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डकैतों से कम पुलिस से ज्यादा परेशान हैं वनवासी!

डकैतों से कम पुलिस से ज्यादा परेशान हैं वनवासी!

बुंदेलखंड में मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे बांदा जनपद के फतेहगंज के जंगली इलाके के गांवों में बसे वनवासी डकैतों से कम स्थानीय पुलिस से ज्यादा हलकान हैं।

बुंदेलखंड में मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे बांदा जनपद के फतेहगंज के जंगली इलाके के गांवों में बसे वनवासी डकैतों से कम स्थानीय पुलिस से ज्यादा हलकान हैं।

बुंदेलखंड में मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे बांदा जनपद के फतेहगंज के जंगली इलाके के गांवों में बसे वनवासी डकैतों से कम स्थानीय पुलिस से ज्यादा हलकान हैं।

    बांदा। बुंदेलखंड में मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे बांदा जनपद के फतेहगंज के जंगली इलाके के गांवों में बसे वनवासी डकैतों से कम स्थानीय पुलिस से ज्यादा हलकान हैं। पुलिस हिरासत से भागे हुए एक दर्जन डकैतों की टोह में निकली पुलिस पर वनवासियों ने उत्पीड़न का आरोप मढ़ा है। वहीं पुलिस का कहना है कि 'वनवासी बदमाशों को पनाह देते हैं।

    उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के चित्रकूट और बांदा के जंगली इलाके के पाठा क्षेत्र को मिनी चम्बल के नाम से जाना जाता है। यह जंगल ददुआ, ठोकिया व नान केवट जैसे कई खूंखार डकैतों का सुरक्षित शरणस्थल रहा है।

    मध्य प्रदेश की सरहद से लगे इस जंगल में डकैतों को खोज पाना पुलिस के लिए हमेशा से ही टेढ़ी खीर रहा है। पुलिस अपनी किरकिरी से बचने के लिए जंगली गांवों में आबाद वनवासियों को निशाना बनाती रही है। कई वनवासी भी पुलिस उत्पीड़न से त्रस्त होकर बगावत पर उतर चुके हैं। इनमें गोंड बिरादरी की महिला डकैत चुन्नी उर्फ बिजली सबसे खतरनाक साबित हुई थी, यह महिला डकैत तब बनी, जब पुलिस ने उसके भाई कल्लू गोंड को इनामी बदमाश बताकर कथित मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था।

    आठ अगस्त को चित्रकूट अदालत की पेशी से वापस आते समय पुलिस हिरासत से भागे एक दर्जन डकैतों के कोल्हुआ व मड़फा के जंगल में छिपे होने की सूचना के बीच एक बार फिर से पुलिस की काम्बिंग इन जंगलों में तेज हो गई और वनवासी पुलिस पर दस्यु संरक्षण के नाम पर अपना उत्पीड़न करने के आरोप लगाने लगे हैं।

    बोदा गांव के रहने वाले वनवासी बोधन खैरगर का आरोप है कि पुलिस ने भागे डकैतों को खोजने के बहाने उसके घर-गृहस्थी का पूरा सामान नष्ट कर दिया है। वह बताता है कि रात में जंगल से निकल कर डकैत आते हैं और बाल-बच्चों के लिए बना खाना खाकर चले जाते हैं। तड़के पुलिस आती है और खाना खिलाने के आरोप में महिलाओं तक की बेइज्जती करती है।

    इसी गांव के रहने वाले पंचू खैरगर व राजाराम बताते हैं कि पुलिस ने डकैतों की खोज में उनके घरों की तलाशी ली, डकैत तो नहीं ढूंढ़ पाए, मगर उनके घरों से मोबाइल फोन, छाता और टार्च यह कह कर ले गए कि यह डकैतों के हैं।

    गोंड़ी बाबा पुरवा का रहने वाला वनवासी युवक गुलाब ने बताया कि रात को जब बदमाश आते हैं तब पुलिस को चुपचाप फोन के जरिए सूचना दी जाती है तो पुलिस कहती है कि किसी अधिकारी को न बताना, वहीं पुलिस सबेरे आकर सूचना देने वाले का यह कह कर उत्पीड़न करती है कि बदमाशों ने रात में उसके घर खाना खाया है।

    थानाध्यक्ष फतेहगंज राकेश उपाध्याय का कहना है कि कुछ वनवासी मजबूरीवश और कुछ शौकिया डकैतों को भोजन व पनाह देते हैं। वनवासियों को सिर्फ डकैतों से मेलजोल न करने की सलाह दी गई है, जिसे वह उत्पीड़न बता रहे हैं।

    पुलिस ने बताया कि अभी हाल ही में डकैत रामसिंह पटेल के रिश्तेदार रामस्वरूप उर्फ बड़कौना को डकैतों को भोजन सामाग्री ले जाते समय जंगल से गिरफ्तार किया गया है, उसके ऊपर चित्रकूट पुलिस ने पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।

    Tags: Police

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