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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें - अमीर धरती के गरीब लोग - हीरा छत्तीसगढ़

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तीन आगर एक कोरी निबंध जेमा एक ठन जीवन परिचय हे, जागेश्वर प्रसाद हा निबंध संग्रह छपवाय हबय, नांव हे ओकर “हीरा छत्तीसगढ़”| ओकर नजर मं इहां हीरेच-हीरा दीखथे| चाहे ओहर मनखे होवय, चाहे हीरा, पन्ना, सोना, चांदी, लोहा, कोयला, मेगनीज होवय चाहे कोरेंडम अउ यूरेनियम, जल जमीन अउ पहाड़ तो अनगिनत हे|

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तीन आगर एक कोरी निबंध जेमा एक ठन जीवन परिचय हे, जागेश्वर प्रसाद हा निबंध संग्रह छपवाय हबय, नांव हे ओकर “हीरा छत्तीसगढ़”| ओकर नजर मं इहां हीरेच-हीरा दीखथे| चाहे ओहर मनखे होवय, चाहे हीरा, पन्ना, सोना, चांदी, लोहा, कोयला, मेगनीज होवय चाहे कोरेंडम अउ यूरेनियम, जल जमीन अउ पहाड़ तो अनगिनत हे| अतेक जिनिस के राहत ले छत्तीसगढ़िया जेमा किसान मजदूर आदिवासी अउ पिछड़ा वर्ग जम्मो झन गरीब हें| ओकर मन के रहन-सहन, खान-पान पहिनावा-ओढावा जस के तस हे जइसने पहिली रिहिस हे| लगथे लेखक उपर ए सब के परभाव परे हे| ओहर देख नइ सके हे छत्तीसगढ़िया मन के बदहाली ला अउ लिख परिस “हीरा छत्तीसगढ़”| “दू-आखर” मं अपन बात लिखत ओहर कहिथे-ओला ये निबंध लिखे के प्रेरना महाकवि रविन्द्रनाथ टैगोर ले मिलिस| टैगोर जी बंगाली समाज ला स्वाभिमानी बनाय खातिर नारा देइन “हामार सोनार बंगला”| भुइयां सोन ले भरे परे हे अउ बंगाली समाज सोन ले लदे हवय| ये नारा के जरिये बंगाली समाज ला संदेश अउ संस्कार देइन| अइसने कस हमार “हीरा छत्तीसगढ़” लिख के छत्तीसगढ़िया ला संदेश देके मन मं उदीम उठिस| सोचेंव, धान के भंडार के भरोसा मं जब बंगाल (सोन के बंगाल) हो सकत हे तब छत्तीसगढ़ तो सबो जिनिस मं लबालब हे, भरपूर हे| फेर कोन से अइसे कारन हे जेकर ले छत्तीसगढ़िया कंगला के कंगला हे| ये कारन ला लेखक हा भली-भांति जानत हे|

छत्तीसगढ़ राज बनिस तब पहिली मुख्यमंत्री अजित जोगी घला इही बात ला किहिस-“अमीर धरती के गरीब लोग”| ओ कोन गिद्ध, चील, कंउआ, कुकुर, सियार अउ बघुवा मन हे जउन छत्तीसगढ़िया मन के छाती मं बइठ के ओकर मन के लहू पियत हे, मांस ला नोच-नोच के खावत हे| जोगी जी ये बात ला जानत रिहिस हे फेर करे कुछु नइ सकिस अउ उल्टाके सोसक मन ला संग देके छत्तीसगढ़िया मन के लहू ला पिए धर लिस| लेखक ये सब बात ला जानत हे अउ एकर उपचार ला घला छत्तीसगढ़िया जानत हे के छत्तीसगढ़िया मन ला सोसक मन से कइसे उबारे जाय| ओ सोसक मन के संगठित गिरोह हे| ओमन इहां के नोहय, आन-आन कोती ले आय हें अउ इहें बसगे हें, जउन मन हीरा, पन्ना, सोना, चांदी, लोहा, कोयला, यूरेनियम मन ला कोड़-कोड़ के वारा नियारा करत हें, घर भरत हें, पूंजी बनावत हें| बड़े-बड़े कंपनी, कारखाना अउ हवेली अइसने सेती-मेति मं नइ बनगे हे? ओमन सब गुदा-गुदा खावत हें अउ फोकला (छिलका) ला छत्तीसगढ़िया मन ला टूहूं देखा-देखा के छोड़ देथे|

घर मं जब लइका होथे तब महतारी ओला अंगोछ-पोछ के, तेल चुपर के, काजल लगा के, बने सुघ्घर कपड़ा पहिना ओढ़ा के ओला दुलारत कहिथे-मोर राजा बेटा, मोर हीरा सही बेटा| अइसने कस छत्तीसगढ़ ,महतारी घला कहिथे, गोहराथे-फेर वो का जानय ओकर छाती मं लबालब भरे हीरा, सोना, यूरेनियम, काकर अंग लग जथे| कोन चोर डकैत अउ बइमान मन छत्तीसगढ़िया बेटा मन के हक़ ला मारत हें|

