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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य - तिजहा फरार अउ मइके मया-माया

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भाई ह उनकर तीनों बहिनी अउ फूफू बर नवा लुगरा चूरी-फुंदरी अउ सिंगार के सकल चीज लानिस. तस्मई (खीर), पूरी, तिखुर, सिंघाड़ा, ...अधिक पढ़ें

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बुद्धि के देवता श्री गणेशजी एसो परगट होइस त सीधा-सीधा अपन आसन म नई बिराजिस. अपन भगत मन संग गोठियायिस. भगत मन ल सरकार कोरोंना के सेती धूमधाम से गणेशोत्सव मनाय के मनाही करे हे. अभी कोरोना के तीसर लहर के डर सरकार अउ भगत मन ल हे. सरकार घेरी-बेरी चेतावत हे तीजा अउ गणेशोत्सव म कोरोना नियम के पालन करना जरूरी हे.सरकार अपन बुता ल करत हे. भगत अपन कर्तव्य ल करहीं.

मुख्यमंत्री के निवास म तिहार

हमर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह पोरा के दिन अपन सरकारी निवास म जोरदरहा तीजा-पोरा कार्यक्रम रखिस. दिल्ली ले तिजहारीन आगें. खुश हो के बिदा होइन. स्व-सहायता समूह के दीदी मन के तेरा करोड़ (13 करोड़) रू.के करजा ल माफ़ कर दिस.वुही बहिनी मन आंय जेन स्व-सहायता समूह से स्कूल म मध्यान्ह भोजन बनाथें. आंगन-बाड़ी म पूरक पोषन-आहार बाँटथे, रेडी-ईट अउ सरकारी राशन दुकान चलाथें. येखर अलावा आत्म-निर्भर होय बर कई ठन बुता करथें.ये बहिनी मन बड़ खुश होइं हें.करजा माफ़ होय ले जेन बहिनी मन डिफाल्टर होगे रिहिन उन अब करजा ले सकत हें.

मइके जाय के सुख-दुःख

पहिली दिन करू-भात खाय के परम्परा हे. दूसर दिन तीज उपास, तीज उपास के बाद के दूसर दिन गणेश चतुर्थी परथे. सबेरे-सबेरे तिजहारीन मन फरहार करिन. मइके म उन सुखासन म बइठिन. गोठ म अपन-अपन घर-दुआर के सुख-दुःख आधा रात ले गोठियायिन. फूलबाई अपन बहिनी ल किहिस-चमेली दीदी देखे बस म कतेक भीड़ रिहिस. एक दुसर ल ढकेल-पेल करत मइके पहुंचेंन. दुनो टूरा मन अतेक रोंय के करलई लागे .कहूँ मइके आय के जगा म कोनो दुसर जगा म जाना रहितिस त मेंहा अतेक भीड़ म सफर नइ करतेंव.खड़े-खड़े गोड़ हाथ पिरागे. दु चार झन लइका मन त मारे गर्मी के उल्टी कर डरींन’. चमेली किहिस छत्तीसगढ़ सरकार ह मोटर किराया म रूपिया म चार आना (25प्रतिशत)बढ़ा दिस. तीजाच बखत किराया बढ़ाय के मुहूर्त निकले गिस.

चंपा किहिस … तीजा बखत मोटर भाड़ा बाढ़गे

सब ले छोटे बहिनी चंपा किहिस-‘मोटर वाले मन लाहोच लेथें.एक त किराया बढ़ा दिन अउ बस म ठूंस-ठूंस के सवारी भरत रिहिन. बस म आवत-आवत मोला अकबकासी लागे. भोलू के ददा हर स्टेशन म बस बइठार के खेत म पानी पलोय बर चल दिस. चिगिर-चांगर लइका मन ल धरेंव अउ बस अइस त बोजागेंव.दुनों लइका मन ल कंडेकटर पइस तहाँ ले लांन के दिस.मइके के आवत ले हबल-डबल होगे’.

