इलाहाबाद: माघ मेले में स्नान शुरू, सुरक्षा कड़ी

माघ मेले में ज्यादातर लोग स्नान और पूजा-पाठ में शामिल होने पहुंचते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने यहीं पर महीने भर के लिए डेरा डाल लिया है।

  • News18India
  • Last Updated: January 5, 2015, 4:28 AM IST
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इलाहाबाद। संगम नगरी इलाहाबाद में आज से माघ मेले की शुरुआत हो गई है। माघ मेले में ज्यादातर लोग स्नान और पूजा-पाठ में शामिल होने पहुंचते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने यहीं पर महीने भर के लिए डेरा डाल लिया है। ये लोग संगम किनारे कल्पवास करते हैं। कल्पवास के दौरान लोग रोजमर्रा की भागदौड़ से वक्त निकालकर यहां शांति का जीवन बिताते हैं। इस दौरान उन्हें काम, क्रोध, मोह, माया से दूर रहने का संकल्प लेना होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक कल्पवास करने वाले शख्स को ब्रह्मा की तपस्या करने के बराबर फल मिलता है।

माघ मेले की छोटी-छोटी कुटियों में एक अलग ही दुनिया बसती है। अलग-अलग जगहों से आकर लोग यहां एक परिवार की तरह रहते हैं और सबका मकसद एक है। शांति की तलाश एक महीने के लिए देश के अलग-अलग कोने से आए लोग मोक्ष की उम्मीद के साथ कल्पवास करते हैं। कल्पवास के दौरान एक महीने तक लोग भक्ति में लिप्त रहते हैं। पूरा महीना कल्पवासी साधारण जीवन जीते हैं। गंगा में हर रोज आस्था की डुबकी लगाते हैं। एक दिन में तीन बार स्नान करते हैं भक्त 24 घंटे में एक ही बार भोजन करते हैं।

कल्पवास में उन्हे काम, क्रोध, मोह, माया से दूर रहने का संकल्प लेना होता है। कल्पवासियों के लिए ये एक महीना बेहद अहम है। क्योंकि इसके बाद उन्हें एक बार फिर सांसारिक कामों में लग जाना है। इसलिए ध्यान, दान और पुण्य कमाने के इस मौके को हर तरीके से आत्मसात करने में जुटे हैं। माघ मेला परिसर की निगरानी के लिए तीन दर्जन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनके अलावा ड्रोन के जरिए भी निगरानी की योजना है। यही नहीं जल पुलिस भी बोट के जरिए संगम में तैनात होगी।




मेला एरिया पर सुरक्षाकर्मियों की कड़ी नजर होगी। मेला एरिया में 26 हाई रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस ने शहर में भी मेला के मद्देजेर CCTV कैमरे लगाए हैं। मेला क्षेत्र में बकायदा हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है। ड्रोन से मेले की निगरानी का प्लान तो है लेकिन बजट देर से पास होने की वजह से ये अबतक सुरक्षा बलों के पास आया नहीं है। 14 जनवरी से इसके इस्तेमाल का प्लान है। ड्रोन का सीधा लिंक कंट्रोल रूम से होगा। इसके जल पुलिस पानी से निगरानी करेगी। कई बोट गंगा-यमुना में लगातार घूमते रहेंगे ।
सैकड़ों सालों से हर साल माघ मेले का आयोजन होता आया है, लेकिन वक्त के साथ सुरक्षा की चुनौतियां भी बड़ी हुई हैं। सुरक्षा तब तक पुख्ता नहीं होती जब तक खुफिया सूचनाओं, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल ना हो। इस पूरे मेला क्षेत्र में यही तालमेल एक दीवार का काम करती है। इस दीवार में आज तक कोई सेंध नहीं लगी है। अब जबकि तमाम तरह के आतंकी एलर्ट हैं तो इस दीवार को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

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