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इमारत गिरी-61 मरे,पर गुनहगार कौन नहीं पता!

इमारत गिरी-61 मरे,पर गुनहगार कौन नहीं पता!

अभी तक ना तो प्रशासन और ना ही सरकार के पास इस बात का कोई जवाब है कि आखिर असली गुनहगार कौन है।

  • News18India
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    मुंबई। मुंबई की बाबू गेनु इमारत शुक्रवार को ढही और मलबे में दबकर 61 लोग मर गए। लेकिन कार्रवाई के नाम पर बीएमसी सात अफसरों को निलंबित कर खानापूर्ति करती नजर आ रही है। अभी तक ना तो प्रशासन और ना ही सरकार के पास इस बात का कोई जवाब है कि आखिर असली गुनहगार कौन है।

    आईबीएन7 लगातार बीएमसी के अफसरों की लापरवाही से रूबरू करवा रहा है। नवंबर, 2012 में बीएमसी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में इस इमारत की फौरन मरम्मत और इसे खाली कराने की सिफारिश की थी। लेकिन जून, 2013 में पीएंडडी विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में इस इमारत में सिर्फ मरम्मत की जरूरत बताई। इसी विभाग के पास इस इमारत को खाली कराने, उसे गिराने या उसकी मरम्मत का काम होता है।

    आईबीएन7 की तफ्तीश में पता चला है कि निलंबित हुए और जांच के दायरे में आए मेंटनेंस विभाग के अधिकारियों ने 2012 में ये दावा भी किया था कि उन्होंने इस इमारत की मरम्मत की है। लेकिन इलाके के पूर्व पार्षद का दावा है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था।

    सूत्रों की मानें तो अब तक की जांच में ये सामने आया है कि इस वार्ड के बीएमसी अधिकारी ये अच्छी तरह जानते थे कि इस इमारत में अवैध निर्माण हो रहा है। इमारत ढहने के एक हफ्ते पहले ही बीएमसी के एक निलंबित अफसर ने इमारत का जायजा लिया था। आरोप है कि अफसरों को ये पता था कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर अवैध निर्माण हुआ है। उन्हें ये भी पता था कि ग्राउंड फ्लोर में अवैध निर्माण के लिए सेंटर पिलर को हटाया गया है। लेकिन हैरत है सारे अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    बीएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष राहुल शेवाले कहते हैं कि दो एडीशनल कमिश्नर की टीम जांच के लिए नियुक्त की गई है। हमने 7 अधिकारियों के सस्पेंड कर दिया है, और बाकी लोगों के खिलाफ भी जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    सवाल ये है कि आखिर 61 लोगों की जान लेने वाली इस लापरवाही में कोई अफसर जेल जाएगा। अभी तक पुलिस ने सिर्फ एक ही एफआईआर दर्ज की है। आईबीएन7 ने इलाके के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस कृष्ण प्रकाश से बात करने की कोशिश की। उन्होंने फोन पर बाकियों पर भी कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। सवाल ये है कि आखिर अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों। हमने कई पार्टियों के स्थानीय नेताओं से भी इस बारे में बात करने की कोशिश की। लेकिन कोई भी कैमरे पर नहीं आया।

    राजनेताओं की मिलीभगत के बिना सरकारी बाबुओं का इतनी बड़ी लापरवाही करना मुमकिन ही नहीं है, और शायद यही वजह है कि दोषी अधिकारियों की गिरफ्तारियों के मुद्दे पर किसी भी पार्टी का कोई भी नेता खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। वे बात करेंगे भी तो कैसे, क्योंकि वो जानते हैं कि 61 बेगुनाह लोगों के लिए जिम्मेदार लोगों की लंबी सूची में अधिकारियों का साथ-साथ उनके नाम का भी शुमार है।

    Tags: Mumbai, Mumbai police

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