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छत्तीसगढ़ी म पढ़व- महाकवि बाल्मीकि के आश्रम तुरतुरिया

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छत्तीसगढ़ के भुइयाँ धन्य हे जिंहा श्रृंगी, अत्री अउ बाल्मीकि जइसे महर्षि मन साधना करे रीहिन हे. भगवान श्री राम के माता कौशिल्या ह छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा म अँवतरिस. वनवास के समे मर्यादा पुरूषोत्तम राम जिंहे रहि के छत्तीसगढ़ ल धन्य करीस. लोक निंदा के शिकार हो के भगवती सीता इहें आश्रय लीस जेखर कोरा म लव अउ कुश जइसे पराक्रमी युवराज मन पलीस बढ़ीस. जिंहा आदि काव्य रामायण के रचना होइस.

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रचना करइया कवि बाल्मीकि के आश्रम आज के समे म बलोदाबाजार जिला के वन ग्राम तुरतुरिया म रीहिस हे. वोइसे तो भारत के डिगर क्षेत्र वाले मन घलो महान बाल्मीकि ऋषि ल अपन मानथे अउ हो घलो सकथे काबर कि ऋषि मन तो एके जघा बइठ के रहवइया नोहे. जिंहे गीस उहें के होगे. हमरो मन बर घलो विश्वास अउ कतनो तर्क हे. प्रो. बालचन्द्र जैन ह लिखथे कि जनश्रुति के मुताबिक ऋषि बाल्मीकि के आश्रम बलोदाबाजार जिला म तुरतुरिया नाव के जघा आय. जिहें श्री राम के दुनो बेटा लव अउ कुश के छट्ठी बरही उठे हे. ओ समे रायपुर जिला गजेटियर के मुताबिक लोगन मन के अइसे विश्वास हे कि रायपुर जिला के बलोदा बाजार तहसील म तुरतुरिया नाव के जघा बाल्मीकि के आश्रम रीहिस हे. इहें एक ठन नरवा घलो हे जेला बनवाली मन बालमदी नरवा कहिथे. विद्वान मन के मानना हे कि बालमदी बाल्मीकि के अपभ्रंश आय. इहां के रहवइया मन ए नरवा ल सुरसरि गंगा के नाव ले जानथे. सुरसरि के बिगड़े रूप तुरतुरिया गांव के नाव परे होही तइसे लागथे. इही तुरतुरिया म भगवान श्री राम के दुनो लइका लव अउ कुश के जनम होय रीहिसे. डॉ. लक्ष्मी शंकर निगम के मुताबिक लव अउ कुश के जनम तुरतुरिया म बारनवापारा नाव के जघा म होय रीहिस. बाल्मीकि के ददा के नाव ऋषि प्रचेता रीहिसे.

प्रचेता च्यवन ऋषि के वंशज रीहिस. च्यवन भृगु ऋषि के बेटा आय. एकरे सेती एकर वंशज भार्गव कहइन. बाल्मीकि के असली नाव ऋक्ष रीहिस. भृगुवंशी ऋषि बाल्मीकि तो ओकर कुलनाव आय. शतपथ ब्राम्हण के मुताबिक भृगुवंशी च्यवन ऋषि जब एक घांव घोर तपसिया म लीन रीहिस तब ओहा दीमक (बाल्मीकि) ले तोपा गे रीहिस. तिही पाए के ओहा बाल्मीकि कहइस. इही वंश के होय के सेती ऋक्ष घलो बाल्मीकि कहइस. अश्वघोष के मुताबिक रामकथा ल च्यवन ऋषि लिखे के कोशिश करे रीहिस. फेर वोहा सुफल नइ हो पाइस तेला ओकरे वंश के ऋषि प्रचेता के बेटा ऋक्ष ऋषि ह वो राम काव्य ल सिरजइस.

रामायण म च्यवन ऋषि के घलो योगदान हे तिही पाए के ऋक्ष ऋषि ह अपन कुलनाव बाल्मीकि ले जग जाहिर करीस. एक बात जानना जादा जरूरी हे कि च्यवन ऋषि के आश्रम तमसा तीर कोनो करा रीहिस जेहा बाल्मीकि आश्रम के नाव ले प्रसिद्ध रीहिस. काबर ए ऋषि ल पहिली बताए के मुताबिक बाल्मीकि काहत रीहिन. ओकर वंशज वृक्ष ऋषि ह घलो बाल्मीकि के नाव ले प्रसिद्ध होइस. उमन ह अपन आश्रम ल तुरतुरिया म बनइस. ऋषि मुनि मन एक जघा ले दुसर जघा किंदरत रथे, मने कि जघा बदलत रहिथे. एकर गवाही श्रृंगी ऋषि हे. ओकर ददा विभाण्डक मुनि के आश्रम चन्द्रपुर (महाराष्ट्र) के भान्दक नाव के जघा म रीहिस फेर श्रृंगी ऋषि ह अपन आश्रम ल महानदी के उद्गम स्थल सिहावा म बनइस. अइसने किसम ले अपन ददा के बात मान के नही ते जघा बदले के सेती ऋक्ष ऋषि ह तुरतुरिया ल अपन आश्रम बर चुनीस.

श्रीराम-सीता अउ लक्ष्मण ह बनवास के समे अघात दिन ल छत्तीसगढ़ म काटे रीहिस. जे समे इमन बनवास काटत रीहिन ओ समे छत्तीसगढ़ राक्षस मन ले हलाकान रीहिस. ए राक्षस मन शोषण के संगे संग गंदगी घलो करय. लूटय अउ खून खराबा घलो कर देवै. अइसन विषम परिस्थिति ले भगवान राम ह छत्तीसगढ़ ल उबारीस ताहन तो छत्तीसगढ़िया मन बर भगवान राम लोकप्रिय जन नायक होगे अउ खास बात तो ए हे कि कौशल्या जी के बेटा होय के सेती भगवान राम ल भांचा मान के प्रेम करथन या नही ते ए कहना जादा उचित हे कि भांचा ल भगवान राम मान के पूजा करथन ओकर पांव ल धो के चरनामृत पी के भांचा के पांव परथन. राक्षस मन ले मुक्ति पाए के बाद इहें के मनखे मन भगवान श्री राम के गुनगान करीन.

तिही पाए के श्री राम ले जुड़े लोक गीद मन बनवास काल के समे के होही तइसे लागथे. महाकवि बाल्मीकि छत्तीसगढ़ म इही पाए के आए रीहिस ताकि च्यवन ऋषि के आधा काम ल पूरा करे जा सके अउ होइस घलो अइसने, जउन अंचल म बाल्मीकि रामायण लिख के इतिहास बना दिस.

(दुर्गा प्रसाद पारकर छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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