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छत्तीसगढ़ी म पढ़व-कहां हैं भगवान, अदालत मं हाजिर हों...!

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कामचोर गदहा के सपेड़ा मं खोजत-खोजत शेर सपड़ मं आगे. धोबी के गारी गुफ्तार ल सुनके ओहर अकबकागे. सोचथे, मोरो ले बड़े गदहा होवत होही? डर्राके सपटगे एक तीर मं, फेर धोबी के नजर ओकर ऊपर परगे. दू-तीन सटका लगाइस अउ गेरवा मं बांध के कोठा मं ओइला दीस. गुस्सा के मारे ओला खाना-पीना घला नइ दीस.

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होत मुंधरहा फेर गारी देवत अउ सटका मारत ओकर पीठ मं कपड़ा के गट्ठर ला बांध के नदिया कोती लेगे. शेर सोचथे- ये धोबी अउ गदहा अतेक बड़े बलवान हे? मैं तो समझत रेहेंव मोर ले बलवान कोनो नइ होही, मोर सब घमंड आज चकनाचूर होगे.

वइसने कभू घमंड भगवान ला घला होगे रिहिसे. ओला अइसे गुमान होगे रहिसे के मैं ब्रम्हांड के मालिक हौं, परमात्मा अउ भगवान हौं. मोर बिगन ये दुनिया के पत्ता नइ हिल सकय. फेर जांजगीर के प्रशासन हा जब ले ओकर नाव मं नोटिस जारी करवाय हे, मुनादी करवाय हे तब ले उहू हर डर्रागे हे. केहे हे जिहां होहू भगवान अदालत मं हाजिर हो. भगवान सुकुरदुम होगे, करय का नइ करय, मुंह लुकाय-लुकाय फिरत हे. कहुं शेर कस, सटका प्रशासन मं बइठे कोनो अधिकारी ओकरो ऊपर झन बरसा दय. का भरोसा, मनखे मन के?

जउन बात ला बताय ले जाथौं तेला सुनके कोनो हांसिहौं झन, काबर के वइसने कस अजब-गजब बात हे? बस सिरिफ सुनिहौ, गुनिहौ अउ समझिहौ अतके अरजी हे सबले. अउ जउन नइ सुनिहौ, समझिहौ, गुनिहौ फोकट बरपेली हांसिहौ, मुसुकराहौ तउन ला काकर सकथौं? ककरो मन, बुद्धि अउ दिल ऊपर तो राज नइ कर सकत हौं?.

हां त बात अइसन हे, जांजगीर जिला (छत्तीसगढ़) के प्रशासन हा भगवान ला खोजत हे. काबर खोजत हे तेनो ला सुनिके हांसिहौ, भगवान ला ओकर जमीन मुआवजा के करोड़ो रुपया ओला देना चाहत हे. आज के कलजुगी मनखे अउ नकली भगवान होतिन तब ओमन प्रशासन के दुआरी मं लम्बा लाइन लगा के खड़ा हो जातिन के हमी असली भगवान हन, मुआवजा के हकदार हमी हन, ओ रकम हमला दे जाय.

ये नकली भगवान मन ला अक्कल घला नइ आवत हे का, आज दुनिया म असली-नकली के बाजार गरम हे. असली हा जेल मं धंधा जथे अउ नकली मन मजा मारत देश-विदेश मं गुलछर्रा उड़ावत हे. सरकार, पुलिस अउ अदालत, एमन ला खोजते रहि जथे. फेर वाह रे भगवान, तहूं बड़ा नम्बरी हस तइसे लागथे. अरे करोड़ों रुपया के मुआवजा मिलत हे तेला लेबर काबर नइ आवत हस, कहां हस रे भाई, अरे तोला जरूरत नइहे पइसा-कउड़ी के ते इहां करोड़ों भिखारी परे हे, हाथ लमाये खड़े हें. तैं दाता हस, तोर घर मां का के कमी, उदलिहा बरोबर सब ला बांटत फिरत रहिथस. दे दे कोनो, ओ भिखारी मन के जीवन संवर जाही. फेर नहीं तहूं देथस उही ला, जउन करोड़ों, अरबो-खरबों के आसामी हे.

सब कहिथें तैं गरीब-नवाज हस, दीन-हीन के रखवाला हस, फेर जइसन हालात बताथे तइसन तैं नइ हस. जेकर कोठी, तिजौरो भरे रहिथे विकरे भोभस मं ले जाके अउ भर देथस. अइसन नइ होतिस तब मंदिर-मसजिद अउ गिरिजाघर मं हाथ लमाए खड़े रहिथे त ओकर ले जादा भिखारी तो करोड़ों, अरबों के आसामी मन दीखथे जेकर मन के हवस, ओमन कतको कमावत हे तब ले नइ भरत हे. अउ तैं वइसने भिखारी मन के जादा चेत करथस.

