छत्तीसगढ़ी-व्यंग्य कोरोना संक्रमन के आंधी म मनचलहा मन के दांत निपोरी

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खबर सनसनावत हे, मनखे अकबकावत हें. कोरोना सुपर रफ्तार म हे. अकाल-काल बन के फेर मनखे मन ल लिलत हे. छत्तीसगढ़ समेत देश के पांच राज्य अउ देश-दुनिया म कोरोना तांडव करत हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 2:15 PM IST
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बरीलाल ये खबर सुन के दुखी हे के कोरोना(कोविड-19), एक साल बाद फेर विकराल रूप धरत हे. लालबुझक्कड़ किहिस-भाई खबरी, कोरोना के संक्रमन अतेक तेज होगे हे, के सुबह-सुबह देश जानना चाहथे, के कल के संक्रमन अउ मरे के आंकड़ा का हे? खबर सनसनावत हे, मनखे अकबकावत हें. कोरोना सुपर रफ्तार म हे. अकाल-काल बन के फेर मनखे मन ल लिलत हे. छत्तीसगढ़ समेत देश के पांच राज्य अउ देश-दुनिया म कोरोना तांडव करत हे. ये बीच पांच राज्य म विधान सभा चुनाव के घमासान होवत हे. पाछू साल के दुःख ले मनखे उबरJ नइ पांय हे, अब अउ कोरोना लिलों-लिलों करत हे. देशी वेक्सीन के वेक्सीनेशन जारी हे.

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जुड़ाय-जुड़ाय नंगाड़ा

खबरीलाल किहिस- होली ह दू कदम दूरिहा हे. अब का रंग अउ का साज. नंगाड़ा अपने अपन जुड़ाय- जुड़ाय लगत हे. मौज-मस्ती अउ आनंद के तिहार ल कोरोना के गरहन धर लिस. होली कोरोना ल अपन रंग म बूडोही के कोरोना ह होली ल कोरोनामय करही? कतको झन के परान अउ रोजी-रोटी उपर संकट दिखत हे. अब बर-बिहाव, मरनी-हरनी, दशगात्र बर संख्या सीमा बंधागे हे. हर ढंग के भीड़-भाड़ ल घटाय बर सरकारी डांड़ खिंचागे हे. लापरवाही के सेती फेर कोरोना जुद्ध शुरू होगे हे. खुद बचो, परिवार ल बचाव, देश हित म इही हे. कोरोना हर कम संसाधन म जिए अउ खुश रेहे के सीख देवत हे.
पाजेटिव –निगेटिव के घनघनाना

गरीबदास किहिस-देश के कई राज्य म कोरोना के सेती रात के कर्फ्यू हे. पाजेटिव-निगेटिव फेर कान

म घनघनावत हे. वेक्सीन, मास्क, सेनेटाइजर, सेम्पल, संक्रमन, टेस्टिंग, आंक्सीटेस्ट जइसे शब्द फेर घेरी-बेरी सुने बर मिलत हे. ये डाहर देशी वेक्सीन से देश म वैक्सीनेशन जारी हे. वुहें मनचलहा मन अभू घलो नई चेते हें. आइसोलेशन (एकांतवास) के सुख-दुःख आधा भूलाय कस होगे रिहिस. फेर आइसोलेशन शब्द मार्च-पास्ट करत हे.



कोरोना अउ राज-धरम

लालबुझक्कड़ किहिस-जब नागरिक धरम निभाय के पारी आथे त कतको झन मन कलेचुप हो जथें. कतको झन अपन सुवारथ के आधा बेलाय अउ आधा कच्चा रोटी ल कोरोना के हवा म सेंक लेना चाहथें. उनकर बर इही राजधरम होगे हे. राजनीति मउका के खेल आय. ओमा अपन सुवारथ सब ले बढ़के होथे. सुवारथ सिद्ध होइस तहाँ ले गदहाजी घलो शेर हो जथे. समय उलटा हे त शेर गदहा जी के अपन रूप म आ के ठेलहा इती-उती टांग मारत रहिथें. गरीबदास किहिस-एक साल के कोरोना-काल म छटपटावत मनखे मन ह कोरोना के आँकड़ा गिरते साठ खटाखट बहुत अकन किसम-किसम के कार्यक्रम म अपन सुवागत-सत्कार करवा डरिन. अब कोरोना नदिया के बाढ़ कस सनसनावत हे. नागिन कस फुसनावत हे. मनचलहा मन दांत निपोरत हें.

