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छत्तीसगढ़ी विशेष - बढ़िया-बढ़िया छत्तीसगढ़िया खेल

छत्तीसगढ़ म तीन कोरी ले जादा खेल खेले जथे

छत्तीसगढ़ म तीन कोरी ले जादा खेल खेले जथे

छत्तीसगढ़ म तीन कोरी ले जादा खेल खेले जथे. एमा भौंरा, खो-खो, फुगड़ी, बिल्लस, डंडा-पचरंगा, घांदीमुंदी, छू-छूवउल, नदी-पहाड़, ...अधिक पढ़ें

लइका मन के अपन धरती, अपन माटी के प्रति लगाव बचपन ले होना चाही. एखर सेती बचपन से लइका मन म अपन मंहतारी भूइंया (मातृभूमि) बर समरपन के सीख जरूरी हे. टी.वी. मोबाइल के दुनिया रंगीन हे. फेर ज्ञान-विज्ञान के सीख होय तब बने हे. नानपन ले लइका मन ल खेले कूदे अउ मस्ती करे म मजा आथे. फेर दाई-ददा मन लइका मन ल भुलियारे बर मोबाइल धरा देथें. पहिली लइका मन पढ़ई के संगे संग घर म, बाहिर म अउ स्कूल म खेलें-कूदें अउ तन-मन तंदरूस्त राहय.

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मार्च महीना(सन2020) ले स्कूल म कोरोना-तारा लगे हे. लइका मन घरे म हें. लइका मन बर तरह-तरह के खेल हे. उनकर बर घर म पढ़ई के संगे संग खेलना घलो जरूरी हे. पालक अपन सुविधा के अनुसार लइका मन बर उचित खेल चुनाव करें अउ खेले के अवसर देंय. पढ़इ –लिखइ म जरूरी मदद करें. उमर के हिसाब से उन खेले. आजकल छोटे लइका मन बर खेल-खेल म शिक्षा के बड़ महत्व हे. एमा बाल-मनोविज्ञान आधारित शिक्षा के खूब परयोग होवत हे.

परंपरागत खेल
हमर छत्तीसगढ़ म तीन कोरी ले जादा खेल खेले जथे, एमा भौंरा, खो-खो, फुगड़ी, बिल्लस, डंडा-पचरंगा, छू-छूवउल, नदी-पहाड़, कुश्ती, उलांडबाडी,रेस-टीप, सेवन डेस ,बीस-अमरित, गिल्ली-डंडा, अटकन-मटकन, तिरी-पासा, खीला-गडौल, घांदी-मुंदी, बांटी, घर-गुन्दिया, सगा-पहुना, खुडूवा, बिलल्स, चकरी, अंधियारी-अंजोरी, पुतरा-पूतरी, रूमाल-लुकउल, ठट्ठा-मट्ठा, हाथी-घोडा पालकी,पचवा गोटी, डंडा-कोल, रही-चुल्ली आदि सामिल हे.

फुगड़ी, घांदी-मुंदी,
डंडा-पचरंगा के खेल म पेड़ उपर चढ़ के बार-बार कूदना अउ जमीन म बनाय गे गोला के भीतरी म रखे डंडा ल छूना लइका मन के खेल आय. पेड़ म चढ़े-उतरे के के अभ्यास होथे. घांदी मुंदी के खेल म आँखी म पट्टी बांध के गोल-गोल घूम के छूना रहिथे. फुगडी महिला मन के खेल आय. ख़ास कर कुंआरी लडकी मन ये खेल ल खेलथे. एहा बइठ के खेले जथें. हार –जीत के प्रतियोगिता होथे. छू-छूवउल में आँख में पट्टी बांधकर अपन संगवारी ल छूना रहिथे. रस्सी –कूद, बिल्लस, सगा-पहुना नोंनी मन खेलथें.

