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छत्तीसगढ़ी म पढव- महूं हा खातेंव पताल चटनी

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जइसे धान के कटोरा के नांव लेके देश भर ला कोन काहय पूरा संसार भर मं ओहर विख्यात हे तइसने पताल 'टमाटर' के पैदावार अतेक होथे ते ओला किसान सकेले बटोरे नइ सकय. जब अइसन हालत हो जथे तब ओकर बाजार मं दाम घला गिर जथे. जब पानी के मोल बिके ले धर लेथे तब खवइया मन घला इतराय ले धर लेथे.

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किसान हताश, उदास हो जथे अउ अपन ये फसल ला खेत मं सरे बर छोड़ देथे, गांव मं मुनादी करवा देथे जउन ला जरूरत हे तउन मन खेत ले टोर के लान सकत हो. उमिहा जथे गांव भर के मनखे खेत मं पाताल टोरे बर. फोकट मं मिलथे तब कोन नहीं जाही. मरत ले खाथे तहां ले संझा बिहनिया झलका बना के साग-पाला मं डार-डार के. फेर जउन मजा पाताल के चटनी मं हे, उहू हर सील के पीसे मं. तब खवइया मन के का कहना, चटखार-चटखार के अंगुरी ला चांट-चांट के खाथे. जउन मनखे ये पाताल के चटनी नइ खांय हें, तेकर तो करम छांडय़.

एकर ले तो जादा मजा चिरपोटी पाताल के चटनी खाय मं आथे. अहा… का कहना एकर सुवाद ला. जउन खाय हें तउने एकर सुवाद ल जानही, दूसर नइ जानय सकय. चिरपोटी पाताल के बात उठगे तब एक घौं के बात हे. हंसी-ठिठोली मं एक संगवारी बतावत रहिथे- भउजी तैं अतेक सुन्दर हस, करेला चानी कस दीखतस, गोल-गोल पाताल सही गाल हे, लचकदार कनिहा हे, रेंगथस तब अइसे लगथे जइसे हिरनी चलत हे, भइया तोर रूप के दीवाना हे. तब तोर छोटकी बहिनी कतेक सुंदर नइ होही. तब बताथे- भउजी कहिथे- टार रे चंदोर हो, कइसन-कइसन गोठियाथव. एकर ऊपर देवर भउजाई, ननद-भउजाई अउ समधी-सजन मं अइसन गीत बर-बिहाव के परब मं गाथे-नाचे के रिवाज हे.

बात पाताल (टमाटर) के चलत रिहिस, बड़े मंझोला किसम के जउन पाताल होथे. एकर मन के सुवाद ले बढ़के चिरपोटी (छोटे पाताल) के होथे, फेर गुन बड़ भारी होथे. बोटरी असन होते बने हाथ मं धराय घला नहीं. बिछलहीन समधीन कस होथे. अब छत्तीसगढ़ मं बम्फर पाताल के खेती होय ले धर ले हे. एसो तो छत्तीसगढ़ के पाताल पूरा देश मं बिके ले धरत रिहिसे बने कमाई करे हें किसान मन. पताल हा तो लाल-बाल कर देहे ओमन ला. दक्षिण कोती बारिश होइस हे ओती के फसल मटियामेट होगे. छत्तीसगढ़ के भाग जाग गे. बारिस एती वइसन नइ होइस जइसन दक्षिण के राज्य कोती होय रिहिस. किसान अब एतेी के सब्जी फसल, लेबर कमर कस ले हे.

कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय अउ सरकार घला हे किसान मन के समस्या ला हल करे खातिर नवा-नवा उदीम, वैज्ञानिक तौर-तरीका ला समझे खातिर गांव-गांव मं कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी अउ वैज्ञानिक मन ला भेजे के योजना बनाय हें. किसान मन घला अब पहिली जइसन नइहे. पढ़े-लिखे लइका मन के रुझान अब खेती कोती होवत हे. बड़े-बड़े इंजीनियर अउ अधिकारी मन घला सरकारी अउ निजी नौकरी छेाड़के खेती कोती लहूटत हे. सबले खुशी के बात हे छत्तीसगढ़ के मुखिया किसान के बेटा हे, खेती-किसानी के रकम (विविध, तौर-तरीका) ला भली-भांति जानत अउ समझत हे. एकर सेती कोने कांही दिक्कत नइ होवत हे. सबके तालमेल अउ सहयोग से खेती किसानी बने होय ले धर ले हे. बस समस्या एक ठन हे उपज ले बेचे खातिर बाजार के. बिचौलिया मन ला खतम करके अब सरकार सीधा फसल ला खरीदत हे. अब किसान सुख के सांस लेवत हें, मेंछा कोती हाथ थोकिन जाय ले धर ले हे.

एसो तो पाताल के किसान मन हाईब्रिड देसी पाताल ले हाईब्रिड खेती का लीन हे के ओकर भाग खुलगे, पौ-बारह होगे ओकर मन के. दुर्ग जिला के धमधा तहसील क्षेत्र के किसान मन पाताल के फसल ला लेके पूरा देश भर मं इतिहास रच दिन. अइसन फसल कभू नइ होय रिहिन हे. लगातार नुकसान झेलत आवत रिहिन हे. एसो अइसे पलटिस तकदीर हा के बरसों के घाटा ला एके घौं मं उतार दीश. छत्तीसगढ़ के दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा, कवर्धा, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर, रायगढ़ अउ जशपुर मं किसान पाताल के खेती लेथे. एक रिपोर्ट मं बताय गे हे कि व्यवसाय मं लगे व्यापारी अउ परिवहनकर्ता ठेकेदार जउन रोजाना क्षेत्र के किसान करा संतावन लाख रुपए के भुगतान करयं. छत्तीसगढ़ के पाताल एसो तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडि़सा, पश्चिम बंगाल अउ उत्तरप्रदेश कोती के जम्मो राज्य कोती जात रिहिसे. इही पाके अब धान के कटोरा धीर-ेधीरे पाताल के कटोरा ला भरे खातिर दांव लगा दे हे.

(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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