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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- ये दे जिनगी के नइहे ठिकाना...

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- ये दे जिनगी के नइहे ठिकाना...

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सही बात हे, आज जिनगी के ककरो कांही ठिकाना नइहे? कब, कतका बेर, कहां, का हो जही, कोनो सही-सही नइ जान सकय, न बता सकय? भले बड़े-बड़े गियानी विज्ञानी, रिसि-मुनि, जोतिसी अउ भविष्य बंचइया वाला होय हे फेर उकरो मन के गनित फेल खागे हे, सही-सही नइ उतर पावत हे.

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सोलह आना मं चार आना फरक खा ही जथे. हां, अचानक कोनो मेर कांही घटना, दुरघटना हो जथे तब एक ले बढ़ के एक दावा करइया आ जथे, अउ कहिथे- देखे ना, मैं केहे रेहेंव ना, अमुक-अमुक साल के अमुक महीना के फलाना तिथि-बदी मं दइसे-दइसे घटना-दुरघटना होही. अब जउन होना हे तउन तो होबे करही, ओला ब्रम्हा का ब्रम्हा के बबा-ददा आ जही तउनो नइ रोके सकय. फेर भविष्य बचइया जोतिसी मन के गुना-भाग दावा पर दावा शुरू हो जथे.

ओ दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बहुत बड़े दुरघटना के शिकार होवत बाल-बाल बाचगे. किसान मन के प्रदर्शन के सेती प्रधानमंत्री के काफिला फ्लाइ ओवर मं बीस मिनट तक फंसे रहिगे. ओला फिरोजपुर मं आयोजित कार्यक्रम मं भाग लेना रिहिसे. मौसम के गड़बड़ी के सेती सब गुह-गोबर होगे. अतके बात ला लेके हंगामा होगे. ये सब होइस कइसे, पंजाब सरकार, ओकर अधिकारी, केन्द्र सरकार, गृह विभाग अउ प्रधानमंत्री के सुरक्षा मं लगे , एसपीजी के अफसर, जवान, प्रोटोकाल के अधिकारी अउ आईबी सब के कान खड़ा होगे, अउ केहे लगिन के प्रधानंत्री के सुरक्षा मं बहुत बड़े चूक होगे. अइसन नइ होना चाही. कोन हे एकर जवाबदार. सब एक-दूसर ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगावत हे.

प्रधानमंत्री देश के बहुत बड़े हस्ती होथे, ओकर सुरक्षा मं चूक होना कोनो नानमुन खेल नोहय, जरूर कोनो मेर न कोनो मेर चूक होय हे? अब कोन मेर, कहां अउ काकर ले अइसन बड़े चूक होय हे या फेर कोनो षडयंत्र करे हे, ये सब के जांच के सवाल उठत हे. सबले पहिली बात ये हे के प्रधानंममत्री के फिरोजपुर दौरा के रस्ता के जानकारी प्रदर्शनकारी किसान मन ला कइसे मिलिस, दूसर बात मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव अउ डीजीपी प्रधानमंत्री ला रिसिव करे बर मौका मं कइसे अउ काबर नइ पहुंचिन, मोदी के सुरक्षा मं सेंधमारी करके कइसे बहिरी मनखे नारेबाजी करत प्रधानमंत्री के कार तक कइसे पहुंचगे. ओमन समय रहिते हटाए काबर नइ गिस. अइसन कतको सवाल उठथे अउ संदेह ला जनम देथे के मोदी के सुरक्षा मं जानबूझ के हीला हवाला करे गे हे.

खैर, जउन होना हे तउन तो होगे, ”जाको राखे सांइयां मार सके न कोय मोदी बाचगे. अउ कइसने करके मोदी के काफिला वापस भटिंडा एयरपोर्ट तक पहुंचगे. अउ इहां मौजूद पंजाब के अधिकारी मन ला किहिस- अपन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ला बताहौ मैं (मोदी) एयरपोर्ट तक सुरक्षित आगे हौं, एकर बर ओला (चन्नी) ला धन्यवाद कहिहौ.

ये घटना के बाद केन्द्र सरकार अउ पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक तूफान मचगे हे. सब नेता अउ अधिकारी एक-दूसर ऊपर वाक-तीर चलावत हे, आरोप-प्रत्यारोप लगावत हे. कोनो पंजाब के चन्नी (कांग्रेस) सरकार ऊपर आरोप मढ़त हे के पीएम के सुरक्षा मं ओहर लापरवाही बरते हे जबकि चन्नी काहत हे के पीएम के दौरा के सुरक्षा व्यवस्था के पूरा जिम्मा एसपीजी के अधिकारी के होथे. राज्य सरकार जउन-जउन सुविधा ओहर मांगथे तेला मुहइया कराय जाथे. अब एमा चूक होगे हे तेकर बर राज्य सरकार कोन मेर दोषी हे. तब कोनो गृह मंत्री अमित शाह करा ले इस्तीफा मांगत हे. गृह विभाग ओकर हाथ मं होथे. ओकर सरकार, ओकर मंत्री के रहिते अतेक बड़े चूक हो जाना कोनो नान-मुन बात नोहय.

अब घटना के जांच मं पंजाब सरकार अउ केन्द्र हा अलग-अलग जांच कमेटी तय कर दे हे. इही बीच सुप्रीम कोर्ट डंडा चला दे हे, ये मामला के जांच सिरिफ सुप्रीम कोर्ट करही. ओकर खातिर सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व न्यायाधीश श्रीमती इंदु मलहोत्रा के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित करे गे हे. अब तो जांच रिपोर्ट आय के बाद ही पता चलही, के सच्चाई का हे.

घटना के बाद मोदी, राष्ट्रपति करा जाके मिलिस, अउ दौरा के पूरा विवरण दीस. ओहर दुख जताइस, अइसन नइ होना चाही. देशभर मं ये घटना के सबो नेता पक्ष-विपक्ष मन निंदा करिन, किहिन पीएम के सुरक्षा मं अइसन लापरवाही नइ बरतना चाही.
अभी कुछेक दिन पहिली के बात हे, सेना के बहुत बड़े अधिकारी ”प्लेन क्रेश’ मं पति-पत्नी समेत कतको जवान मन के जान चले गय. उकरो जांच पर कमेटी गठित करे गे हे. फेर सवाल ये बात के नइहे के जांच समिति बनाय ले कोनो समस्या के हल हो जाही, सवाल ये हे के जांच मं जउन दोषी पाय जथे ओला का कोनो कड़ा दंड मिलथे, जेकर से अवइया समे मं अउ कोनो दूसर जान-सुन के, लापरवाही मं या षडयंत्र करके अइसने कोनो घटना ला अंजाम देवय.

सोचे बर परथे जब देश के माई-मुड़ी मुखिया के ही सुरक्षा मं खतरा होथे, तब देश के जनता मन के तो भागवने मालिक हे. कोरोना छाती ऊपर चढ़े हे, राक्षस बरोबर सब के हलाहल करत हे, खून पीयत हे, जीना हराम कर दे हे. दिन मं चैन न रात मं. ओ साल अइसने लाखों मनखे के जान लिस बइरी-चंडाल हा. अब फेर आंखी गुरेरत हे, कालिया दाह मं फन काटे नागदेव बरोबर फुफकारत हे. तइसन हालत मं देश के मुखिया ला कहूं कोनो डेरवाही, तब देश के का होही, नइ करना चाही अइसन. जाना तो सब ला हे एक दिन, कोनो अमर होके नइ आय हे, फेर असमय कोनो चंडाली करके अभिमन्यु असन घेर के, षडयंत्र करके मारथे तउन बने नोहय.
(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi News

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