छत्तीसगढ़ी विशेष - सौदा भुइयां महतारी के

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जमीन ला तो ख़रीदे खातिर गाँव ला कोन काहय शहर ले चील कउआ असन दलाल मन गली-गली किंजरे ले धर लिस. बात मुँह ले निकलिस नहीं के जमीन ला झपटे खातिर घर मं ओकर मन के रेलम-पेल मचगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 11:53 AM IST
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पुरखा के सुरता करत सियाराम के आँखी ले आँसु डबडबागे. ओकर बबा परसादी करा पाँच एकड़ जमीन रिहिस हे. ओला अपन पांचो बेटा मन मं एक-एक एकड़ बाँट दे रिहिस हे. जीयत भर बेटा संग रिहिस हे. एक दू बेटा सौंजिया (नौकर) लगत रिहिन हे. घर परिवार बने ख़ुशी राजी मं आनंद उछाह मं चलत रिहिस हे. कोनो परकार के कांही कमी-बेसी नइ रिहिस हे. ओकर ढलगे (निधन) के बाद पांचो बेटा मन अलग-बिलग (बँटवारा) होगे. बड़े भाई रामनाथ के एके झन बेटा रिहिस अउ दुसर भाई मन के परिवार मं दू-दू, तीन-तीन झन लइका रिहिन हे.

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रामनाथ के बेटा सियाराम अपन पुरखा के मिले एके एकड़ के खेती मं गुजर बसर करत रिहिस हे. दुनो परानी जइसे तइसे कर के दिन गुजारत रिहिन हे. बाहिर थोर बहुत मजदूरी करके खुद के हालत ला बने बना डरे रिहिन हे. इही बीच बेटा रामदीन घला अपन दाई-ददा के संग कमाय धमाय ले धर ले रिहिस हे. सियाराम के हालत सबो भाई ले ठीक-ठाक रिहिस हे फेर इही बीच एक ठन भारी अलहन आगे. बेटा रामदीन ला अइसे रोग धर लिस ते ओकर जतका आड़ी पूंजी रिहिस हे तउन धीरे-धीरे उरके ले धर लिस. बाप डर्रा गे, सोचे ले धर लिस, अब का होही भगवान? ए रोग हा तो पहाड़ बन के आगे, काल होगे मोर बर. बेटा के इलाज मं तो मोर जम्मो पूंजी उरक जाही.



अपन गोसइन फिरंतीन सो पुछथे, सलाह लेथे-कस ओ रामदीन के दाई, बेटा के इलाज-पानी मं तो भारी पइसा लगत हे, एमा तो पूंजी नइ बाचय तइसे लागथे. डॉक्टर हा तो हकन के पइसा लेवत हे. सरकार हा जउन पइसा इलाज बर देवत हे तउनो हा पूर नइ परत हे. अब कइसे करबों तउन ला बता? फिरंतीन घला भारी सोच मं परगे . ओहर कहिथे-मोर मेर जतका सोना चांदी के जेवर हे तउन ला बेच दे, ये कोन दिन काम आही? जान हे तब जहान हे, मोर बेटा के परान ला कइसनो कर के बचा ले. दुःख खपलाय हे तब कोनो दिन तो सुदिन आबे करही. अभी रात हे तब कभू तो दिन आबे करही, सुरुज देवता तो उगबे करही. धीरज धर सब काम बन जाही.
गोसइन के बात ला सुन के रामदीन के ददा कहिथे-बात तो बने काहत हस मोर लेड़गी, फेर तै जानत हस के बेटा ला जउन बीमारी सचरे हे तउन कभू ठीक होवइया नइहे? एकर किडनी ख़राब होगे हे ये जानलेवा बीमारी हे, जान लेइच के रइही. गोसइयां के अतका बात ला सुनिस तहां ले फिरंतीन फफक के रो डरिस. फेर मन ला संवास के धीरे से कहिथे- कइसनो होय, तोला कांहीं करे ले परय खेती खार, घर दुआर सबो बेचा जाय, फेर मोर बेटा के परान ला बचा ले मालिक? एके झन तो मोर बेटा हे, इही ला देख के मैं जीयत हौं. ये नइ रइही तब मैं मर जाहौं. एकर बिना मोर जीवन अकारथ हो जाही. काकर मुँह ला देख के जिहौं, ओकर बिना जी के का करिहौं? अतका काहत-काहत गोहार पार के रो डरिस फिरंतीन.

