वाराणसी के घाटों को बचाने में एक सीजे की मुहिम

News18India
Updated: May 28, 2012, 1:36 PM IST
वाराणसी के घाटों को बचाने में एक सीजे की मुहिम
दो साल पहले हमने आपको सिटिज़न जर्नलिस्ट शांति लाल की मुहिम से रूबरू कराया था, जो वाराणसी के घाटों को बचाने में बरसों से लगे हुए हैं।
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Updated: May 28, 2012, 1:36 PM IST
वाराणसी। दो साल पहले हमने आपको सिटिज़न जर्नलिस्ट शांति लाल की मुहिम से रूबरू कराया था, जो वाराणसी के घाटों को बचाने में बरसों से लगे हुए हैं। उस वक्त अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिलाया था, लेकिन दो साल गुज़र जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं आया है।

दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक वाराणसी, गंगा के तट पर आरती के बिना इस पवित्र नगरी के दर्शन अधूरे हैं। लेकिन अब इन घाटों पर खतरा बढ़ता जा रहा है। यहां हर साल बारिश के मौसम में पानी का बहाव बढ़ता है और उसके साथ आती है मिट्टी और रेत। पानी उतरने के बाद ये मिट्टी नदी के किनारे और घाट की सीढ़ियों पर जमा होती रही है। इसे जल्द साफ़ करना बेहद जरूरी होता है, क्यों एक बार जब ये जम जाती है, तो घाट का नक़्शा ही बदल देती है। लेकिन म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को इस बात की कभी परवाह नहीं रहती।
1998 में इन्होंने एक-एक कर घाटों को साफ़ करने का बीड़ा उठाया। मिट्टी और रेत की नीचे जो निकला उसे देखकर लोग भी हैरान रह गए। इन्होंने अपने साथ कुछ लोगों को जोड़ा और 50 घाट साफ करने में कामयाब हुआ। लेकिन 2002 में इन्हें ये काम छोड़ना पड़ा क्योंकि कुछ लोगों ने इनपर ये इल्ज़ाम लगाया कि ये मिट्टी को बेचकर पैसा कमा रहे हैं।

इसके बाद नगर पालिक ने ये काम शुरू किया, लेकिन आज हालात पहले से भी खराब हैं। नगर पालिका ने ये काम ठेकेदारों को सौंपा है जो इस काम की भारी रकम लेते हैं, लेकिन मौके पर कोई काम नज़र नहीं आता। हालात ये है कि मिट्टी की मोटी परतें जमा हो गई हैं। घाटों की ये हालत देखकर इन्हें बहुत कष्ट होता है। इन्होंने नगर आयुक्त से बात की और उन्होंने फिर वही आश्सासन।

First published: May 28, 2012
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