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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- कोन तैं गरीब दास?

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- कोन तैं गरीब दास?

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कहां हे, गरीबदास, कहां जाके लुकागे हे नंजतिया हर? सब आरो करत हे, खोज-खबर लेवत हे, ओकर फेर मिले के नामे नइ लेवत हे? देश के महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री अउ जतेक छोटे-बड़े मंत्री अउ नेता हें जिहां देखव तिहां बस गरीब दास के फिकर मं मिसरी असन घुरे जात हे, इकरे चिंता फिकर मं रात-दिन बूड़े रहिथे।

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ओ दिन अचान-चकरित वइसे मोला नरवा करा ओहर मिलगे. दिन बुड़ताहा बेरा ये, झपर-झपर, अमराही कोती जात रिहिसे. भूत-मसान बरोबर तो ओकर चेहरा ह दिखत राहय, निच्चट बिरबिट करिया अउ कउंवा बरोबर. मैं ओला देखेंव ततके बेर मोर परान अउ सुखागे. सोचेंव- कोने भगवान, येहर चोर चण्डाल ये, ते भूत-मसान. थूक ल लीले ले धरौं तउनो हर लिलाय ले नइ करत रिहिस हे| ओतके बेर ओहर, कोन जनी मोला पहिचान डरिस धन काते दूरिहा ले गोहार पारके कथे- समारू भइया, राम-राम गो.

अरे, ये हर कोने, मोला कइसे नाम लेके जय-जोहर करथे? मोर पहिचान के तो नोहय धनका? अइसे मेहा अपने मने-मन में सोचत रेहेंव के ओहर दनदना के मोर आगुच्च मं आ गे. समारू भइया, राम-राम गो, कहिके जोर-जोर से चिल्लावत हवं, भैरा गतर के नहीं तो, फेर तेहां सुनबेच नइ करत हस? गरीबदास मोला कथे. राम-राम ददा, राम-राम. ओला जोर-जोहार करके मैं पूछथौं- कस जी, तैं कोन हस, मैं तोला पहिचाने नइ सकत हौं. मोर आंखी धोखा तो नइ खात हे.

गरीब दास ल न कोनो पहिचाने सके, अउ न ढेरा सकै भैया? अउ जब पहिचान ही अउ देखही नहीं तब जानही कइसे. अउ जब जानही नहीं तब मोला पकड़ही कइसे? महू गुरिल्ला लड़ाई लड़त हो भइया, छिपछिपा के घात करथो. इही पायके सरकार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जतेक हे तोन मोरे चिंता मं डूबे हे. ओमन कथे गरीब दास नक्सलवादी हे, ओला जतेक जल्दी हो सकय, ओतके जल्दी गिरफ्तार करे मं देश के भलाई हे, नहीं तो फेर ओहर देश मं कछु भी कर सकत हे. ओहर बताथे- बड़े-बड़े संतरी अउ मंतरी मोर तलाशी अउ खोज खबर में लगे हे. अउ मैं ये तो गांव-गांव गरीबी के अलख जगाथौं.

देख समारू भइया, तैं मोला गजब दिन मं देखउन देहस, तेकरे सेती नइ पहिचाने सकत हस. फेर मोर भाखा ल तो ओरख के जान डरे होबे के मेहर कोन आव? है न?

वाह रे गरीब दास. तैं तो मोला अभी अच्छा डेरवा डरे रहे. सांझकुन तैं येती कहां जावत हस मरे बर, अउ ये बेरा मं तोला अइसन हालत मं देखिही तो झझके मरिही नहीं ते का बाचही, चोर चण्डाल अउ भूत-परेत कस तो तोर रूप दिखथे. कपड़ा-लत्ता के कहीं ठीक-ठिकाना नइ हे. अउ गांव-गोड़हर के हाल-चाल हे. मैं ओला पूछथौं.
हे… गांव के का हाल-चाल पूछथस, जीयत हे तभो मरे बरोबर हे, अउ मरे हे तब तो फेर मरे हाल हे. कोन हे गांव के देखइया-सुनइया. मालगुजारी रिहिस तभो उही हाल. मसमोटी कभू नइ गिस मालगुजार मन के. कुकुर-बिलई बरोबर ओकर जमीन नइ हे ते ओकर धन के सदा छिना-झपटी करिन. गरीब के बहू-बेटी मन ऊपर छल करीन, नीयत ल डोलाइन. आखिर मं जेती के माल तेती गै. होगे बंठाधार. तभो ले कथे नहीं- डोरी जर-जथे फेर ओकर अइंठ नइ जाए, आजो उकर अकड़ बाकी हे, अब ओकर लइका मन आगी मं मूतत हे.

