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छत्तीसगढ़ी म पढ़व: छत्तीसगढ़ के विभूति- गुरु घासीदास, संत घासीदास अउ महंत घासीदास

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छत्तीसगढ़ म तीन झिन घासीदास एक ले बढ़ के एक होइस. कोनो महान संत, कोनो समाज सुधारक त कोनो ह समाज सेवक के रुप म नाव कमइन. एक झिन घासीदास ह मंडला जिला म कबीर पंथी घर म जनम ले रिहिसे. संत घासीदास जी ह कबीर साहेब के सोर बगरावत छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला म आय रिहिस. इहें खरोरा करा बंगोली गाँव म ओह समाधी लिस.

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गुरु घासीदास जी ह गुरु घासीदास बाबा के नाव ले प्रसिद्ध होइस. सतनामी समाज के धर्म गुरु के रुप म गुरु घासीदास जी के अघादेच आदर- सन्मान जम्मा समाज म हवे. अट्ठारा दिसम्बर सतरा सौ छप्पन म गिरौदपुरी वाले महंगूदास अउ अमरौतिन दाई के कोरा म बाबू खेलिस. बड़े हो के सत के पताका ल दुनिया भर म फहरइस. तिही पाए के अट्ठारा दिसम्बर के दिन गुरु घासीदास बाबा जी के जयंती प्रदेश भर म अबड़ेच धूमधाम ले मनाथे. एकर लोकप्रियता अइसे हे सरलग एक महिना तक ले हंसी खुशी से मनाए जाथे.

मैं तो गुरुजी के करत हौं अरजिया हो
साहेब घुमरि-घुमरि के
सुरति कमल से आए साहेब आए निकुटि म करत हुकनिया हो
साहेब घुमरि-घुमरि के
प्रेम भाव से बने हो रसोइया सतगुरु आई न जेवइया हो
साहेब घुमरि-घुमरि के
एक बूंद से सृष्टि रचे
पच्चीस गुन के नचनिया हो
साहेब घुमरि-घुमरि के
घासीदास गुरु के अरज गोसइया साहेब
सतगुरू समझइया हो
साहेब घुमरि घुमरि के

गुरु के महिमा के बखान करत झूमर-झूमर के पंथी नाचथे. जब माटी के मांदर म दधनीक-दधानीक गहकथे तब लोगन के रुंआ ठाड़ हो जथे. अब भले नवा पीढ़ी मन माटी के मांदर के बदला लकड़ी के मांदर बजाए ल धर लेहे. जब विधुन हो के पंथी नचई चलथे त जोश घलो चघ जथे. ओला जैतखाम म लेग के सतनाम पुरुष के नाव ले अमरित पानी पियाथे तब कहूं जा के ओ ह शांत होथे. ए हर जंवारा या गौरा चढ़े कस धार्मिक अउ आध्यात्मिक अनुष्ठान बानी लगथे. सतनामी समाज म दशहरा म रावन वध नइ होय. सतनामी समाज ह एला ‘गुरु दर्शन ‘मेला के रुप मानथे.

पहिली तो गुरु ह राजा के रुप म हाथी म चघ के नगर म किंजर-किंजर के परजा मन ल असीस देवय. अभी घलो दशहरा ह दसमी के बिहान दिन एकादशी के भंडारपुरी म होथे. कृष्ण जनमाष्टमी (आठे) के दिन ल सतनामी समाज के लोगन मन गुरु बालक दास के जनम दिन के रुप म बड़ा धूमधाम ले मनाथे. काबर कि इही दिन मंझनिया बारा बजे गुरु बालकदास जी ह जनम धरे रिहिसे. तभे तो एकर झलक पंथी गीद म मिलथे-

तन्ना हो नन्ना मोर नन्ना हो ललना
जिहे दिन कान्हा जनम लिए ललना
उही दिन बालक जनम धरे ललना*

इही पाय के आठे के दिन जैतखाम म ‘पालो’ (सादा कपड़ा) ल बारा से संझा 6 बजे मुंधियार के बीच चघाथे.रात के पालो नइ चढाय जाय भले माई पहुना आय या झन आय बेरा के राहत ले तक पालो चढ जाथे.

छत्तीसगढ़ म सतनामी समाज अपन दाई-ददा मन के बिक्कट मान – सम्मान करथे.दाई-

ददा मन ल पलना म दुनो झन ल बइठार के आरती उतारथे. गुरु गातर संत – महंत के तको भारी आदर करे जाथे पलागी करके असीस पाथे अउ अमरित पानी ले जाथे . गुनवंता मनखे के सतनामी समाज बड मान गउन होथे.संसार म सबले बड़े शक्ति आय सृष्टा (सृष्टि के रचिता). सृष्टि कर्ता के रुप म दाई-ददा ल मान के फूल चघा के सादा चाउंर टिक के चरनामृत पी के अपन चोला ल तारथे. महतारी-बाप मन घलो अपन संतान ल भरपूर आर्शीवाद देथे. गिरौदपुरी म फागुन पंचमी से साते तक तीन दिन के दिन भारी जबर मेला भराथे. देश विदेश के मनखे सकलाथे. गिरौदपुरी म विश्व के सबले ऊंचा जैतखाम बने हवय. जेकर ऊंचाई 77 मीटर हवय. एकर बने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दर्शनीय स्थल बनगे अउ पर्यटन मानचित्र म प्रमुख स्थान के रुप म चिन्हउ होगे हवय.जेकर दर्शन खातिर देश विदेश के श्रद्धालु अउ अनुयाई मन आथे.

तीसर नम्बर के घासीदास ह राजनांदगांव के राज घराना म अँवतरे रिहिसे.बैरागी परिवार म जन्मे घासीदास ह महंत घासीदास के रूप म जाने गिस. महंत घासीदास दानी रिहिसे.छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर म महंत घासीदास के नाम ले महंत घासीदास संग्रहालय स्थापित हे. ओह गजब दयालू रहिन ओकर नाव ले अबड़ अकन सार्वजनिक स्थल बने हवय. छत्तीसगढ मे तीनो घासीदास सम्मानीय हवय इकर जइसे संत महात्मा मन के सेती छत्तीसगढ के महिमा जग जाहिर हवय.

(दुर्गा प्रसाद पारकर छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi

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