ओकर रोय के आवाज ला सुन के पास-परोस के मन अइ का होगे दई फिरंतीन के घर मं, रोहा-राही मचे हे काहत सुनत घर मं आगे. कुछु ओकर बेटा ला होगे तइसे लागथे अइसे काहत हाल-चाल पूछे लगिन तब पता चलिस के बेटा के चिंता करके रोवत हे. फिरंतीन ला समझाइन-बुझाइन अउ कहिथे-चिंता झन कर बहिनी, होनी ला कोनो टारे नइ सकय? भगवान सब ला जीवन दे हे, तोरो बेटा ला दे हे. धीरज रख सब के बिगड़ी बनइया उपरवाला हे. अतका कहिके परोसीन मन अपन-अपन घर चल देथे. इलाज कराय के खातिर गाँव ले बड़े शहर मं अपन बेटा ला लेके आए रहिथे. बड़े बीमारी के इलाज मं जादा पइसा फुकावत हे. सरकारो ह देवत हे तौनो हा पूर नइ परत हे. गोसइन कह दिस घर दुआर, खेती खार तोर चीज़ बस रहय ते बाचय फेर मोर बेटा के परान ला बचना जरूरी हे. बेटा तो मोर हे, मोर कलेजा के टुकड़ा हे ये नइ रइही तब तोर पूँजी पसरा कोन काम के हे. रामनाथ सोचिस, बात काहत हे बाई हा तउन तो सही बात हे. ओहर पुरखा के दे एक एकड़ जमीन ला बेचे के निरनय ले लिस. जमीन बेचे के खबर जइसे गाँव मं बगरिस कउआ असन जमीन ला झपटे खातिर दलाल मन गिराहिक तपास के आगे रामनाथ करा.

जमीन ला तो ख़रीदे खातिर गाँव ला कोन काहय शहर ले चील कउआ असन दलाल मन गली-गली किंजरे ले धर लिस. बात मुँह ले निकलिस नहीं के जमीन ला झपटे खातिर घर मं ओकर मन के रेलम-पेल मचगे. कहे लगिन वाजिम मं जमीन बेचत हे गा सियाराम हा? बात चलत देरी नइ लगिस, एती झट मगनी पट सादी होय बरोबर जमीन के सौदा होगे, बियाना ला कोन कहाय रजिस्ट्री होय के पहली जमीन के पूरा रकम एकमुश्त दलाल मन दे दीन, का भरोसा सौदा ले पलट झन जाए, दुसर दलाल बीच मं आके भांजी झन मार दय.

पाँच लाख रूपया, फिरंतीन के हाथ मं धराथे सियाराम. अतका बेर उहू हर फफक के जोर से रो डरथे, रोवत-रोवत कहिथे-फिरंतीन, मैं मोर पुरखा के जमीन, अउ दाई-ददा के चिन्हारी ओकर मन के अमानत ला बचा नइ सकेंव. ओकर आत्मा मन का कइहीं, हत रे चंडाल तैं ए का कर डरे? अपन भुइयां महतारी ला घला नइ बचा सके, बेच डरे दुसर के हाथ मं? ओकर आंसू थमहत नइ रिहिस हे. अपन गोसइयां ला रोवत देखिस तहां ले फिरंतीन घला रोय ले धर लिस. आंसू ला पोछत कहिथे-झन रो रामनाथ के ददा, धीरज धर. बिपत के दिन मं जउन धीरज अउ शांति से काम लेथे तेकरे बात बनथे.ओहर समझावत कहिथे-तैं अपन पुरखा के जमीन ला बेचे हस तउन ला शराब, जुआ-चितत्ती, छिनारी के काम बर नइ बेचे हस. बेटा के परान ला बचाय खातिर ए उदीम करे हस. उपरवाले मालिक हा देखत हे सबो ला. बने दिन लहुटही ना तहां ले फेर खरीद लेबों खेती-खार अउ जेवर ला, एकर तैं चिंता काबर करत हस? अपन गोसइन के बात ला सुन के सियाराम कहिथे-वाह लेड़गी मोर, कतेक सुघ्घर अपन बेटा मन ला जइसे कोनो महतारी समझाथे तइसे आज तैं मोला समझावत हस. तोर मुँह मं दूध-भात बही, तोर बात आज मोला लेवना (मख्खन) सही लगिस हे. भगवान से विनती करत हौं, तोर बेटा अस्पताल ले बने होके लहुट जाय तब ओ पुरखा मन घला देखही के मोर बेटा सियाराम अपन जमीन ला अकारथ नइ बेचे हे, बने काम मं लगाय हे. इही दिन बर तो अपन लइका मन खातिर ओकर दाई-ददा मन पूँजी जोर (बटोर) के रखथे.

एती रात के ओकर नींद नइ परत रहय, धियान बेटा कोती जाय रहिथे. कोन जनी बने होही ते नइ होही, अउ कतेक अकन पइसा लगही, ये पइसा कहूँ सिरा (खत्म) जाही तब कहाँ ले लाहुं? वाह रे किडनी, मोर बेटा बर काल बन के तैं आय हस, ओहर का बिगाड़े रिहिस हे तोर? अभी अभी तो ओहर उबज के खड़ा होय हे, बने ढंग ले संसार के रस-कस ला घला देखे अउ जाने नइहे अउ हर्रस ले पहाड़ ला ओकर मुड़ी मं पटक देस. महतारी बेटा अस्पताल मं परे हे अउ घुरत हौं पानी मं माटी के खिलउना बरोबर. इही चिंता फिकर मं बुड़े सियाराम ला कतका बेर नींद झपट लेथे के ओकर गम नइ पइस. होत बिहनियां कउआ मन कांव-कांव नरियाइन तभे ओहर रटपटा के उठथे अउ कहिथे-अरे बिहनियां होगे? ( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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