होम /न्यूज /chhattisgarhi /छत्तीसगढ़ी में पढ़ें - मड़ई उत्सव जाबोन मड़ई अऊ खाबोन मिठई रे

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें - मड़ई उत्सव जाबोन मड़ई अऊ खाबोन मिठई रे

.

.

छत्तीसगढ़ म मड़ई उत्सव के विशेष महत्व हे. गांव के कोतवाल ह हाट-बजार म हांका पार के जन मानस ल मड़ई देखे बर नेवता देथे. अधिक ...अधिक पढ़ें

जेखर सोर ह दूरिहा-दूरिहा ले उड़े रहिथे. वोइसे तो बोलचाल के भाषा म मड़ई के शाब्दिक अर्थ मिलन होथे, जऊन ल मड़ई म सोर-संदेश लेवत-देवत देखे जा सकत हे. मड़ई हमर संास्कृतिक विरासत हरे जेन ल अवइया पीढ़ी ल सुरक्षित सौपना हे. मड़ई उत्सव मैत्री पूण आपसी सद्भाव अऊ राष्ट्रीय एकता के झांकी हरे. कहुंचो-कहुंचो तो मनचलहा टूरा मन, असमाजिक तत्व मन अतेक बढ़िया सद्भाव पूर्ण वातावरण ल गंदा करे बर धर ले हे. महंगाई ह मड़ई उत्सव ल प्रभावित करत हे. तभो ले छत्तीसगढ़ के जन-मानस बड़ा उत्साह ले मड़ई मनाथे. लइका मन तो उत्साह म नाचे कुदे ल धर लेथे-अरे ररे भाई रे, जाबोन मड़ई अऊ खाबोन मिठई रे…अब सवाल ये उठथे कि छत्तीसगढ़ म मड़ई उत्सव काबर मनाथें? एहा एक ठन शोध के विषय हरे. मड़ई ले जुड़े कुछ जानबा येदइसनहे-

मड़ई काबर मनाथन? भगवान श्री कृष्ण के बुध म आके गोकुल म इन्द्र के पूजा ल तियाग के गिरिराज गोवर्धन के पूजा करे ल धर लीन. तहान इन्द्र ह तमतमागे अऊ गोकुल ल बुड़ोए बर परन करीस. श्री कृष्ण ह गोवर्धन पर्वत ल उठा के इन्द्र के अइसन कोप ले गोकुल के रक्षा करीस. इन्द्र के उपर श्रीकृष्ण के विजय के खुशी म जउन पताका लहरइस उही ह मड़ई हरे. तेखरे सेती छत्तीसगढ़ म गोवर्धन पूजा करे के बाद गांव से ले के सहर तक मड़ई उत्सव ल मनाथे. नृतत्व शास्त्री मन के कहना हे कि मड़ई उत्सव ह कृषि सभ्यता के देन हरे. छत्तीसगढ़ ल वनवासी अंचल के रुप म जाने जाथे. इहें के रहवइया मन वनवासी जीवन ल बिसर के मन कृषि जीवन ल अपनइन. खेती के बूता ल चालू करे बर ‘वर्षा नृत्यघलो करत रीहिस होही जऊन ह एदे पंक्ति ले अऊ पोट्ठ लागथे- नांगर बइला बोर दे पानी दमोंर दे. ‘मड़ई’ फसल लुए के बाद के लोक उत्सव हरे. मड़ई ल कृषि ले जुड़े उत्सव घलो मानथन. मड़ई उत्सव ल गांव के वार्षिकोत्सव के रुप म घलो मनाथन.

मड़ई कब बनाथन? मड़ईया मन मड़ई ल सुरहोती (लक्ष्मी पूजा) के रात बनाथे. सुरहोती रात के आखिरी पहर अपन-अपन शक्ति के मुताबिक कुकरा (मुर्गा), बोकरा (बकरा), बधिया (सूअर,नायडू) मन के बलि दे के परम्परा आजो घलो जीवित हे. बलि चघाए के बखत पूजा म पानी के जघा देशी दारु (शराब) के आचमन कर के हृूम देथे. सुरहोती रात म बलि न दे पाए के स्थिति म होली (रंग खेले के दिन) के दिन बलि चघाथे. मड़ई ल लगातार तीन बछर ले बनाये बर बाध्य रहिथे. जऊन मनखे (परिवारे भीतर के) ह मड़ई धर के हलाथे. ओला नशा करई ह मना रहिथे फेर आजकल तो अपन खुशी ल देखाए ब रमंद पी के राऊत मन संग मड़ई नृत्य करथे. जऊन ह बने बात नोहे.

मड़ई के किसम -मड़ई म तोरन – पताका ल तान के रखे खातिर पकती (बेला नार के गोल पकती या लकड़ी के ढेरा खाप पकती) बनाए जाथे. पकती ल ब्यूह रचना घलो कहिथन. सात, नौ अऊ बारा पकती के अइलगे-अइलगे तीन किसम के मड़ई के मड़ई खड़ा करे जाथे जऊन ल आजो घलो सीजन म गांव-गांव म देखे जा सकत हे. पकती ह देवी-देवता मन उपर आधारित रथे. जउन परिवार म जतना पकती के मड़ई बनाए के परम्परा चले आवत हे ओखर वंशज मन घलो ओतनेच पकती के मड़ई बनाथे. न जादा बनावय न कम. मड़ई तीन किसम के होथे (१) शत्ती (२) नम्मू (३) बरइहा.
शत्ती – शत्ती (शप्त मातृका) के मनइया मन सात पकती के मड़ई बनाथे. शप्त मातृक के सात रुप एदइसन हे – (१) ब्राम्हणी (२) माहेश्वरी (३) कौमारी (४) वैष्णवी (५) बारही (६) चामुण्डा (७) इन्द्राणी.