लेखक जागेश्वर प्रसाद के सबो निबंध मं छत्तीसगढ़िया मन के भाव-भूमि के झलक मिलथे| सोसन के संगे-संग ओहर सबो बिषय उपर अपन कलम रेंगाये ले नइ छोड़े हे| बड़े-बड़े हीरा सही बेटा गुरु घांसीदास, वीरनारायण सिंह, पंडित सुन्दरलाल शर्मा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, डॉक्टर खूबचंद बघेल, मिनीमाता, ठाकुर छेदीलाल बैरीस्टर सही मिलिस फेर सोसक मन के चकरी के आगू ओकर मन के कुछु नइ चलिस अउ छत्तीसगढ़ के आदिवासी किसान मजदूर गरीब के गरीब होते गिस|

छत्तीसगढ़िया कोन हे, राज-काज के भाषा छत्तीसगढ़ अस्मिता के सवाल, माटी के आस्था के, छत्तीसगढ़ अस्मिता समाज के पिछड़ेपन के कारन अउ उपाय, तीज-तिहार, घानी के बइला जइसन कई निबंध हे पढ़े के लइक हे| मोला तो भइ ओमन सबो नीक लगिस हे| आसा करत हौं छत्तीसगढ़िया मन के आंखी ला बग बग ले खोले मं ये निबंध संग्रह सफल होही|

दरअसल, छत्तीसगढ़ हीरा कोन जिनिस हे जेकर खातिर दुनिया भर के मनखे इहां झपाय परथें| हीरा सोना यूरेनियम अउ जतका खनिज जल जमीन पहाड़ संसाधन अउ मनखे मन हे एमन तो धुर्रा अउ कचरा के समान हे| असली हीरा तो इहां के शांति, सुख, सदभाव अउ परेम हे| ये अतेक बड़े पूंजी हे जउन छत्तीसगढ़ के छोड़े कोनो मुलुक मं नइ मिलय, बने टमड़ के खोज के देख लौ| शांति ले बड़ के कोनो धन सम्पदा नइ होवय| भगवा राम के महतारी कोन मुलुक मं जनम ले रिहिस हे, माता जानकी अपन बेटा लव-कुश ला कहां जनम दे रिहिस हे, महाकवि बालमिकी जउन रामायन लिख के अमर होगे ए विही धरती छत्तीसगढ़ हे| इहां शांति तो रहिबे करही अउ उही शांति हीरा हे हीरा| जेकर बर सब के नीयत गड़े हे अउ जइसे सीता ला हरे खातिर रावन उदीम रचिस वइसने परदेसिया मन इहां शांति ला हरे खातिर दांव-पेंच करत हें|

हीरा छत्तीसगढ़

तीन आगर एक कोरी निबंध जेमा एक ठन जीवन परिचय हे, जागेश्वर प्रसाद हा निबंध संग्रह छपवाय हबय, नांव हे ओकर “हीरा छत्तीसगढ़”| ओकर नजर मं इहां हीरेच-हीरा दीखथे| चाहे ओहर मनखे होवय, चाहे हीरा, पन्ना, सोना, चांदी, लोहा, कोयला, मेगनीज होवय चाहे कोरेंडम अउ यूरेनियम, जल जमीन अउ पहाड़ तो अनगिनत हे| अतेक जिनिस के राहत ले छत्तीसगढ़िया जेमा किसान मजदूर आदिवासी अउ पिछड़ा वर्ग जम्मो झन गरीब हें| ओकर मन के रहन-सहन, खान-पान पहिनावा-ओढावा जस के तस हे जइसने पहिली रिहिस हे| लगथे लेखक उपर ए सब के परभाव परे हे| ओहर देख नइ सके हे छत्तीसगढ़िया मन के बदहाली ला अउ लिख परिस “हीरा छत्तीसगढ़”| “दू-आखर” मं अपन बात लिखत ओहर कहिथे-ओला ये निबंध लिखे के प्रेरना महाकवि रविन्द्रनाथ टैगोर ले मिलिस| टैगोर जी बंगाली समाज ला स्वाभिमानी बनाय खातिर नारा देइन “हामार सोनार बंगला”| भुइयां सोन ले भरे परे हे अउ बंगाली समाज सोन ले लदे हवय| ये नारा के जरिये बंगाली समाज ला संदेश अउ संस्कार देइन| अइसने कस हमार “हीरा छत्तीसगढ़” लिख के छत्तीसगढ़िया ला संदेश देके मन मं उदीम उठिस| सोचेंव, धान के भंडार के भरोसा मं जब बंगाल (सोन के बंगाल) हो सकत हे तब छत्तीसगढ़ तो सबो जिनिस मं लबालब हे, भरपूर हे| फेर कोन से अइसे कारन हे जेकर ले छत्तीसगढ़िया कंगला के कंगला हे| ये कारन ला लेखक हा भली-भांति जानत हे|

