• Home
  • »
  • News
  • »
  • city-khabrain
  • »
  • असम में 12 साल बाद दिखे साइबेरियाई बाज

असम में 12 साल बाद दिखे साइबेरियाई बाज

साइबेरिया और उत्तरी चीन में पाए जाने वाले इन बाजों के एशिया से अफ्रीका तक के सफर का सही-सही रास्ता अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

साइबेरिया और उत्तरी चीन में पाए जाने वाले इन बाजों के एशिया से अफ्रीका तक के सफर का सही-सही रास्ता अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

साइबेरिया और उत्तरी चीन में पाए जाने वाले इन बाजों के एशिया से अफ्रीका तक के सफर का सही-सही रास्ता अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

  • Share this:
    गुवाहाटी। असम के मोरेगांव जिले में 12 साल के अंतराल के बाद प्रवासी साइबेरियाई बाज देखे गए हैं। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ग्रीन गार्ड नेचर ऑर्गेनाइजेशन (जीजीएनओ) ने बताया कि अमूर बाज के नाम से जाने जाने वाले हल्के नीले रंग के ये बेहद खूबसूरत पक्षी जिले के बोरेगांव, बोरबोरी और नेल्ली इलाकों में बिजली तारों पर बैठे या उड़ते हुए देखे गए हैं।

    हर साल ठंड के मौसम में लगभग तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवास के लिए एशिया से दक्षिणी अफ्रीका जाते समय कुछ सप्ताह के लिए ये भारत और बंगलादेश में ठहरते हैं। आम तौर पर ये असम के पड़ोसी राज्य नागालैंड को अपने अल्प प्रवास का ठिकाना बनाते हैं। नागालैंड के दोयांग जिले में ये हजारों की संख्या में आते हैं। पिछले साल यहां लगभग सवा लाख अमूर बाजों को मांस के लिए मार दिया गया था।

    साइबेरिया और उत्तरी चीन में पाए जाने वाले इन बाजों के एशिया से अफ्रीका तक के सफर का सही-सही रास्ता अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। माना जाता है कि ये बेहद मेहनती होते हैं और दिन-रात उड़ते हुए समुद्र पार कर भारत, बंगलादेश के बाद सीधे दक्षिणी अफ्रीका में नजर आते हैं। गर्मी आने पर अप्रैल-मई के महीने में ये वापस एशिया लौट जाते हैं। लेकिन वापसी के समय ये भारत, बंगालादेश की बजाय अरब होकर जाते हैं।

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज