छत्तीसगढ़ी विशेष - ते तपासत रहिगे रेंगइया वो डहर ले रेंगदिस

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सही केहे गेहे के ए हमर प्रकृति मा होना चाही के आस-पास के हमर वातावरण हा हमला चौबीसो घंटा कुछु न कुछु सिखातेच हावय अउ सिखोना के सेती हमला उंखर ऋण चुकाना चाही तभे दुनो डाहर मया पनपही.

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आज कल काहत-काहत कतको दिन पहाजथे तभो ले कोनो-कोनो नइ मानय. माने के बात हरय तेकरे सेती केहे सुने जाथे. चलव कोनो न कोनो दिन पतियाए के दिन घलो आही. कतको रद्दा चिन्हारी करइया हमर तीर तार मा रथें तभे तो चलन बाढ़े हे. के चिन्हे पहचाने जगा मा रचना बसना चाही. कई बेर चिन्हे पहचाने जगा मा तको कतको झन तपासे के बुता करथें अउ रेंगइया रेंग देथें अइसे हरय अउ मेहा कतको संसो करंव तेला कोन कोन बतावंय. कोनो कोनहा ना लुकाए रहिबे ते नइ बनय सबो बुता पाँच परगट होना चाही.

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आज हा आज हरय तेला कइसे जानबे
सबो दिन के सेती मेती ल कोनो नइ जानय. ते कतको तिखारत रहिजा फेर तोला कोनो अपन मन के भीतरी मा का चलत हे तेला नइ बतावंय आजेच मा सबो जनम के हिसाब ला ते कर डारबे का? नइ करे सकस तभो ले आज के महत्ता हावय अउ रईही. मनखे अपन बुता ला सिरवाएच नइ सकय काबर के आज गेहे तेन काली फेर आही अउ आजेच आज कहिके तोला तियारत रइही. कोनो तियारही ततके मा तें जान डारबे के तोर ए दुनिया मा का महत्तम हाबे. सबो दिन के राहत ले रतिहा घलो सुरतावत हे सुरताए बिना आगू के काम मा मन नइ लागय. काबर के ए संसार के रचना करइया ईश्वर के अराधना सबो मानव जाति अपन-अपन हिसाब ले करतेच आवथें.
आही तेनेच हा काल हरय


जिनगी मा सच का ए तेला जानना हे ते काली के इंतजार मा रमे रा. काली आहिच अउ ते आज मा जीयत-जागत ए नश्वर संसार ला जान डारबे. एको दिन सुरताए बर कोनो कहितिन ते सुरता लेतेंव अइसे कहइया कोनो नइये. अबर्दा के हिसाब रखइया यमराज के तीर मा कोनो जाना नइ चाहंय, सबो झन मेर एके ठन सबाल हावय मोला एक पईत बचा लेतेव गा. अरजी बिनती करत-करत रोआंसू घलो हो जथें फेर काय करबे आना हे तेन तो आहिच. सबो धरम मा ग्रंथ के निरमान करइया कोनो-कोनो जगा बिसफूटक ला मड़ा दे हावंय. उनखर जोड़ घटाना ला गुणा भाग करइया घलो कई पईत भरम मा पर जाथें तभो ले बिना सुवारथ के समाज ला चलाना हे कहिके सियानी रद्दा बताथें. चलना अउ चलाना सबो ला परथे. जीव जगत मा सबो अपन अधार मा फरत फूलत हावंय इही संसार के नियम बनाने वाला बनाके चेताथे घलो. जेन चेतगे तेखर जिनगी बनगे अउ जेन नइ चेतिन तेला तें कतको काहत रह रेंगही अपनेच मन के.

कोनो ला लहटाए रहिबे ते के दिन
रेंगाए रद्दा ला घलो देखे सुने असन जानना चाही काबर के तोला अपनेच सेती आगू के रद्दा मा चले बर परही. जाने सुने के सबो झन ला मौका मिलथे. अपन रद्दा आ अपन रद्दा जा ससन भर कमा अउ हरहिंसा रहिके ए दुनिया ला अपन यात्रा मा संघारे रा. हमरे तीर हमर जीवका के साधन हावय बस साधन ला अपनाना हमर काम होना चाही. जानसुन के घलो हमला अइसन बुता नइ करना चाही जेकर कारन हमला चार झन के सुने ला परय. चलतेच हे कहिके घलो आंखी ला झन मूंदय नइते पाछू पछतावा के आगी हा अबड़ जियानथे. जियानत बुता ला का करबे. जतका सक्ती ततका भक्ती होना चाही. सही केहे गेहे के ए हमर प्रकृति मा होना चाही के आस-पास के हमर वातावरण हा हमला चौबीसो घंटा कुछु न कुछु सिखातेच हावय अउ सिखोना के सेती हमला उंखर ऋण चुकाना चाही तभे दुनो डाहर मया पनपही. मया पिरीत हा ए संसार के साधना आवय.

सुखी राखो संसार ला
एक पईत लहुट के अपन जगा मा खड़ा होके थोकन सुरता ला घलो सुरतावन देना चाही काबर के काली घलो हमर इही तिर रहिके रद्दा के चिन्हा बनावत चलबोन अइसे कहइया सुनइया ला घलो संघारना हे. ( लेखक साहित्यकार हैं और उनके निजी विचार हैं.)
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