अटकन-मटकन
रेस-टीप लुकाछिपी के खेल आय. एमा बड़ मजा आथे. अटकन–मटकन, केउ-मेउ मेंकरा के जाला, गोल-गोल रानी, इत्ता–इत्ता पानी मजेदार खेल हे. सेवन डेस म सात ठन खपरैल के टुकडा एक के उप्पर एक जमा के रखथें. फेर निश्चित दूरी म खड़े हो के पुक के मदद ले निशाना लगाय जथे. निशाना लग जथे तब दुसर मन सब भाग जथें ओमन ल पुक से निशाना लगाय जथे .जेला पुक लग जथे तेंन ह दाम देथे

सगा-पहुना, पुतरा-पुतरी
छप्पर के खपरा के नान-नान टुकडा या माटी के बर्तन के छोटे छोटे टुकड़ा ल के रूप म बिल्लस उपयोग करके बिल्लस के खेल खेले जथे.नान-नान लइका मन पत्ता के तुतरू बना के खेलथें. नोनी मन माटी या रेती ले घरगुन्दिया बनाय के खेल खेलथें. फुगड़ी चुरी बिनउल, चुरी लुकउल, रस्सी-कूद, सगा-पहुना घलो उनकर खेल आय. गिल्ली-डंडा, गेंड़ी, भौंरा, कुश्ती ये ह लड़का मन के खेल आय. लड़का मन चीनी मिट्टी या कांच के कंचा (बांटी) घलो खेलथें. बांटीके खेल म जीत –हार घलो होथे. खेल हम ल सहनशील बनाथें.

खीला-गड़उला
बरसात के दिन म खीला-गड़उला खेले जथे. नोक वाले लोहा के कील नम जगा म गड़ाय जथे. जेखर लोहा नइ गड़ पाय तेंन दाम देथें. रूमाल के खेल घर अउ स्कूल म बड़ लोकप्रिय हे. हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की इत्ता–इता पानी आदि खेल के मजा लइका मन ल लेना चाही. रेल के खेल, कइ प्रकार के लंबी-कूद, ऊँची-कूद,फिसल-पट्टी के खेल,कई परकार के दउड़ हे. गाँव म रहिचुली बना के लइका मन खेलथें. एमा एक ठन मोठ लकड़ी जमीन म गड़ीया देतें.थोकिन मुड़े दुसर लकड़ी ल बीच ल खोल्खा करके जमीन म गड़े लकड़ी जों गिल्ली कस छोलाय रहिथे तेखर उपर मड़ा देथें. ये लकड़ी के दुनो डाहर एकक लइका बइठ के गोल-गोल घुमथें.बीच म एक झन गोल ढकलइया मिल जथे त अउ मजा बाढ़ जथे. खेलकूद स्वास्थ्य बर जरूरी हे. एखर ले शरीर अउ मन के स्वास्थ्य बने रहिथे. मन पढ़इ म लागथे.

घर-गुन्दिया
घर-गुन्दिया लइका मन के बड़ प्रिय खेल आय. माटी या रेती ले घर-गुन्दिया बनाय जथे. चक चलाय के खेल घलो होथे. लइका मन हलका टीन या प्लास्टिक के बने चकरी चलाय के खेल खेलथें. आजकल प्लास्टिक के चीनी खेलौना ले बजार पट्टाय हे. ये खेलौना छोटे-बड़े सबो सहर कस्बा म आसानी से मिल जथे. सुंदर होय ले लइका मन के खिचाव बहुत होथे. एखर सेती परम्परागत देशी खेल उपर परभाव परत हे. समे बाजारवाद के हे अउ बजार सब ल मोहित करत हे. बड़े लइका मन बर पूरा मैदान हे जिहां हांकी, किरकेट, कबड्डी ,व्हालीबाल, बास्केट-बाल आदि खेल सकत हें.कोरोना हर लइका मन के आजादी ल घलो कंट्रोल क्र दे हे.

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Corona

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