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छत्तीसगढ़ी विशेष - फूलकुंअर बेटी के सरपंची

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संगति अउ पइसा मति ल फेर देथे. जइसे-जइसे पंचइती के आवक बाढ़ीस तइसे-तइसे बेटी फूलकुंअर के खरचा घलो बाढ़ीस. क़ानून कायदा के ऐ ...अधिक पढ़ें

बोकराटला कस्बा ले पन्दरा किलोमीटर दूरिहा पहाड़ी के खाल्हे डाहर अउ नदिया के करार(किनारा) म बसे हे. पहिली रद्दा के नाव ले के पैयडगरी(पगडंडी) रहय. नदिया उपर पूल-पुलिया नई राहय. बरसात म नदिया ल नाहके बर एक्का-दुक्का डोंगा(नाव) मिल जाय. गाँव ले शहर आना-जाना कठिन हो जाय. गाँव के आबादी एक हजार ले आगर रिहिस होही. अब त डेढ़ हजार ले आगर होही. गाँव म बड़ सुनता राहे. सियान मन के बड़ कदर होय. लोग उनकर सलाह लेके बुता करें. लड़ई-झगरा कभू-कभू होय. सियान मन ओमन ल समझा-बुझा के मामला शांत कर देंय. सालों-साल ए गाँव के मन कछेरी-अदालत के चक्कर ले दुरिहा रिहिंन. बोकराटोला के किसान मन बड़ मिहनती खेती-खार के बुता म दिन-रात एक करके जांगर टोर कमइया के नाव लेके जाने जांय.

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बोकराटला गाँव म जब पंचइतीराज अइस तब वुहाँ के गँवइहा मन खूब खुश होइंन. चल अब हमर गाँव म पंच-परमेश्वर के राज चलही. पंच-परमेश्वर मन मोतीचूर के लड्डू बांटिन. का सियान, का लइका अउ का जवान सब के मुँह मीठ होगे. पंचायत म पहिली बखत बेटी फूलकुंअर सरपंच बनिस. बने पढ़े-लिखे रिहिस. पटर-पटर अंगरेजी बोले. सब संग मीठ-मीठ गोठियाय. दूसर के सुख-दुःख म काम आय. बस्ती भर ओला फूलकुंअर बेटी कहें. ओखर उमर यही कोई एक्कीस-बाईस बरस के रिहिस होही. जब पंचायत चुनाव अइस, त फूलकुंअर ल सब किहिन चुनाव म तहूँ खड़े हो जा. सरपंच बन जा, नोंनी. फूलकुंअर किहिस तुमन मोर पक्का संग देहूँ तब मैं विचार करहूँ. पारा के सब माई-पिल्ला किहिन हम तोर संग हन? अउ चुनाव म फूलकुंअर बेटी सरपंच चुनागे. गाँव के मन सब खुश होइंन चल बस्ती म बेटी राज आगे. महिला सशक्तिकरन होवत हे. साल दु साल बने चलिस तहाँ ले फूलकुंअर बेटी हवा-हवाई होगे. गाँव के विकास ल छोड़ के अपने विकास म लग गे. कइसनो कर लेव फेर कुरसी के गरमी मुड़ उपर भारी होथे. पंचायत के बुता ले ओखर शहर आना-जाना बाढ़गे. छोटे-बड़े मनखे मन संग बइठना-उठना, आना-जाना परे. धीरे-धीरे गाँव म ओखर कइ परकार के कथा-कहनी सुनाय. फूलकुंअर बेटी के रूआब बाढ़गे. प्यार-मोहब्बत के फेर म परगे. ओखर तन-बदन ले जवानी छलके लागिस. धीरे से फेर सुनइस बोकराटोला के सरपंच फूलकुंअर बेटी बिहाव कर लिस. ओखर दाई-ददा खबर सुन के दंग रहिगे. एतराब म एखर चरचा खूब चलिस. फूलकुंअर के दाई-ददा का करतिन बेटी बालिग़ हे. बिहाव कोरट(न्यायालय) म करिस. घर म कहा सूनी होइस. दाई-ददा खिसियाके रहीगें. उन ल समझ म नइ अइस के फूलकुंअर म अतेक बदलाव कइसे होगे. नोंनी फूलकुंअर गाँव छोड़ के शहर म बसगे.

