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निर्भया कांड पर विशेष: बेबसी के ये दो साल…

निर्भया कांड पर विशेष: बेबसी के ये दो साल…

निर्भया गैंगरेप हत्याकांड के दो साल बीत गए हैं। इन दो सालों में बहुत कुछ बदला भी और नहीं भी। इन दो सालों में सरकारें बदल गईं, कानून बदल गए।

निर्भया गैंगरेप हत्याकांड के दो साल बीत गए हैं। इन दो सालों में बहुत कुछ बदला भी और नहीं भी। इन दो सालों में सरकारें बदल गईं, कानून बदल गए।

निर्भया गैंगरेप हत्याकांड के दो साल बीत गए हैं। इन दो सालों में बहुत कुछ बदला भी और नहीं भी। इन दो सालों में सरकारें बदल गईं, कानून बदल गए।

    IBNkhabar Exclusive
    नई दिल्ली से। निर्भया गैंगरेप हत्याकांड के दो साल बीत गए हैं। इन दो सालों में बहुत कुछ बदला भी और नहीं भी। इन दो सालों में सरकारें बदल गईं, कानून बदल गए, अपराधियों के चेहरे भी बदल गए। लेकिन जो कुछ नहीं बदला, वो है अन्याय, अत्याचार और प्रशासन का ढीला रवैया। इन सब पहलुओं पर हम दो सौ साल पहले भी पीड़ित थे, दो साल पहले भी पीड़ित थे और आज भी पीड़ित हैं। इंसानियत कल भी दम तोड़ रही थी, आज भी दम तोड़ ही रही है।

    दो साल पहले देश-दुनिया को हिला देने वाला निर्भया गैंगरेप-हत्याकांड हुआ। लोग उठ खड़े हुए। पुलिस-प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। प्रशासन समझ नहीं पा रहा था, कि आखिर वो क्या करे। निर्भया गैंगरेप हत्याकांड को लेकर प्रशासन हर तरफ से उलझ गया था। पुलिस अपराधियों को पकड़ने में जुट गई थी। उसने एक एक कोना छान मारा और असली अपराधियों को पकड़ा भी। लेकिन ये सब बेहद गोपनीय तरीके से किया गया। इधर पुलिस अपना पूरा जोर लगाए हुए थी, तो दूसरी ओर लोगों का गुस्सा उफान पर था। आम लोगों ने बिना किसी की अगुवाई के सरकार को हिला दिया।

    सरकार पहली बार ऐसी असमंजस की स्थिति में थी कि वो कुछ तय नहीं कर पा रही थी। सरकार को पहली बार ये नहीं पता था कि किससे ‘डील’ करनी है। इस बीच लोगों का गुस्सा बढ़ा तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन के सामने ही डेरा डाल दिया। एक शाम भगाया गया, तो दूसरी शाम लोग हिसाब मांगने फिर से आ गए। मगर अफसोस कि उस समय केंद्र मामले की गंभीरता का आंकलन करने में असमर्थ नजर आ रहा था।

    आंदोलनकारियों ने सरकार से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बात करनी चाही, तो सत्ताधारियों ने आंदोलनकारियों से निपटने के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी। नतीजा लोगों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन से निपटा गया। क्योंकि लोग तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से बात करना चाहते थे, और वो आम लोगों से मिलना नहीं चाहते थे। नतीजा लोगों के गुस्से के रूप में सामने आया। लोगों ने लाठियां झेली, सर्द मौसम में वॉटर कैनन झेला। दौड़ा-दौड़ा कर लोग पीटे गए। इसमें लड़के भी थे, और लड़कियां भी। बुजुर्ग के साथ महिलाएं भी थी। लोगों ने मार खाई, और वो फिर से प्रदर्शन पर बैठ गए।

    सरकार को निर्भया गैंगरेप केस के बाद लोगों के गुस्से को देखते हुए तमाम योजनाओं की घोषणा करनी पड़ी। सरकार ने उस समय लोगों से रेप-क्राइसिस मामलों को लेकर फास्ट-ट्रैक कोर्ट, सरकारी नौकरी, पुनर्वास जैसी योजनाएं गिना दी। लेकिन इस मामले में अबतक कुछ नहीं हुआ। निर्भया के नाम जारी 1000 करोड़ रुपए भी सरकार ने बजट में दिए। वो कहां गए, अब किसी को नहीं पता।

    इन सबके बीच वो परिवार अब भी सिसक रहा है अपने घर में। वो परिवार अब हर दिन सिसक रहा है अपनी प्यारी सी बिटिया की याद में। वो परिवार अब भी न्याय की बाट जोह रहा है, उसी न्याय की। जिसे निचली अदालत ने फास्ट ट्रैक कोर्ट रूपी मंदिर में सुना तो दिया, लेकिन ऊपरी अदालत ने उसपर रोक लगा दी। हालत ये है कि वो परिवार अब खुद से पूरे मामले को लड़ रहा है। कोर्ट में पेशी की तारीखें देख रहा है। अब अगर इन्हें कुछ याद आता है, तो सिर्फ अपनी बिटिया की याद। उसकी याद में आंसुओं का सैलाब.. और इस सबके बीच वो जी रहे हैं। ये सोचकर, कि एक न एक दिन उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन न्याय कब मिलेगा ? ये किसी को नहीं मालूम.....।

    Tags: Delhi, Delhi gangrape

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