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Chhattisgarhi- अटके फटके मा काम आवंय अइसन पारा परोसी होना चाही

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छोटे बड़े के लिहाज होना चाही तभे समाजिक प्राणी कहाबे. हकरस ले कहइया ला दुरिहा ले घलो मानपान नइ मिलय. गांव होवय चाहे शहर नता - गोता के चिन्हारी जरूरी हे.

  • News18Hindi
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कोनो नइ जानय काली का होही. आज के सपना काली सच हो जही अइसे घलो नइ केहे सकस, फेर अजम हो जथे के आने वाला काली घलो कुछु नवा संदेसा लानके जाही. समिलहा अपन पारा परोस के विचार मेल खाथे तभे बने लागथे. दिन भर तें काम बुता मा भुलाए रेहे , संझउती बेरा थोकिन आरो लेहे के बहाना अपन मयारूक मनके तीर जाना चाहिए.

जेन जानथे तेन मानथे घलो
कहूं डहर चल दे अपन बेवहार हा सदा दिन साथी बनके रइथे. रोजी रोजगार घलो अपन डहर ला खोजत आवा जाही मा लगे रइथे. अड़बड़ दिन अंतरी परथे तहां मया अऊ बाढ़ जाथे. पांव पयलगी के थेगहा सबो जगा बनाए रहना जरूरी परगे अइसे होना चाही. जाने पहिचाने रेहे मा नता कुनाता घलो मानी पिये के उदिम करथेच. कोनो मेरन कोनो झुकोए के कोसिस नइ होना चाही नइते आगू चलके कोनो दिन बियाज सहित वापसी के गारंटी हे. माने गउने मा का धरे हे थोकिन बईठले अइसे केहे मा ककरो का जाथे. बोली अउ ठोली मा कतका अंतर होथे सबो ला समझ मा आ जथे. जानसुन के घलाव अपन बेवहार ला कखरो बर नइ बिगाड़ना चाही. जाने रहिबे तभे माने के जगा राखे सकबे.

टिरियाती कोनो रेंगिस ते समझना चाही
छोटे बड़े के लिहाज होना चाही तभे समाजिक प्राणी कहाबे. हकरस ले कहइया ला दुरिहा ले घलो मानपान नइ मिलय. गांव होवय चाहे शहर नता – गोता के चिन्हारी जरूरी हे. थोरको कोनो तिरिया के रेंगिस तहां जान डार. छोटे – बड़े के नता मा मान सम्मान के शिक्षा आने वाला पीढ़ी ला मिलथे. मोटर गाड़ी मा घलाव अपन नता के मानने वाला धियान मा राखथे. घसेलहा होए के अपन अलग चिन्हारी रइथे. मित मितानी मा घलो सबो किसम के नता ला निभाना चाही. हमरे सेती आवय कहिके परवारिक जान के सबो के मान सम्मान होना चाही. कभू – कभू नइ जाए तभो नवा सगा के पहिचान करना हमर करतव्य होना चाही. जानडरे तहां जियत भर के निभाव के बंधना मा बंधाए चलत राह. कोन जनि का का सोंच रिहिस होही हमर पुरखा सियान के तेन आज ले अपन निभाव करत चलत आवत हन. बस अइसनहे सबो दिन चलत राहय.

बदलगेहे जमाना कहईया कोने
ऊही परिवार ऊही घर दुवार अन्नी दुवन्नी के फरक होही तेला कोनो नई अंताजंय. फेर आजकाल कतको फेसनहा मन घड़ी घड़ी केहे हा धर लेहें. जमाना बदलगेहे गो. का जमाना बदलगेहे. रफ्तार बाढ़गेहे तभो ले भात ला तो ओतकेच खाबे. बोरे सकेले मा सगा आगे त का लांघन सुताबे. हरे खंगे मा परोसी ला थोकिन जनवाके तो देख सबो जनम के नता सकला जाही.

सोरियाए रहिबे तभे बनही
सोर संदेसा सबो डाहर ले आवत जावत रइथे. रहती दुनिया तक सोर संदेश घलो रईहिच. सुखियार मनखे घलाव अपन संदेशा बर तरसथे. बने राहय चाहे बिगड़े राहय सोरियाए रहिबे ततके मा एकदिन काम के बात ला मानहिच तेकरे सेती पारा परोसी घर आना जानता साग पान के पुछई चलते राहय अउ निभाव होवत राहय.

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