कोरोना-मिलन

खबरीलाल किहिस-मास्क नइ लगाना हे. सोशल डिस्टेंसिंग से दूरी बढ़ाके रखना हे. सेनेटाइजर के उपयोग नई करना हे. घेरी-बेरी साबुन से हाथ धोना झंझट हे, तब सरकार का करे? चेताय उपर ले चेतावत हे, तभो ले चेत नइ चढ़े. खुद ल कोरोना-मिलन बर तियार करना हे. डांड(फाईन) भले दे देना फेर मास्क नइ लगाना. इही ह देश धरम होगे हे. भीड़ म पेलत-ढकेलत चलना. जब चाहो तब कोनो जगा छींकना खांसना जरूरी हे. सबे जगा एक समान हे. बिना मास्क लगाय शूरबीर कस दिखना. अइसना शेखी ले कोरोना परान लेवत हे.

गरीबदास किहिस- अउ कतको झन अतेक सुंदर मास्क लगाथें के मुहूँ तोपाय रहिथे अउ नाक खुल्ला. खुल्ला नाक ले आंक्सीजन के जगा म कोरोना मजा लेवत घुसथे. गला म फूल माला अउ आगू म माइक हो त नेता के अलावा अलवा-जलवा मनखे घलो पावर म दिखथें. जुन्ना मास्क ल जहाँ-तहाँ फेंका फांकी करे जथे. कतको दुकानदार ल कोरोना खेलावत रहिथे. दुकानदार महाशय कोरोना पीड़ित हो के अपन गिराहिक मन ल जाने-अनजाने म कोरोना बाँट देथे. अइसे असंख्य उदाहरण हे.

नवा गुरूजी का करें ?

खबरीलाल किहिस-पढइया मन के बड़ करलई हे, उनकर जी धुक धुकावत हे. छोटे लइका होय चाहे बड़े लइका आन-लाइन/आफ-लाइन के किस्सा-कहिनी के बीच उन परिवार सहित दुखी हें. शिक्षा आधा-अधूरा होवत हे. सही हे के जान हे त जहान हे. स्कूल, कालेज, आंगनबाड़ी सब बंद हे. पूरा स्कूली स्टाफ रिजल्ट कइसे देना हे, इही म खोपड़ी घिसत हें. कोरोना काल म अत्यंत कठिन आर्थिक स्थिति म छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल ह गुरूजी मन के भरती करिस. स्कूल म लइका नइ हें त नवा गुरूजी का करें? नान-नान लइका मन घरखुसरा होगे हें .बात-बात म रोना चिड़चिड़ाना आम बात होगे हे. उकर समस्या मनोविज्ञान के लइक होगे हे.

रूपिया के बेज्जती

संकट बड़े हे, बचत छोटे! जरूरी चीज त जरूरी हे न? फेर आमदनी अठन्नी खरचा रुपय्या हे. ये डाहर रूपिया गिरत-हपटत, खड़े होवत, रोवत-रूवावत हे. हर जीनिस के दाम बाढ़गे हे. एक गुना, दु-गुना, तीन गुना. महंगाई के दानवी रूप के आगू म रूपिया के खूब बेज्जती होवत हे. रूपिया खुद डोलत हे. अपन आप ल तोलत हे. साग भाजी बीस-पच्चीस रूपिया पाँव ले खाल्हे उतरबे नइ करे. आलू-पियाज के अपन रूआब हे ओखर कारण कोरोना ल बताय जथे.

कामचोर मन बर कोरोना वरदान बनगे हे. सरकारी कार्यालय कोरोना-पाहड़ा पढ्त एक साल ले पूरा बइठगे हें. नेता मन के सेवा के अलावा उनकर करा जनता के काम करे बर पचासों बाहना हे. अउ कोरोना-काल के अपन सब ले बड़े हे. फ़ाईल उपर फ़ाइल बढ़े-चढ़े हे. अउ गंजावत जात हे. अति महत्वपूर्ण सिर्फ नेता मन के काम हे शेष ल विशेष होय बर लगही तब ओखर महत्व हे. गंभीर से गंभीर समस्या वाले फ़ाईल सालों से अचेत परे हे. नियाव के दम फूलत हे, अनियाव हाँसत हे.

आयुष्मान कारड

कोरोना संक्रमन के चलते चलत आयुष्मान कारड बनाय जात हे. हर सेंटर म बिना मास्क के जनता-जनार्दन के भारी भीड़ हवे. लाईन से हर सेंटर ल परहेज करथे. आयुष्मान कारड बनवाय बर जनता के भीड़ रोजे कोरोना ल डराथे. सरकारी फरमान के पालन होवत हे, के नहीं, कोनो चेत करइया हे. सुक्खा फ़ाइल करेला कस करू लगथे. जब कोरोना के परकोप कम रहिस तब सरकार के नींद परगे. चैन के साँस लिस. थके-माँदे सरकार के स्वास्थ्य विभाग खर्राटे भरिस. आयुष्मान कारड बनाय के चेत बाद म अब अइस? ( डिसक्लेमर- लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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