छत्तीसगढ़ी व्यंग्य.. सलाह हाज़िर हे...!!

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सरकारी सलाहकार मन सरकार के गाइड लाइन तियार करथें. लेड़गा नेता मन झपा जथें. चतुरा अउ चालबाज मन सुन-गुन के रेंगथें. बने सलाह सरकार ल उबार देथें. अउ योग्य सलाहकार मन उल्टा-सीधा योजना लागू करवा के रेंगत सरकार ल डुबो के सांस लेथें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 10:25 PM IST
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लाह देना सब ले सरल बुता होथे. कुछ कर न सकव त सलाह देव. जेला सलाह के जरूरत नइ हे ठू ल बरपेली सलाह देव. हर्रा लगे न फिटकरी रंग चोखा होय, चाहे धोखा होय. सलाह पेले म का जाथे. सलाह देवइया हर टेम अपन विचार थोपे म पाछू नइ राहय. टेम देखना हे न कुटेम झट सलाह हाजिर होथे. सलाह देवइया मन सरकारी अउ गैर-सरकारी सबो जगा पाय जथे सरकारी सलाहकार मन सरकार के मुखिया मन ल सलाह देवत रहिथें. जतके बड़े ओहदा ओतके बड़े सलाहकार होथें. सरकारी सलाहकार मन सरकार के गाइड लाइन तियार करथें. लेड़गा नेता मन झपा जथें. चतुरा अउ चालबाज मन सुन-गुन के रेंगथें. बने सलाह सरकार ल उबार देथें. अउ अयोग्य सलाहकार मन उल्टा-सीधा योजना लागू करवा के रेंगत सरकार ल डुबो के सांस लेथें. कतको निजी सलाहकार मन चार अक्षर पढ़ के चौबीस अक्षर के छतरी तान देथें. उनकर गियान महान होथे जोन ह मुड़ चढ़ के बोलथे. सलाह हर मुद्दा म रेडीमेड अउ हाजिर होथे. सलाह टैक्स फ्री हे. हमर वजीरे खजाना ल फ्री सलाहकार मन के खबर लेना चाही.

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नवा घर अउ सलाहकार
जब आप नवा मकान बनावत हव त फ्री सलाह सुने के अच्छा अभ्यास हो जथे. मकान के नेव ले लेके छत तक के सलाह अपने आप मिलत रहिथे. एखर बर न गाँव लगे न सहर. सलाहकार तत्व हर जगा मौजूद होथें. फोकटचंद मन सलाह देथें नेव कतेक गहीर होना चाही. पथरा के नेव बने रहि के ईंटा के? ईंटा, पथरा, सीमेंट, छड़ आदि समस्त सामग्री कहाँ ले लेना बने रहि. कोन ठेकादार मकान बने बनाथे? काखर घर ओदरगे रिहिस. पक्का मकान के देवाल नौ इंची बने रही, के ओखर ले जादा होना जरूरी हे.

ईंटा फलां भट्टी के बने रहिथे. अब ओ कहना चाहथे के हडप्पा अउ मोहन जोदड़ो म फलां ईंटा भट्ठा के ईंटा लगे हे. यानि तोर घर घलो भविष्य म स्मारक बन सकत हे. अब मकान खड़े होगे त ओखर रंग –रोगन के चिता घलो मिस्टर सलाहकार ल होथे. कोन कोन रंग ले पोताई वास्तु शास्त्र के अनुसार बने होथे. घर म लछमी दाई कोन रंग ल पसंद करथे ये सब फ्री सलाह सलाकार महाशय से बरपेली मिलथे. एक नहिं अनेक झन ल झेले बर परथे. पूजा-पाठ बर घलो सलाह हाजिर होथे के फलां पंडितजी बहुत अच्छा हे. गृह-प्रवेश त ओखरे पूजा-पाठ से होना चाही. जाहिर हे के ओखर हर सलाह नेक होथे.