फूलकुंअर के पतिदेव ह शेडो (छाया) सरपंच होगे. धीरे-धीरे ओखर खीसा पंचायत के बैंक हो गे. बस्ती मफेर नवा बात ले के कानाफुसी शुरू होगे. उप-सरपंच अउ पंच मन के उपेक्षा बाढ़गे. जेन पंचायत ह जिला म बने सुनता वाले अउ श्रेष्ठ पंचायत माने जाय उहाँ कलह शुरू होगे. पंच मन दु-तीन गुट म बंटगें. शेडो सरपंच के हर गतिविधि उपर गाँव वाले मन के नजर गड़े राहय. सरपंच फूलकुंअर कभू-कभू पंचायत-भवन म आ के बइठे. नहिं त पंचायत बैठक के दिन आतिस फेर शहर लहुट जतिस. बाकी समे म सरपंच पति अपन आप ल फूल टाइम सरपंच माने. हुशियारी झाड़े. गोपीचंद ओखर नाव रिहिस. नवा-नवा अइस तब खूब टेस राहय. एक दिन ओखर रंग-ढंग ल देख के गाँव के एक झन सियान महिला हठीयारिन राशन कारड के नाव लेके ओखर छट्ठी-छेवारी गिन दिस. गारी गुफ्तार आम बात होगे. गोपीचंद कुम्हलागे. ओहा गपेडू अउ कोढ़िया नंबर-वन रिहिस. बस्ती म असंतोष सुलगन लगिस.

पंचायत म कभू ये डाहर ले पइसा आय. कभू ओ डाहर ले. शेडो सरपंच के दारू म डूबकना, झूमना अब आम बात होगे. संगति अउ पइसा मति ल फेर देथे. जइसे-जइसे पंचइती के आवक बाढ़ीस तइसे-तइसे बेटी फूलकुंअर के खरचा घलो बाढ़ीस. क़ानून कायदा के ऐसी-तैसी होगे. रूपिया आवत गिस, खर्चा बाढ़त गिस. बजार किराया के पइसा मैडमजी के पर्स म चल देय. न लिखा, न पढ़ी. हिसाब किताब जाय चूल्हा म. ररूहा सपनाय दार भात के जगा अब खीर-पूरी साक्षात मिलगे, फूलकुंअर के लाली-बाली दिखे लगिस. पंचायत के पइसा दारू म घलो घुरत गिस. गोपीचंद गाँव-शहर म जहाँ-तहाँ उतान परे राहय. बहुत जल्दी फूलकुंअर बेटी के चटक-चांदनी खतम होगे. चाउर-दार, पिसान के भाव भारी होवत गिस. शेडो सरपंच गोपीचंद कम पढ़े लिखे बिगड़े नवाब रिहिस. शहर के रहवइया अपन दाई-ददा, भाई-बहिनी ल छोड़ के शहर के दूसर पारा म किराया के घर ले के फूलकुंअर संग राहय. निच्चट कोढ़िया अउ परजीवी मनखे दिखे म जांगर गरू राहय. चार दिन नवा जोड़ी, नवा सपना रिहिस. शहर ले गाँव आवत-जावत राहँय. फूलकुंअर ल सपना देखा के फांस डरिस. चढती जवानी लावा बरोबर होथे. कदम बहकत देरी नइ लगय. फूलकुंअर बाद म ओखर अवगुण ल जानिस. चटक-मटक म जेन मोहा जथें उनकर इही हाल होथे. गोपीचंद ह फूलकुंअर ल साल भर म झूठ कहनी के चक्रव्यूह म फ़ांस डरिस. दुनो खूब रंगीन सपना देखिन. गोपीचंद के बाप सोना-चांदी के दुकान म कारीगर रिहिस तेला ओहा सोना चांदी के बड़े बैपारी बता के फूलकुंअर ल गुमराह करे म सफल होगे. झूठमूठ के लाखों-करोड़ों के बैंक बैलेंस के नवा-नवा कथा-कहनी गढ़ीस.झूठ के दुनिया अड़बड़ चमकत दिखथे.

