लखनऊ:CMO मर्डर में इस्तेमाल हुआ एक तरह का हथियार

डॉ. विनोद आर्या और डॉ. बीपी सिंह की हत्या में एक शूटर ने एक ही बोर 7.65 बोर के पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

डॉ. विनोद आर्या और डॉ. बीपी सिंह की हत्या में एक शूटर ने एक ही बोर 7.65 बोर के पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

  • Share this:
    लखनऊ। सीएमओ हत्याकांड में पुलिस का कहना है कि हत्याकांड में शामिल ज्यादातर अपराधी बिल्कुल नए हैं। इस हत्याकांड में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। हथियारों की बरामदगी के बाद पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पता लगाया है जिसके ज्यादातर अपराधी बिल्कुल नए हैं।

    लखनऊ के दो सीएमओ की हत्या मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक इस हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए हथियारों से एक गुमनाम गिरोह का खुलासा हुआ है। नए अपराधियों का ऐसा गिरोह जो भाड़े पर कत्ल को अंजाम तक पहुंचाते हैं। दरअसल डॉ. विनोद आर्या और डॉ. बीपी सिंह की हत्या में एक शूटर ने एक ही बोर 7.65 बोर के पिस्टल का इस्तेमाल किया था। हत्यारों का कोई सुराग ना मिलने से परेशान पुलिस ने अपनी जांच उल्टी दिशा से शुरू की। यानी पहले असलहे का पता किया जाए फिर अपराधी का।

    पुलिस को खबर लगी कि गोरखपुर के एक नए गिरोह के पास 7.65 बोर की पिस्टलें हैं लिहाजा गिरोह दबोच लिया गया। प्रदेश के डीजीपी कर्मवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर से शचीन्द्र सिंह तीन लोगों को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। शचीन्द्र की निशानदेही पर लखनऊ के गोमती नगर से 7.65 एमएम के दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए। शचीन्द्र सिंह ने पूछताछ में बताया कि इसके ग्रुप में अनिमेष लाला, आशुतोष शुक्ला, तवरेज, संजय सिंह उर्फ पिन्टू तथा वरूण सिंह उर्फ गोबारी हैं। जो कुख्यात अपराधी बताये जाते हैं।

    पुलिस को अब सुधाकर पाण्डेय नाम के शूटर की तलाश है। सुधाकर पांडे पर एक लाख का इनाम है। इसे शूटरों का सरगना भी माना जाता है।

    डॉक्टर विनोद आर्या की हत्या के बाद डॉक्टर बीपी सिंह की हत्या में भी इसका नाम सामने आया है। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक इस गैंग में कई नए चेहरे शामिल हैं। ताकि कत्ल तो हो लेकिन पुलिस रिकार्ड में उनकी पहचान कतई न हो।

    डीजीपी ने बताया कि शचीन्द्र से पूछताछ से यह भी पता चला कि मार्च के दूसरे सप्ताह के अन्त में सुधाकर पाण्डेय गोरखपुर, अनिमेष लाला के पास आया था और लखनऊ में किसी बड़ी वारदात को अन्जाम देने के लिए आधुनिक हथियारों की व्यवस्था करने के लिए कहा था। उसने बताया कि आशुतोष शुक्ला ने मुझें 7.65 एमएम के दो पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराये थे। उसने आगे बताया कि सुधाकर पाण्डेय से उन लोंगों के सम्बन्ध काफी पुराने हैं। गोरखपुर में सुधाकर पाण्डेय काफी लम्बे समय से रहा है।

    डॉ. बीपी सिंह की हत्या हुए एक महीने बीत चुके हैं। पुलिस तमाम बड़े गिरोहों पर हाथ डाल चुकी है लेकिन हत्यारों का पता नहीं चला। अब इस नए गिरोह के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि दोनों अधिकारियों का कत्ल भाड़े पर कराया गया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो भाड़े के इन हत्यारों के सत्ता पक्ष के एक विधायक से गहरे संबंध हैं। फिलहाल पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। यानी बोर नंबर 7.65 ही खोलेगा दो कत्ल और हत्यारों का असली चेहरा।

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.