CJ:जब दिल्ली के 3 अस्पतालों ने किया इलाज से इनकार!

News18India
Updated: September 16, 2012, 2:59 PM IST
CJ:जब दिल्ली के 3 अस्पतालों ने किया इलाज से इनकार!
इलाज हर इंसान का अधिकार है, लेकिन अफसोस आम आदमी इससे भी महरूम है। तरुण कुमार का कुछ वक्त पहले एक्सिडेंट हुआ था।
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Updated: September 16, 2012, 2:59 PM IST
नई दिल्ली। इलाज हर इंसान का अधिकार है, लेकिन अफसोस आम आदमी इससे भी महरूम है। तरुण कुमार का कुछ वक्त पहले एक्सिडेंट हुआ था। उन्होंने सीजे बनकर बताया कि कैसे दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों से उन्हें घायल अवस्था में बिना इलाज लौटा दिया गया।

तरुण कुमार बताते हैं ‘30 जुलाई की रात को मेरा एक्सिडेंट हुआ। मैं बुरी तरह घायल था, और खून लगातार बह रहा था। कुछ लोग मुझे एम्स के ट्रामा सेंटर ले गए। शाम के पांच बजे थे जब मैं ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। जांच में बताया गया कि मेरे बाएं हाथ-पैर और सिर में गंभीर चोट है। इसके बाद इलाज करने के बजाए उन्होंने हमें ये कहकर लौटा दिया कि ट्रॉमा सेंटर में कोई बेड खाली नहीं है।

तरुण के मुताबिक मुझे अस्पताल में दाखिले की जरूरत थी। लेकिन मैं और मेरी मां इस हालत में इलाज के लिए सड़कों पर धक्के खा रहे थे। देर रात हम आरएमएल अस्पताल पहुंचे। लेकिन हमें वहां से भी लौटा दिया गया। मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी। फिर हम सफदरजंग अस्पताल पहुंचे। लेकिन वहां भी इलाज ना हो सका। जब शहर के तीन बड़े अस्पतालों ने मुझे भर्ती करने से इनकार कर दिया, तो हमें इलाज के लिए एक प्राइवेट नर्सिंग होम जाना पड़ा।

तरुण ने बताया ‘मेरी मां घरों में खाना बनाती है। हमें नहीं पता हम यहां का बिल कैसे भरेंगे। मुझ जैसे आम लोगों की मदद के लिए सरकारी अस्पताल होते हैं, लेकिन वहां से हमें सिर्फ नाउम्मीदी मिली। इस मामले में सीजे के टीम ने तीनों अस्पतालों से संपर्क किया।

आरएमएल अस्पताल ने हमें इधर से उधर घुमाया, लेकिन कोई बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ। सफदरजंग अस्पताल का कहना था कि इस मामले की जांच हो रही है, लेकिन कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया गया। एम्स ट्रामा सेंटर में डॉक्टर ने अफसोस जताया कि बेड की कमी की वजह से तरुण को इतनी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जब सरकार द्वारा खोले गए अस्पतालों का ये हाल है तो आम आदमी कौन से अस्पताल में जाकर अपना इलाज कराएगा। तरुण जैसे लोग आए दिन ऐसी परेशानी से रूबरू होते है।







First published: September 16, 2012
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