तब का गांव मं अतेक अतलइंग हो जाथे, ओकर सुनई, नियाव-पंचायत नइ होवै गा? समारू गरीबदास ल पूछथे?
ओहर जोर से हांस परथे. कथे- गरीब ला नियाय अउ रोटी कभू नइ मिल सके भइया समारू. मिठलबरा अउ सुवारथी ये दुनिया मं कतको भरे पड़े हे. येकर मन के हाथ मं नियाव हे, रोटी हे, येमन का हमला दिहीं. इन तो हमला कुकुर अउ भिखारी बना के रखे हें, अउ रखिही. मैं सुनेंव दिल्ली ले राष्ट्रपति आवत हे, भागते-भागत इहां आगे हौं. अरे रईपुर मं दिल्ली, भोपाल के बड़े-बड़े साहब अउ मंत्री आही, दस झन एस.पी. ल तो चकमा देके मही हर आवत हौं. मैं सोचेंव- कोन जनी सीआईडी पुलिस के का ठिकाना, ओकर नजर मोर उपर पड़ जाही तब गरीबदास बपरा बिन मारे के मर जही. इही पाके नजर बचाके आगेंव. देख भइया, मोर खबर अउ हुलिया कोनों मंतरी नइ ते पुलिस ल झन बताबे, नइते फेर मोर बंठाधार हो जाही.

गरीबदास बहुत चतुरा हे. चतुरा ल कभू केकरा नइ काटय. ओकर पता-ठिकाना ल पुलिस नइ ते कोनो मंतरी ल बता दुहूं तभो ले ओमन ओकर पता नइ लगा सकैं, न ओला पकड़ सकंय. कोनो गुरिल्ला सिपाही ल पकड़ लेना आसान काम नोहय. येमन गिरगिट बरोबर रोज अपन रूप अउ स्थान ल बदलत रथे. अतेक साल तो होगे, सरकार नइ तो पकड़ सकय. कस गरीबदास, समारू फेर ओला पूछथे. तब तोर अउ का-का योजना हे, कब लानत हस तोर देश में समाजवाद? गरीबदास बीचे मं टोकत कथे- समाजवाद नहीं, साम्यवाद कह. समारू भइया, कभू-कभू तोरो जीभ हर येती के ओती हो जथे.

समारू कथे- ‘मुड़ के नाम कपार तो आय रे भई.

गरीबदास- वाह अइसे कइसे हो जाही. मूड़ अउ कपार अलग-अलग होथे. वइसने समाजवाद अउ साम्यवाद मं घलो बहुत मुड़ी-पूछी के अंतर हवय. सरकार ह हमर देश मं समाजवाद लाय बर का से का नइ करत हे. कतेक सुंदर ढंग ले समाजवाद आथे ये देश मं न? किसान, मजदूर, मिसतिरी, कल कारखाना मं काम करइया संगवारी सब के मन मं असंतोष हे. दुख हे. समाजवाद मं तो सब ल सुखी होना चाही, तब इहा उलटा गंगा काबर बोहावत हे. हम सब समझथन, जानथन.हमर मन के आड़ मं ओमन खीर खाथे अउ हमन ल बासी, पेज, पसिया घलो नइ मिल सकत हे.ओहर कथे- समारू भइया. हां… समारू तब तैंहर तो ये नइ बताये कि राष्ट्रपति तोर शहर मं आय रहिस तब का-का कहिस, का-का देके गिस तुमन ला?

अरे हमन ला का देके जाही, ओहर गरीबदास. असल मं जेकर माथा मं असमशान बइठ जाथे न, बस ओला उही ह जादा परेशान करत रथे. ओकर संग मं जतका झन आय रिहिन हेअउ ओकर आगू-पीछू मं लगे रिहिन हे, सब इही काहै के गरीब दास कुछू अता-पता नइ चलत हे. ओकर खोज-खबर चलत हावय. समारू बताइस.
राष्ट्रपति का कहिसे तौन ल बतावत हौं. सुन, जौंन आदिवासी होके जंगल के भीतर मं रहिथे देश के आजादी बर लडि़स, अपन परान गंवा दिस. आज उही ल हमन भुला देन.