फूलकुंअर साधारण परिवार के बने मिलनसार छोकरी रिहिस. सरपंच बनिस त ओखर आँखी चकचकागे. शुरूआत म ओखर जिनगी म वसंत-बहार आगे. गाँव के विकास ले जादा जरूरी ओखर अपन विकास होगे. ओ हर फुर्र-फुर्र उड़न-चिरइया होगे. कभू ये डाहर ले पइसा आय कभू ओ डाहर ले. सीधा सरपंच नहिं त शेडो सरपंच के जेब के हवाले हो जाय. इही बीच म फूलकुंअर दु लइका के महतारी होगे. ओ हर समझगे के गोपीचंद ओखर संग बड़े दगाबाजी करे हे. अब का हो सकत हे जब चिरई दाना चुग के उड़ागे, जीवन भर झेलना हे. ओखर अपन गाँव छूटगे. गाँव के मया छूटगे. पंचायत म ओखर पक्ष म बोलइया कोनो नइ रिहिस.

जब सरकारी पइसा के खानगी निकलिस त फूलकुंअर संग कोनो नइ रिहिस सिवाय ओखर आँखी के आंसू के हालत खराब होगे. गोपीचंद दारू पिए जहाँ-तहाँ परे राहय. ओखर दाई-ददा मनओला जियत तियाग दिन, कभू ओखर सुध नइ लिन. बोकराटोला पंचायत म भ्रष्टाचार अउ गबन के खबर अतराब म फइलगे राहय. बस्ती म कोनो काहत राहंय हजारों-लाखों के घपला हे. सबे सरकारी मद के पइसा डकारेगे हे. कोनो किहिस बजार तिर बीस नग नवा आवास बना के बेचेगे हे. बिना रसीद काटे लाखों रूपिया के वारा न्यारा कर दे गे हे. बजार किराया के पइसा मैडम जी सीधा अपन पर्स म रखे अउ खरचा करे. कोनो किहिस नवा पट्टा बनत गिस त हर पट्टा पाछू पचास हजार रूपिया ले रिहिस. गरीबी रेखा के राशन कारड बनाय बर घलो पइसा वसूले गे हे. नकली गरीब मन ल असली गरीबी रेखा के राशन कार्ड बनवा दे हे. जे झन मनखे ओखर ओतके अकन गोठ.

पंचायत म आडिट होइस त लाखों के घपला आगू अइस. कार्रवाई शुरू होइस. राजनीतिक दबाव म कभू कार्रवाई होवत-होवत म रूक जाय. जिला म कड़ा सुभाव के कलेक्टर अइस त बिना रुके कार्रवाई शुरू होइस. गाँव के पंचायत म पुलिस के आना जाना शुरू होइस. फूलकुंअर के पति देव के दारू ढोकना, अपन सरपंच पत्नी ल मारना पीटना जारी रिहिस. फूलकुंअर अब अपने घर के खूंटा म बंधागे. दु लइका के जवाबदारी, दरूवाहा अउ ठलहा पति के भार भारी होवत गिस. उपर ले पंचायत म गबन के मामला. चारों खुंट अंधियार दिखे लागिस. परिवार के व्यवस्था घलो डगमगाय लागिस. एक रात गोपीचंद मनमाने दारू पी के सड़क म घोंडे रिहिस. आधा रात म कोनो भारी वाहन ओखर उप्पर ले चलगे राहय. ओखर मृत शरीर सड़क के पाई म फेंकागे अउ शरीर के हड्डी चकनाचूर होगे राहय. ओखर मृत्यु के खबर सुन के फूलकुंअर के परान सुखागे. नियति के खेल आगू सब नतमस्तक होगें. खबर सरपंच के दाई-ददा ल मिलिस उन बहुत दुखी होइन. पंचायत के खानगी के भरपाई करे बर फूलकुंअर के ददा अपन खेत के जमीन बेचिस अउ लाखों रूपिया गबन के रकम ल भरिस. महतारी-बाप फूलकुंअर बेटी के आंसू पोछिस अउ ओला वापिस अपन गाँव बला लिन. बोकराटोला गाँव के मन पहिली बोकरा-बोकरी जादा पाले-पोसें तेखर सेती गाँव के नाव बोकराटोला होगे. फूलकुंअर गाँव के बड़े-छोटे सब ल माफी मांगिस अउ एक ठन निजी स्कूल म मास्टरिंन होगे. (लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

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