नम्मू – नम्मू के मनइया परिवार मन नव पकती के मड़ई ल सिरजाथे. मड़इया मन म अइसे धारणा हे कि नौ पकती के मड़ई बनइया मन नौ दुगौ ल मानथे. तेखरे सेती उन ल नम्मू के मनइया केहे जाथे. नौ दुर्गा के नौ रुप एदइसन हे- (१) शैल पुत्री (२) ब्रम्हचारणी (३) चन्द्र घंटेती (४) कृष्माण्डेती (५)स्कंध (६) कात्यायनी (७) काल रात्रि (८) महागौरी (९) सिद्धीदात्री.

बरइहा – बरइहा परिवार के सियान मन बरइया मन बरइया मड़ई उपर अपन बिचार अइसन किसम ले रखथे. बरइया मड़ई के बनइया मन बारा राशि, बारा महिना अऊ बारा आदित्य के प्रतीक स्वरुप बारा पकती के मड़ई बनाथे. सोरइहा (सोला पकती) मड़ई बनाए के घलो चलन रीहिस हे जऊन ह आजकल देखे बर नइ मिले.

मड़ई कइसे बनाए जाथे? मड़ई सिरजाए खातिर जंगल ले जुड़े जिनीस के जरुरत परथे. पहिली तो मड़ई म तोरन पताका नइ लगावत रीहिन. अभीन घलो कतको जघा मड़ई के मूल रुप ल देखे जा सकत हे. फेर अधिकांश जघा मड़ई ल बढ़िहा दिखही कहि के तोरन पताका के उदीम करथे. मड़ई बनाए बर खाल्हे तनी लिखाए जिनीस के बेवस्था करे बर परथे.
बांस – बांस ह मड़ई के अधार स्तंभ हरे. बांस ह पंदरा-बीस हाथ लम्हरी रहिथे. वैदिक काल म ‘मड़ई’ पंदरा बीस हाथ शल्की, चंपक, अर्जुन अऊ कदम जइसे पेड़ मन के लकड़ी ले बनावत रीहिन. जेखर बदला म अब बांस के उपयोग करथे.

सुमा डोरी – कांसी ल बर के डोरी बना लेथे, ताहन ओला ढेरा म आट के इही सुमा डोरी म ताव ल तीन कोनिया कांट-कांट के चिपका के तोरन बनाथे. पकती – मड़ई म पकती के विशेष महत्व हे. जेखर प्रयोग सुमा डोरी ल एक पकती ले दुसर पकती तक जोड़े बर होथे. कंदइल के डारा – सुमा डोरी म कंदइल के डारा ल गूंथ दे जाथे. जेखर से मड़ई के शोभा ह देखते बनथे.

मेमरी, सिलियारी, धान के बाली, मयुर पंख अऊ पीतल के कलस (कुण्डल) आदि ले मड़ई के शीर्ष भाग ल सजाए जाथे. जऊन ल गोवर्धन पर्वत के प्रतीक माने गे हे. जऊन गांव म ‘मड़ई’ भराथे ओ गांव के राऊत मन मड़ई ल बाजा के संग नाचत गावत बजार-हाट घुमाथे. अइसे केहे जाथे कि नम्मू, शत्ती, बरइहा, खैरागढ़िया, दुल्हा देव, साहड़ा देव आदि देवी देवता के मनइया केंवट, गोड़, ढ़ीमर जात के मन मड़ई बनाथे.

मड़ई पूजा – जऊन परिवार म मड़ई बनाथे ओमन अपन नता रिश्ता ल मड़ई देखे बर नेवता देथे. जऊन किसम ले बिहाव के बखत मऊर सौपे जाथे उही किसम ले मड़ई ल घलो नवा धोती पहिरा के मड़ई के मऊर सौपे जाथे. मऊर सौपे के बाद गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम म संघरे बर सनमान पूर्वक बिदा करथे.

राऊत मन मडई ल परघा के ग्राम देवता मन ल गोर्वधन पूजा बर नेवतथे. गोर्वधन पूजा होय के बाद मड़इया मन मड़ई ल अपन-अपन घर लेग जाथे. घर म पहुंचते भार माईलोगन मन मड़ई के सुग्घर आरती उतार के स्वागत करथे. मड़ई के चरण पखार के आसन म पधरा देथे. येखर बाद तो छत्तीसगढ़ भर मड़ई उत्सव अपन सुविधानुसार मनाथे.

मड़ई नेवता – जऊन गांव म जेन दिन मड़ई भराथे ओ दिन बर तीर-तखार के मड़इया मन ल मड़ई धर के आए बर सुपारी दे के नेवता दे के परम्परा चले आवत हे. दुसर गांव के मड़ई ल बाजा गाजा के संग परघाए जाथे.

स्वागत म सात पकती (शत्ती) के मड़ई ल करिया चूरी (चूड़ी पाठ) अऊ बंदन ले, नौ पकती के मड़ई ल नरियर भेंट कर के परघाए जाथे. मड़ई मन ल परघाए के बाद बजार बिहाए बर लेग जथे स्वागत से बिदाई के बीच मड़ई रिसाथे घलो जेन ल नरियर दे के मनाए जाथे. दुसर गांप ले मड़ई लवइया मन ल बिदा के बखत रुपिया-पइसा भेंट करे के परम्परा चले आवत हे. जेला लोक भाषा म पीयई देवई कहिथन. पीयई देवत खानी ‘‘मया-दया ल घरे रइहौ अऊ भूल-चूक ल माफी देहू रे भई, हां. जीबो ते फेर साल संघरबो’’ कहिके राम रमउव्वा देवत-लेवत चोंगी पिया के बिदा करथे.

(दुर्गा प्रसाद पारकर वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarh language, Chhattisgarhi News

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें