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छ्त्त्तीसगढ़ी व्यंग्य - खेल-खेल म कुरसी के खेल

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... अभी राजनीति के किरकेट म फास्ट-बालिंग, अउ गुगली बाल के झटका-पटका दिखत हे. कैच आउट के चांस टले हे, फेर खतरा भारी हे. ...अधिक पढ़ें

हर स्कूल म पहिली कुरसी-दउड़ होय .लइका-सियान सब ल खूब मजा आय. हर टूर्नामेंट म कुरसी दउड़ (रेस) के विशेष आकर्षण (खिंचाव) राहय. स्कूल लगे साढ़े दस बजे ले साढ़े चार बजे तक. दिन भर खूब पढ़ई अउ दुसर जुवार खूब खेलई. लइका मन के शारीरिक अउ मानसिक विकास होय. हर शनिचर के पी.टी. अनिवार्य राहय. विविध कार्यक्रम आनन्दित करे. सांस्कृतिक विकास होय. स्वस्थ प्रतियोगी भावना के विकास सहज होय. अब वो सब बीते दिन के बात होगे. टाईम टेबल घलो राजधानी ले आय लगिस. जेमा खेल गोल, पढ़ई के झोल हे. मुखिया हाईकमान से बंधाय छंदाय हे. थोर-बहुत कुछु होवत रिहिस उहूँ ल कोरोना मटियामेट कर दिस. दूर्नामेंट सब स्तर म होय वहु नंदागे. सालों-साल बितिस खेलकूद कागजे म निपटा देथें. आँफिस के खेल, देखो विकास-कागजी हो जथे. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक किरकेट म फास्ट-बालिंग, अउ गुगली बाल के झटका-पटका दिखत हे. कैच आउट के चांस टले हे, फेर खतरा भारी हे. अढ़ई ओवर के खेल म कैच आउट के चांस बने हे. बेट्स-मेंन गेड़ी म नहिं बल्कि ठोस पिच म खड़े हे. सधे चौका-छक्का के बौछार करत हे.

कुरसी दउड़ के रोमांच

कुरसी दउड़ के रोमांच ल वुही बने जान सकत हे जेन. कुरसी बर बचपन से बने दउड़े-भागे हे. कुरसी-दउड़ लडका-लड़की/ गुरूजी-बहिनजी/प्रतिष्ठित नागरिक मन के बीच/अतिथि मन के बीच देखे बर मिले. कुरसी के संख्या शुरू म आठ-दस राहय. संख्या दस रहे त खिलाड़ी ग्यारह. धीरे-धीरे खिलाड़ी अउ कुरसी के संख्या घटत जथे. एक-दु कुरसी के संख्या के राहत ले खेल रोमांचक हो जथे. मजा तो तब आथे जब एक कुरसी दु खिलाड़ी रही जथें. फेर घंटा बाजथे एक कुरसी म एके बइठ सकथे. दूसर कहूं बइठे बर धरिस त रेफरी ओला तुरत फाउल कर देथे. दूसर खेलाड़ी मन सेकंड आना पसंदनइ करें. बिचारा चुचुवा जथे. कई बखत घंटा बजइया घलो दुआ-भेद कर देथे. फेर जेन ल कुरसी मिलिस तिही पहला आ जथे. राजनीति म अइसना कुरसी रेस आए दिन देखे बर मिलत हे. रस्सा-खींच के अपन आकर्षण होथे. एक लंबा रस्सी (रस्सी या रस्सा)निश्चित संख्या म एक दुसर के उलटा (विपरीत) या कहें पक्ष-विपक्ष रस्सा खिंचथें. जे डाहर ताकत जादा होथे ओ डाहर रस्सा सरसर ले खींचा जथे. भरभर ले कमजोर परइया मन गिर जथें. स्कूल म रस्सा खींच के खेल लइका मन ल बने लगथे. जेंन स्कूली जीवन म रस्सा-खींचे हैं, हारे, जीते हें, ओखर मजा ल जानथें. राजनीति म रस्सा-खींच ल शक्ति-परीक्षण कहिथें. आलू दउड़ वाले कुरसी रेस के भेद ल का जाने! कबड्डी ह त उठा-पटक गेम आय. इहु म ताकत जरूरी होथे. सब ल आउट करके अपन दल म पहुंचगे त वाह-वाह होथे. फसड़गे तहाँ ले आउट. आउट होवइया के संगवारी कमती होथें. पावर म आय ले दल-के दल पावर डाहर आ जथें.

बंफर बहुमत अउ रस्सा-खींच

विधानसभा म बंफर बहुमत हे तभो ले कुरसी रेस होवत हे. रस्सा-खींच जारी हे. एखर ले निरस राजनीति म रस-चुचुवावत हे. बहुत दिन बाद जनता के राजनीतिक मनोरंजनहोवत हे. पन्द्रह साल ले जेन भुखाय जनता-सेवक एक सौ छप्पन भोग के पान करके नइअघाव्त हे. रस्सा-खींच, कुरसी-रेस, कबड्डी,खो-खो चलते रहना चाही..जादा बहुमत मिले ले राजनीति ल घलो अकबकासी लागथे. हर बड़े नेता के जवनी आँखी मुख्यमंत्री पद बर खूब फरकत हे.फेर मैदान म जेंन हें उही मन दिखत हें. एक अनार(दरमी) चार बीमार, सब तियार.

मनमोहिनी- कुरसी सुन्दरी

कुरसी सुन्दरी मनमोहिनी हे. ओखर परेम-पाश से मुक्त हो पाना मुस्कुल होथे. जोंन एक बखत एखर मजा ल लिस त ओहा कुरसी रानी के दीवाना हो जथे. सूतत-जागत, रोवत-हाँसत, खेलत-खावत, नाचत-गावत हर हाल म हाय कुरसी ..हाय कुरसी करत रहिथे. कुरसी रानी के मोह-जाल से छुट पाना राजनेता मन बर असंभव होथे. राजगद्दी बड़े भाग ले मिलथे. ‘परान जाई फेर कुरसी न जाई’ उनकर इही मन्त्र हे. दिल्ली छ.ग. के विधायक मेला, विधायक मार्च-पास्ट देश देखिस. मिले कुरसी के तियाग करना कोनो सरल बात आय का? इही कुरसी बर त शतरंज के पूरा जाल बिछा के सब झन ल सत्ता के मजा ले बर हिस्सेदारी दे गे हे. सब के मुहूँ म मिठई हे. कोन करही विरोध. अब पूरा जादू हाईकमान के हाथ म हे. राजनीति म चमत्कार होना अलवा-जलवा बात आय.ये राजनीति चमकत अउ मद्धिम होवत चेहरा के रहस्य ल गढ़थे. जनौला बना देथे.

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