलका नई राहे उन ल डांगधारी मन इहां के मेला म नहाकथे. ताहन देवी किरपा ले उकर कोख ह भर जथे. एह लोक आस्था आय.

सियान मन बताथे
पहिली तो इहां कुकरा बोकरा के बली देवई चलत रिहिसे. अब बली देवई ह थम गे हे. कंकालीन देवी के बारे म सियान मन कहिथे – बहुत दिन पहिली के बात आय ओ समे पेटेचुआ गांव म लछिमन बइगा राहत रिहिस. बइगा ह पेट बिगारी बर मऊंहा बीने खातिर रोजी जंगल चल देत रिहिस. भल्ले दिन गुजरे के बाद अलकरहा घटना घटे बर धर लिस.

घटना घटत आठ पंदरा दिन होगे रिहिस. घटना के कारन खोजत खोजत बइगा ह हदास होगे. जब पता नइ चले बर धरिस त संसो म हाड़ा हो गे रिहिस. हाड़ा काबर नइ होतिस आठ पंदरा दिन ले ओकर बीने मऊंहा ल रोज कोनो ह लुका देवत रिहिस. पहाती ले बीनत – बीनत बेर ऊवत ले बीनय. सकऊ भर बोह के चातर जघा म सुखो देत रिहिस. दुसरइया खेप के लावत ले पहिली के मऊंहा ह सफाचट राहे. भारी मेहनत के बाद जब बइगा ल थोरको सुराख नइ मिलिस ताहन मन मारके सब ल उपर वाले ऊपर छोड़ दिस.

एक दिन मऊंहा सकेलत-सकेलत बइगा ल मुंधियार होगे. तभे उदुप ले बइगा के आघु म दमदम ले देवी प्रगट हो गे. देवी ल देख के बइगा ह दंग रहिगे. सादा कपड़ा पहिरे कवच कुंडल अऊ मुकुट म शोभे चमचम – चमचम करत राहे. थोकिन बर तो बइगा ह सुकुडदुम रहिगे. बइगा के गोड़ ह लदलद – लदलद कांपे बर धर ले रिहिस फेर हिम्मत ल नइ हारिस. बइगा के दशा ल निहार के देवी किहिस-तंय झन घबरा बेटा मंय कंकालीन देवी हरंव. तंय ह मोला गांव म स्थापित कर ताहन मंय ए अंचल के जम्मो बिपत्ती दूर करहूं . अब तंय मोर बात ल मान, तंय ह आगू आगू चल मंय तोर पाछू पाछु आवत हंव. बीच म पलट के झन देखबे कहिके मऊंहा लुकाए के कारण ल बतइस. अतका सुने के बाद देवी के जय बोल के गांव डाहर लेगे बर ओकर अगुवानी करिस.

गांव के तीर म पहुंचते भार बइगा ह देवी ल आवत हे ते नइ आवत हे कहि के पीछू डाहर लहूट के देख परिस. बइगा के लहूट के देखते भार देवी लुप्त हो जथे. देवी के जाए ले बइगा ल भारी दुख तो होइस फेर ओकर दर्शन पाए ले अपन आप ल धन्य समझिस. बइगा ह उही मेर माटी कोड़ के बढ़िया देवी के मूरती बनइस. ओला जउन जघा ले देवी लुप्त होए रिहिस उही जघा स्थापित करके अपन जिम्मेदारी ल पूरा करिस.तीर तार म देवी के भारी मान हे. दूरहि दूरिया ले सोर हे. बाद म श्रद्धालु मन देवी के सीमेंट के मूर्ती बना के स्थापित करीन जऊन ह देखे के लइक हे.

(दुर्गा प्रसाद पारकर छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें