छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: पंडवानी हा छत्तीसगढ़ के चिन्हारी बनगे हावय

पंडवानी ला यूट्यूब, फेसबुक, अउ आधुनिक साधन मा सँइत के अवइया पीढ़ी ला देखावत हे.  पंडवानी छत्तीसगढ़िया मनके गरब आय, मान अभिमान आवय.  

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  • Last Updated: September 18, 2020, 12:18 AM IST
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ज छत्तीसगढ़ मा लोकगायन मा पंडवानी के नाम हा सबले उपर लेहे जाथय.  पंडवानी हा छत्तीसगढ़ के चिन्हारी बनगे हावय. छत्तीसगढ़ के नान्हे बड़े गाँव शहर अउ देश के नान्हे बड़े शहर मा पंडवानी के देखइया सुनइया मनके कमती नइ हे. जब ले परदेसिया मन एला देखे सुने हे तब ले परदेश (बिदेश) मा घलाव पंडवानी के देखइया सुनइया अबड़ तदात मा मिल जाथय.

पंडवानी हा पांडव मन  के कथा आवय.  महाभारत के कथा हा श्रीकृष्ण अउ पांडव मन ले जुड़े हे. इही पाँच भाई पांडव, द्रौपती, कुंती, दुर्योधन, धृतराष्ट्र, करण, बिदुर अउ जम्मो पात्र मन के सउंहत दरसन करवावत ये लोक गायन ला मंच मा उतारे जाथय. पंडवानी ला एकल नाट्य घलाव कहे जाथय.  एमा द्वापर जुग के महाभारत बेरा के गाँव ,शहर, नगर, पुर, महल , तीर ,धनुस, गदा, चक्र के बरनन करे जाथय.  पंडवानी मा एक कलाकार हा सबो पात्र के भूमिका देखाथय.  कभू अर्जुन बन जालय ता कभू भीम.  द्रौपती अउ कुंती घलाव उहीच हा बनथे.

पंडवानी हा कब ले गाय अउ सुने जावत हे एखर परमान तो जुन्ना इतिहासकार मन घलाव नइ बता सकय. फेर छत्तीसगढ़ के दू ठन आदिवासी जनजाति परधान अउ देवार मन से एखर तार जुड़े हावय. परधान गोंड़ आदिवासी के उपजाति आवय अउ देवार आदिवासी घुमंतु जाति आवय.  दूनों के पंडवानी गायन के तरीका घलाव मा अंतर हावय.  परधान जाति हा तम्बूरा (किंकनी) धर के अउ देवार जाति हा रूंझु बजावत पंडवानी गाथँय.



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जब मनरंजन के आधुनिक साधन नइ रहिस तब पंडवानी हा छत्तीसगढ़ मा गाँव के मनखे बर रतिहा के मनरंजन करय. गाँव मा पंडवानी के आयोजन गणेश पक्ष, नवरात्रि, दशहरा, गाँव मड़ई ,मेला ठउर मा रतिहा अउ धान के लुवाई मिंजाई के पाछू गाँव के उछाह परब मा होवय.  बड़हर मन अपन छट्ठी ,बिहाव बर घलाव अइसना कार्यक्रम रखय.

पाछू बखत गाँव मा पंडवानी हा 7 दिन, 9दिन, 11दिन अउ गाँव भर के राजी खुशी के दिन ले होवय.  पंडवानी मंडली ला ओखर प्रोत्साहन बर गाँव भर ले बरार करके ( चंदा) बिदाई करय.  गाँव मा जतका दिन रहय खाय पीये, सुते बाइठे के बेवस्था गाँव के एक समूह हा करय. आज नवा जमाना मा उखर बेवस्था अउ मेहनताना के सरुप बदले हावय.

पंडवानी ला मंच मा सुनाय के दू किसम के शैली छत्तीसगढ़ मा चलत हावय.  कापालिक शैली अउ वेदमती शैली.  कापालिक शैली के गवइया मन खड़े होके, नाच के, मटक के, गाके कथा सुनाथँय. कापालिक शैली पंडवानी गवाइया मा बड़का डॉ तीजन बाई के हवय. अइसने मीना साहू ,लक्ष्मी साहू  शांति बाई चेलक मन घलाव इही शैली मा कथा सुनाथँय.  वेदमती शैली मा बड़का नाम स्व झाड़ूराम देवांगन , पूनाराम निषाद, पंचूराम, रेवाराम, रितुवर्मा के हावय. ए शैली मा गवइया मन हनुमान असन वीरासन मा बइठ के कथा ला सुनाथय.

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पंडवानी हा एकल नाट्य हरय एखर सेती मंच मा कापालिक शैली मा एला एके झन तम्बूरा बजावत सुनाथँय.  मंच मा गवइया के संग देवइया रागी घलाव रहिथय. एला हुँकरवा घलाव कहे जाथय.  संगे संग हारमोनियम बजइया, तबलची, ढोलकहा, मंजीरहा , झुनकहा इन पाँच सात झन के परिवार रहिथे जैन ला पंडवानी मंडली कहे जाथय.  मंच मा पंडवानी गवाइया हा सबो रस मा अपन कथा ला सुनाथय. अर्जुन,भीम, दुर्योधन बर वीर रस, रौद्र रस, श्रीकृष्ण बर शांत रस, कुंतीबर करुण रस, धृतराष्ट्र बर वात्सल्य,  बृहन्नला बर श्रृंगार रस, घटोत्कच्छ बर वीभत्स रस अइसने सबो किसम के रस ला कथा मा सुनाते.

संगेसंग प्रसंग मा जोड़ के भजन घलाव सुनाथे. तीजन बाई हा अपन कथा ला "रामे रामे रामे रामे. . . . भैया, कहत शुरु करथँय.  ओखर एक ठन अउ भजन "तोर मुरली मा जादू लगे कन्हैया बंशी मा जादू लगे" सुनइया मन के हिरदे मा समा जथय. बीच बीच मा श्रीकृष्ण के जय बोलवाथँय.  आखिर मा सबो गवाइया मन "बोल बिंदाबन बिहारीलाल की जय" कहिके आखरी करथँय.

पंडवानी गवइया मा पुरुष मन के संगे संग नारी मन के संख्या घलाव छत्तीसगढ़ मा कमती नइ हे जुन्ना पीढ़ी ले सीख के नवा पीढ़ी के नेवरिया पंडवानी गवइया मन अपन कला ला इही मा देखावत हे.  नारी पंडवानी गवाइया मा तीजनबाई के पाछू मीना साहू, लक्ष्मी साहू, शांतिबाई चेलक, उषा बारले, रैमनबाई, रीतु वर्मा, कुमारी निषाद, चमेली निषाद, प्रतिमा बारले, इंदिरा जांगड़े, अमृता साहू, कुंती गंधर्व  जाना बाई, पूर्णिमा साहू, सोमेशास्त्री देवी अउ आज के नवा पीढ़ी जौन गाँव गाँव से निकलत हे उँखर आकब नइ करे जा सकय.

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आज ज्ञान विज्ञान के युग अउ इन्टरनेट के बखत मा मनरंजन के अबड़ अकन साधन आ गे हवय लइका मन पश्चिमी संस्कृति मा बूड़त हे फेर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया मन अपन पंडवानी ला यूट्यूब, फेसबुक, अउ आधुनिक साधन मा सँइत के अवइया पीढ़ी ला देखावत हे.  पंडवानी छत्तीसगढ़िया मनके गरब आय, मान अभिमान आवय.
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