आल राउंडर सलाहकार



खेती –किसानी के दिन म नांगर या ट्रेक्टर चलवाय के मुहूर्त के ज्ञाता फ्री म उपलब्ध होथें. उनकर तर्क के आघू चुप रहे म ही भला होथे. बस हुँकारू भरते जाव. फलां धान फलां खेत म बोना रहिस. फेर दुसर धान बो लेव . ओन्हारी होय चाहे सियारी का बोना चाही का नहीं उनकर सलाह हाजिर रहिथे. फसल बोवई से मिंजाई तक सलाह के बरसात होथे. कतको झन जलकुकड़ा मन गलत सलाह देके डबरा म बोर घलो देथें. अउ पीठ–पाछू उनकर मजाक उड़ाय म कोनो कमी नई करें. उनकर दिन बादर अइसने म बित जथे. पढ़इय्या लइका मन के दाई-ददा मन ल उन सलाह देतें के अपन टूरा-टूरी मन ल कते स्कूल म पढाना हे, कते म नहिं. आजकल सरकारी स्कूल ल गारी देना अउ निजी स्कूल के तारीफ़ के पूल बाँधना उनकर बुता हे. दूसर के बुद्धि ले सोचइया मन के का कमी हे. पर के सलाह ले अपन घर चलाय ले घर म भूचाल बरोबर हालत बन जथे. फेर सब चलथे. फोकट वाले ये युग म मनखे बड़ सस्ता हे. एकक वोट बर नेता मन फ्री म का का नइ देंय. गरीबी के नाव लेके टैक्स देवइया जनता के पइसा बिना मोह –माया के ‘सुविधा लेव कुरसी देव’ प्इसा के संतुष्टिकरन नीत कोनो न कोनो आला दर्जा के सरकारी सलाहकार मन के सलाह ले के फूंके म सुख पाथें.

मुआयना

जब कोनो दु-चक्का या चार चक्का ले के घर पहुंचथे तो झट सलाहकारजी के नजर ओखर उपर परथे. ओ घर पहुँचथे. वाहन के पूरा मुआयना करके झट अपन सलाह देथे. अरे! फलांना तोला ये कंपनी के नहीं वो कंपनी के दु-चक्का या चार चक्का लेना रिहिस. मोला कहिते मैं ह तोला सस्ता म देवा देतेंव. खरीदइया ऍन मौक़ा म ओला बलातिस त कतिस मेंहा फलां जगा जावत हंव तोर संग नइ जा पाहून आदि पच्चीसों बहाना होतीस. इहाँ कोनो गोबर बेच के त कोनो मंडी म धान बेच के मोटर सायकल म उड़त हे. बंफर धान खरीदी होय हे.

साहेबजी अय सलाहकार

हर आफिस म साहेबजी मन ल सलाह देवइया होथें. बड़े बाबू त हर आफिस के अनिवार्य शर्त होथें. साहेब जी मन बड़े बाबू के खोपड़ी ले जादा सोचथें. बड़े बाबू के सलाह साहेबजी मन बर पथरा के लकीर कस होथे. ओ जानथे के ये बड़े बाबू पथरा ल पानी म तउरा सकत हे अउ फोही कस बात म साहेब ल डुबो घलो सकत हे. नेक सलाहकार मिलना बड़े भाग के बात होथे. चापलूस मन के बेइमानी के दुकान अलग चलथे. मीठ-बोलवा मन जी हूजूरी करके अधिकारी मन ल चढ़ा देथें .उतारत-उतारत डूबोय के पुन्न घलो कमा लेथें. गियानिक जानकार मन कहिथें के आजकल अधिकारी मन के कुरसी के गुप्त बोली लगथे. उंच बोली वाले मलई के जगा पाथें. बड़े सलाहकार अपन जुगत भिड़ा के हिरन, बघवा कस मनखे मन ल घलो अपन मुठा म बांधे बर सीखो देथें.  बिना डिग्री सलाहकार मन अपन-आप ल गोबरदास कम समझथें. उनकर मन म चतुरा होय के कतको गुन गुण-गुनगुनावत रहिथे .गाँव अउ सहर म कतको झन बस इही बुता म अपन रोजी-रोटी के तलाश कर लेथें. अउ कतको झन फ्री जनसेवा ल परमधर्म मन के अपन सलाह जारी रखे हें. ( डिसक्लेमर - लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं.)
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