छत्तीसगढ़ राज बनिस तब पहिली मुख्यमंत्री अजित जोगी घला इही बात ला किहिस-“अमीर धरती के गरीब लोग”| ओ कोन गिद्ध, चील, कंउआ, कुकुर, सियार अउ बघुवा मन हे जउन छत्तीसगढ़िया मन के छाती मं बइठ के ओकर मन के लहू पियत हे, मांस ला नोच-नोच के खावत हे| जोगी जी ये बात ला जानत रिहिस हे फेर करे कुछु नइ सकिस अउ उल्टाके सोसक मन ला संग देके छत्तीसगढ़िया मन के लहू ला पिए धर लिस| लेखक ये सब बात ला जानत हे अउ एकर उपचार ला घला छत्तीसगढ़िया जानत हे के छत्तीसगढ़िया मन ला सोसक मन से कइसे उबारे जाय| ओ सोसक मन के संगठित गिरोह हे| ओमन इहां के नोहय, आन-आन कोती ले आय हें अउ इहें बसगे हें, जउन मन हीरा, पन्ना, सोना, चांदी, लोहा, कोयला, यूरेनियम मन ला कोड़-कोड़ के वारा नियारा करत हें, घर भरत हें, पूंजी बनावत हें| बड़े-बड़े कंपनी, कारखाना अउ हवेली अइसने सेती-मेति मं नइ बनगे हे? ओमन सब गुदा-गुदा खावत हें अउ फोकला (छिलका) ला छत्तीसगढ़िया मन ला टूहूं देखा-देखा के छोड़ देथे|

घर मं जब लइका होथे तब महतारी ओला अंगोछ-पोछ के, तेल चुपर के, काजल लगा के, बने सुघ्घर कपड़ा पहिना ओढ़ा के ओला दुलारत कहिथे-मोर राजा बेटा, मोर हीरा सही बेटा| अइसने कस छत्तीसगढ़ ,महतारी घला कहिथे, गोहराथे-फेर वो का जानय ओकर छाती मं लबालब भरे हीरा, सोना, यूरेनियम, काकर अंग लग जथे| कोन चोर डकैत अउ बइमान मन छत्तीसगढ़िया बेटा मन के हक़ ला मारत हें|

लेखक जागेश्वर प्रसाद के सबो निबंध मं छत्तीसगढ़िया मन के भाव-भूमि के झलक मिलथे| सोसन के संगे-संग ओहर सबो बिषय उपर अपन कलम रेंगाये ले नइ छोड़े हे| बड़े-बड़े हीरा सही बेटा गुरु घांसीदास, वीरनारायण सिंह, पंडित सुन्दरलाल शर्मा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, डॉक्टर खूबचंद बघेल, मिनीमाता, ठाकुर छेदीलाल बैरीस्टर सही मिलिस फेर सोसक मन के चकरी के आगू ओकर मन के कुछु नइ चलिस अउ छत्तीसगढ़ के आदिवासी किसान मजदूर गरीब के गरीब होते गिस|

छत्तीसगढ़िया कोन हे, राज-काज के भाषा छत्तीसगढ़ अस्मिता के सवाल, माटी के आस्था के, छत्तीसगढ़ अस्मिता समाज के पिछड़ेपन के कारन अउ उपाय, तीज-तिहार, घानी के बइला जइसन कई निबंध हे पढ़े के लइक हे| मोला तो भइ ओमन सबो नीक लगिस हे| आसा करत हौं छत्तीसगढ़िया मन के आंखी ला बग बग ले खोले मं ये निबंध संग्रह सफल होही|

दरअसल, छत्तीसगढ़ हीरा कोन जिनिस हे जेकर खातिर दुनिया भर के मनखे इहां झपाय परथें| हीरा सोना यूरेनियम अउ जतका खनिज जल जमीन पहाड़ संसाधन अउ मनखे मन हे एमन तो धुर्रा अउ कचरा के समान हे| असली हीरा तो इहां के शांति, सुख, सदभाव अउ परेम हे| ये अतेक बड़े पूंजी हे जउन छत्तीसगढ़ के छोड़े कोनो मुलुक मं नइ मिलय, बने टमड़ के खोज के देख लौ| शांति ले बड़ के कोनो धन सम्पदा नइ होवय| भगवा राम के महतारी कोन मुलुक मं जनम ले रिहिस हे, माता जानकी अपन बेटा लव-कुश ला कहां जनम दे रिहिस हे, महाकवि बालमिकी जउन रामायन लिख के अमर होगे ए विही धरती छत्तीसगढ़ हे| इहां शांति तो रहिबे करही अउ उही शांति हीरा हे हीरा| जेकर बर सब के नीयत गड़े हे अउ जइसे सीता ला हरे खातिर रावन उदीम रचिस वइसने परदेसिया मन इहां शांति ला हरे खातिर दांव-पेंच करत हें|

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