छलछलाइस आँखी

चंपा के आँखी ले आँसू छलछलागे. अपन दाई फिरंतिन के सुरता कर के तीनों बहिनी अउ ओखर मन के फूफू (बुआ) के रोना-गाना मचगे. चंपा के बिहाव होय तीन साल होय रिहिस के ओखर दाई ल कोरोना रोगहा ह लील डरिस.ओखर चार महीना के बाद ददा समारू ल घलो कोरोना लील डरिस.अब दु भाई तीन बहिनी बांचे हावें.तीनो बहिनी अपन-अपन ससुरार चल दिन.बड़े भाई खेती-खार देखथे.छोटे ह अभी-अभी मास्टरी के नौकरी लगिस हे. घर माटी के हे. चंपा के ददा सदा जीवन वाले रिहिस.फेर अपन लोग लिका मन ल पढ़े-लिखाय बर पाछू नइ हटिस. तीनों बहिनी अउ एक भाई के बर-बिहाव करके उनकर घर बसा दिस.ये कोरोना उनकर दाई-ददा ल खागे.नहिं त एसो छोटे भाई के बिहाव घला कर देतिस.करजा बोड़ी त सबे के होथे.

मइके मया के कोरा

तीजा उपास निर्जला होथे. न पानी पीना हे न चाहा. पूजा-पाठ अउ रात भर जागरण होथे. भाई ह उनकर तीनों बहिनी अउ फूफू बर नवा लुगरा चूरी-फुंदरी अउ सिंगार के सकल चीज लानिस. तस्मई (खीर), पूरी, तिखुर, सिंघाड़ा, नरियर अउ किसम–किसम के भोग-राग के फरहार होगे. पारा परोस ले आय फरहरी के नेवता म उन गिन. चार-पांच घर जा के उन अउ फरहार करिन. दूसर मन ल घलो उन अपन घर बला के खवइंन-पियइन्.इही त मया-मोह आय. अपन जनम-भूमि के कोरा सब झन ल बलाथे. मया करथे. आशीर्वाद देथे.लइका मन ल ममा घर जाय संउख रहिथे. ममा ह कहूँ उमर म छोटे त कहूँ बड़े होथे. दाई-ददा ,बबा, बबा-दाई, भाई-बहिन, कका-काकी ,ममा –मामी, नाना-नानी,फूफू के दुलार म नवा पीढी के पौध बाढ़थे. तीजा-पोरा के तिहार छत्तीसगढ़ म भू उत्साह के संग मनाय जथे.

अब भाई के लोकेशन मोबाइल म

अब ओ आवागमन के साधन बाढ़े ले पद-यात्रा कमती होगे. मोटर-कार,मोटर-साइकल बहुत होगे.जेन अति साधारण परिवार के हें उही मन बस के सफर करथें.पहिली मइके म रेहे बर दस-पन्द्रह दिन कोनो –कोनो मन महीना भर रही जांय. मयाच-मया म ममीयारो के सुख-दुःख भोगें .अब आवागमन के साधन बाढ़े ले हप्ता नहिं त दु चार दिन रहना होथे. नवा–नेवरिया बहू अउ नव ब्याहता बेटी के आकर्षण मइके बर जादा होथे. बाल-गोपाल के होवत ले आना-जाना जादा हो जथे. धीरे से मइके के मोह-माया घटत जथे. अपन घर दुआर पति,लइका, सास,ससुर, देवर-ननद के मोह बाढत जथे. बहिन के रक्षा-बंधन म बड़ ताकत होथे. ये मया के डोरी जीवन भर बंधाय रहिथे. तीजा बर लेवाल भाई होथे. जब तीजा लकठाथे तब एकक दिन अउ एकक घंटा बहिनी के रद्दा देखई म बितथे. मोबाईल अउ इंटरनेट के जुग म अब पहिली सरिख रद्दा देखई नइ होय काबर के छिन-छिन के सूचना मिल जथे.

(ये शत्रुघन सिंह राजपूत के निजी विचार हैं.)

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