छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: मड़ई मा रहिचुली के मजा ले दुरिहात छत्तीसगढ़िया चेलिक

छत्ता के काड़ी के आखरी छोर मा बूँद के धार उतरथे ओइसने जगा मा लोहा के राड मा फँसा के हाथी, घोड़ा, कुर्सी असन ला बइठे बर लगाय जाथे.  

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 9:05 AM IST
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त्तीसगढ़ मा गाँव के मड़ई एक परब ले कमती नइ होवय. देवारी तिहार मनाय पाछू अपन अपन गाँव के स्थिति परिस्थिति ला देख के अउ देव धामी के असीस ले गाँव मा मड़ई के कार्यक्रम रखे जाथय जौन माँघ फागुन तक चलथे.  इही गाँव के मड़ई मा जौन नान्हे लइका, चेलिक, मोटियारी अउ सियान सबके पसंग के जिनिस रहिथे ओ हरय रहिचुली अउ चक्कर. रहिचुली ला ढेलवा घलाव कहे जाथय. ए हाथ मा चलाय वाला जिनिस आय. जेन मड़ई मा रहिचुली नइ रहय तब मड़ई जवइया मनके सबके सउँख अधूरा रहि जाथय.

रहिचुली हा दू खंभा जेखर बीच मा चार फिट के अंतर रहिथे एक पाटी मा जुड़े रहिथे दूनो खंभा मा बेरिंग लगे रहिथे. जेन घुमे मा संग देथय. दूनो खंभा मा ढ़ेरा खाप गणित के गुना चिन्हा सही दू -दू ठन पाटी अउ लगे रहिते जेमा चार ठन मचान ला फँसाय जाथे. एक मचान मा चार मनखे कुल चार मचान मा एक संग सोला मनखे बइठ सकथे. मचान हा हालत डोलत रहिथे. उपर जाथे तब अपने पन पाछू अउ खाल्हे उतरते तब अपने अपन आगू आ सकथे. चक्कर हा एक ठन खंभा मा बने रहिथे जइसे बरसात के छता बरोबर तनाय रहिथे.

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छत्ता के काड़ी के आखरी छोर मा बूँद के धार उतरथे ओइसने जगा मा लोहा के राड मा फँसा के हाथी, घोड़ा, कुर्सी असन ला बइठे बर लगाय जाथे. इही मा झुलइया मन बइठथे. रहिचुली वाला मन एक रहिचुली मा तीन चार झन रहिथे. दू झन झुलाइया एक झन उतरइया बइठइया अउ एक झन पइसा लेवइया. बड़का गाँव के मड़ई मा दू तीन ठन रहिचुली लगाय जाथे. रहिचुली वाला मन एकरे कमई ले अपन परिवार चलाथे. मड़ई मा अमरे के पहिली दुरिहा ले जौन आवाज सुनाथे ओमा मिठईवाला अउ रहिचुली के रहिथे.
छत्तीसगढ़ के गाँव के मड़ई मा कतको सँउखिया मन रहिचुलीच झूले बर जाथँय. उहाँ ओमन बाजी घलो लगाथँय.  भुँइया मा रुमाल, पइसा नइते बिस्कुट पाकिट रखे जाथय अउ जब चक्कर हा जोरदार घूमथे तब ओला जेन उठा लेथे उही जीत जाथे. छत्तीसगढ़ मा रहिचुली ला चेलिक मन के मया पिरीत के कहिनी ले घलाव जोड़ के देखे जाथय.  जब घर के सियान मनके डर मा छुपत छुपात मिलइया चेलिक मन मड़ई मा मिलथे अउ पान खाथे ओखर पाछू संग मा बइठ के रहिचुली झुले के मजा पाथे. एमा उँखर संगवारी मन संग देथय.

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नवा बिहाव होय जोड़ी मन घलाव सऊँख से रहिचुली झुलथे. नान्हे लइका मन चक्कर के मजा पाथे. बबा, ककादाई मन भुलवारे बर चक्कर मा बइठार देथे. फेर आज छत्तीसगढ़ के गाँव मा मड़ई मेला के सरुप बदल गे हावय. अब बड़का मेला मड़ई मा बिजली ले चलइया नाना रिकम के झूलना, हवाई झुला, नाव झूला, रेलगाड़ी, कार डाँस झूला, नान्हे लइका मन के अलग झूलना देखे बइठे बर मिलत हावय. इही मा सँउखिया मन बइठ के अपन सुसी बुता डारथे. पाछू छोटे रहिचुली मा बइठे के सँउख नइ करय.

जेखर ले रहिचुली मालिक ला आवक कम होथे अउ कभू कभू तो अपन जेब के पइसा करमचारी मन ला देय बर परथे. छत्तीसगढ़ के मा गाँव मड़ई मा रहिचुली आज भी देखे बइठे जाथे.
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