ओकर तियाग अउ बलिदान ले कहूं भूल जाबो तब जनता याने के गरीबदास मन हमला कभू माफी नइ दिही. ओकर जोरदार आवाज म अपन तीर-तार बइठे राज्यपाल, मंत्री, सांसद अउ विधायक मन कोती इशारा करत कथे, आज तुमन काकर भरोसा मं कुरसी मं बइठे हौ, येकर बने सुरता कर लौ. जेकरे परसादे कार, मोटर, बंगला, हवाई जहाज अउ देश-विदेश घूमे के सुख हम सबला मिले हे, कतेक दुख के बात हे के ओकर मन करा रहे बर घर, पेट बर रोटी, तन पर कपड़ा तक नइहे. येकर चिंता करना जरूरी है. राज्यपाल और मुख्यमंत्री मन घला इही बात कहिन कि ओकर सरकार गरीबी हटाय बर अतेक काम करत हे तभो ले ओहर टरे के नाव नइ लेवत हे. तब तोर का विचार हे, का योजना हे? तोर दरी कुछ सिध परही, तैं तो येती-ओती भागे फिरत हस? समारू ओला पूछथे.

मैं भागे-भागे नइ फिरत हौं भइया. मोर नाम गरीबदास हे. ओ गरीब भाई मन के मैं हर दास हौं. ओमन ल अपन तरीका से समझावत हौं अउ काहत हौं- अरे बुद्धू हो, चलव उठव, कुछ करव. कतेक दिन ले अइसने नंगरा, खाली पेट, बिना मकान के रइहौ. दूसर ल तो तुमन राजा बना देव, मंत्री बना देव, अउ तुंहला का धराइस, सिरिफ कंगाली न? जब ओमन तुंहर पेट मं छूरी भोंक सकत हे, तब तुमन ल घला वइसने करना चाही. तुमन आज ले निच्चट भोंदू के भोंदू रहि गेव, फेर तुंहर मं अक्कल नइ अइस. अरे नेता का करथे, का धरथे, इही सब तो लिखे, पढ़े अउ समझे के विषय हे. अतके ल नइ समझ सकेव अउ तेकरे सेती तो जाथौ धारे-धार.
तब तोर बात ल कोनो मानत हें, सुनत हे कि नहीं? मैंहर गरीबदास ल फेर पूछथौं.

वाह… गरीबदास के बात ल गरीब नइ सुनही भइया तब का नेता अउ मंतरी के सुनही. मिठलबरा मन के जौंन मुंह मं राम अउ बगल मं छुरी लेके चलथे. अउ देखबे भइया हमन कइसे छुरी और गोली चलाबो तौंन ला. सब तिलमिलावत रहि जाही. फेर अभी नहीं, नई बतावौं सबो बात ला तोला. अउ कभू मिलबे.

ओहर अतका किहिस तहां ले धरा-पसरा चलते बनिस. मुंधियार होवत रहिस. मैं सोचेंव- वाह रे गरीबदास. तोर मन के सपना कभू पूरा होहीके बस अइसने हवा मं किला बनावत रहिबे. लड़हूं कथे बुजा हर. अरे बड़े-बड़े लड़इया मन ला तो गोली मं भुन दिन, पांसी मं लटका दिन तौंन तोला पदरी ल कोन पूछथे. भगवान तोर भला करय, कांहीं आंच झन आय. फेर कभू सोचथौं- एकर ले तो बने हे रे गरीबदास बासी-पसिया खा-पी के अपन गुजर-बसर करथे? जवान लइका हे, नवा खून हे, ताकत हे, ओमा तभे तो लड़े खातिर मोरचा बनावत हे. सोचत बिचारत गांव तीर आ जाथौं. आकाशगंगा कोती नजर उठाके देखथौं चटक-मटक करत चंदैनी मन चमकत रथे. ओमन मोला पूछथे- कस समारू. तोर गरीब के राज मं अइसने गरीब मन चंदैनी असन मजा करही. मैंहर हांस परथौं अउ कथौं जरूर गरीबदास के राज अइसने आही. सब सुखी रइही, सब रोटी खाही.
(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Chhattisgarhi Articles, Chhattisgarhi News

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