अब तैं कहूं मन ला बांट, ककरो ऊपर दया कर ये तो तोर अपन निजी मामला हे, एमा भला कइसे हस्तक्षेप कर सकत हन. फेर कुछु अनुचित असन लगथे तब मन गवाही नइ देवय. बोल अउ लिख परथन. ये गलती बर छमा करिहौ. लइका तुंहरे हन. कोनो कवि कहि दे हे- ”छमा बड़न को चाहिए, छोटन के उत्पात” तब ये लाइन सुरता आगे.

हां त बात अइसन हे भगवान, के प्रशासन के अक्कल ला तो देख, तोला खोजत-फिरत हे, मुआवजा दे बर एक नजर देखे बर सारी दुनिया खोजत-फिरत हे, जंगल, पहाड़, खोह मं लुका के तपस्या करत बइठे हे, बरसो बीतगे, तन-मन ला ओकर मन के दींयार चर डरे हे तेला दरशन नइ देवत हस, अइसन तो कंजूस तैं हस. “दरसन दे घनश्याम नाथ मोरी अंखियां पियासी रे…” के भजन गावत-फिरत हे फेर तैं अइसे निसमुड़ हस के थोरको कनमटक नइ देवस. अउ उल्टाके ओमन ला कहि देथस- “मुझको कहां ढूंढो बंदे मैं तो तेरे पास में” लजलजहूं कर देथस. अब तैं भगवान हस भई-तैं कुछू कहि- बोल ले, तोला सब फभ जही, समरथ को नहीं दोस गोसाई.

जांजगीर प्रशासन पशोपेश मं हे के ओहर काला भगवान मानय, अउ काला मुआवजा के करोड़ों के राशि चेक ला देवय. जिलाभर मं एक घौं तहसीलदार हा मुनादी करवाइस के जिहां कहूं भगवान दीखय या मिलय या फेर कोनो ओकर पता-ठिकाना बता दैं तब ओला सांगर-मोंगर हाजिर करे जाय, एक घौं तो भगवान के नांव मं नोटिस घला जारी करे गिस फेर कोनो मेर ओकर सोर नइ मिलिस. कोनो-कोनो प्रशासन ला सुझाव भेजवाइन के भगवान हा सरग मं रहिथे, तब कोनो-कोनो किहिन- मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारा अउ गिरिजाघर मं रहिथे. कोनो किहिन- जउन जमीन ला दान करे हें ओर मंदिर के नाव मं हे तब ओकर मंदिरे मं मिल सकत हे. मंदिरों मन मं हरकारा भेज के पता लगवाइस परशासन हा, फेर उहों कोनो कोलिहा(सियार) अउ कुकुर के छोड़े कोनो नइ मिलिस. सिर पिट के बइठगे हे प्रशासन हा के आखिर ये भगवान के का करे जाय?.

सोचथौं, जइसन के आज अदालत मं कानून अउ नियम हे, ओकर मुताबिक भगवान के नांव गिरफ्तारी वारंट जारी कर देना चाही. अब्बड़ अप्पत हे, कानून-व्यवस्था के बहुत मजाक उड़ावत हे. कोनो मनखे होतिस त अब तक अइसन अप्पत मनखे मन ला गिरफ्तार करके जेल भेजवा देतिन, फेर मसला भगवान के हे, तब प्रशासन ला सोच समझ के काम करे ले परथे, फूंक-फूंक के कदम रखे ले परथे. काबर के सरकार हा अइसन कोनो धर्म विरोधी काम ला बर्दाश्त नइ करही. थोरको कहूं अइसन कदम उठावत हे तब धर्म प्रेमी जनता मन प्रशासन के बारह बजा दिही.

फेर सोचथौं, भगवान के तो इहां कोनो कमी नइहें. इहां गली-गली मं भगवान फिरथे. कोनो कहिथे-शिवोह्म्, कोनो कहिथे- श्री श्री 1008 शंकराचार्य, महामंडलेश्वर सब भगवान के उपाधि धरे त्रिपुंड लगाय तिरशूल धारी अपन शिष्य मंडली संग अपन-अपन आश्रम मन मं बिराजे हें. एमन कोनो भगवान ले तो कम नोहय. कहूं भगावन के परीक्षण करवाना हे तब प्रशासन ला कोनो जांच कमेटी बना देना चाही. इही मन कोनो भगवान के भेष मं होही. अउ ओला दे दौ मुआवजा के चेक राशि.

(परमानंद वर्मा छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi, Chhattisgarhi Articles

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