छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- बरछा खार मा चुहके कुसियार

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सत वादी आजो हावंय अपन कलेचुप गणना काल के गणना मा लगे हावंय तभे तो दुनिया चलत हे. नइते कब ले हमन रसातल मा समा जातेन. जतन करइया के नाम लेवत सबो झन उप्पर डहर ला काबर देखथें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 4:58 PM IST
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काला कहिबे , कोन पतियाही अइसे बात नोहे. आजो हमर जिनगी मा मिठास हावय अउ परलय के होवत ले रइही. चुनचुनिया भाजी असन के सुवाद ला तें नइ पतियाए काबर के आजो वो हा ओइसनेच हावय फेर जल प्रदूषण ला कोन सुधारय सबो कोती कहिले चारों मुड़ा देखले प्रकृति के दोहन करईया आंखी मूंदे रेंगत हांवय. तिरिया के रेंग लिही फेर चिन्तन करके देखे बर समय नइये कहिथें.

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जरमूर मा मिठास कइसे आही

डंगडंगले ठाढ़े कुसियार मीटर दू मीटर होथे तइसे जानना हे ते बरछा खार कोती जाए बर परही. अपन जर ला जमाए रइथे एकरे सेती ओकर मिठास ला कई रूप मिल जाथे. मनसे मन के जर ला घलाव टमरके देखे जा सकत हे. एमा भावना के जर रइथे तेन हमला मिठास बगराए के अनुभो कराथे. कुसियार असन के जीव जांगर मा कतका मिठास समाए रथे ते सबो जानत हन. फेर आजकल मानवता के मिठास हा काबर खारो होवत हे सोंचे बर परही. देखबे ते कुछु नइ दिखए फेर परथे ततके म जान डारथन अइसे होगे हे संसार. मुड़ ऊचाए कतका दुरिहा रेंगबे. अपट के गिरे के डर सबो ला रइथे फेर का कर लेबे. तेकरे सेती केहे गेहे अपन जरमुर डहर लहुटव. जरमुर मा लहुट के आनच परही. सबो के बिगाड़ करइया घलो सुरतावत होही. एको दिन पाछू लहुट के देखही. हमला ऊही दिन के अगोरा हावय.
चेत करइया ला कोन चेताही

सबो योनि मा एक विधान होथे. ऊही विधाता के रंगे रचे सबो झन ला जान. फेर काबर सुतरी ढिल्ला होवत हे. तोरे बरे अउ तोरे लमाए सुतरी गठनहा काबर होवत जावत हे. बेर ऊजर चौबीसों घंटा मा हिसाब देवइया नइये कहिके सबो चलत हावय. फेर के दिन ले चलही. चलत-चलत घलाव घाँठा पर जथे अउ उही हा जियानथे. जियानिस तेने दिन जानले अब परिवर्तन के दौर आने वाला हे. परिवर्तन के दौर समय काल अउ परिस्थिति के गणना मा जनाथे. आपे आप घटना घटित होवत चलिस अउ तोला अजम करे के मौका भी मिलिस फेर तें ठऊर ला नई पाए. पा जाते न ततके मा चेत जाते. चेत भुलहा मन ला चेताने वाला समय परे मा परगट होके चेताथे. हमन अपन सेती नोहन सबो के सेती हरन. सबो जीव मा जागरण काल के गणना निश्चित हाबे.

जीवन रस मा स्वाद कहां ले आही



आज के जमाना मा तीर तखार के बात होतिस त जान लेतेंव अइसे कहिके कोनो बांचना चाहत होहीं ते बात अलग हे. नईते बात कहत देरी हे सबो किसम के जवाब हाजिर हे.हाजिरी देवाए के जरूरत नइये. तें आए हवस तोर हाजिरी लगगे. जाने पहिचाने के पंचाइती करना तोर काम नोहे. सत वादी आजो हावंय अपन कलेचुप गणना काल के गणना मा लगे हावंय तभे तो दुनिया चलत हे. नइते कब ले हमन रसातल मा समा जातेन. जतन करइया के नाम लेवत सबो झन उप्पर डहर ला काबर देखथें. काबर के उनला विश्वास हे कोनो न कोनो हावय तेन ए लीला चक्र ला घुमावत हावय. आना जाना लगे हावय अउ लगे रइही. करमरत कमइला के सेती धरती मइया अन्न - धन ले भरपूर राखे हे अउ राखही. हमन ला अपन जर कोती जाके मिठास ला सबो रुप दर्शन कराना हे. इही जीवन के सार हरय. ( डिसक्लेमर- लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं.)
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