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विश्व पुस्तक मेला: ज्ञान में तकनीकी का समावेश

विश्व पुस्तक मेला: ज्ञान में तकनीकी का समावेश

मेला है भाई किताबों का, लेकिन कुछ अलग चाहते हैं तो भी आपके लिए बहुत कुछ है। ई-लर्निंग, ई-प्रिंटिंग, 3डी प्रिंटिंग, ई-क्लासेज।

मेला है भाई किताबों का, लेकिन कुछ अलग चाहते हैं तो भी आपके लिए बहुत कुछ है। ई-लर्निंग, ई-प्रिंटिंग, 3डी प्रिंटिंग, ई-क्लासेज।

मेला है भाई किताबों का, लेकिन कुछ अलग चाहते हैं तो भी आपके लिए बहुत कुछ है। ई-लर्निंग, ई-प्रिंटिंग, 3डी प्रिंटिंग, ई-क्लासेज।

    श्रवण शुक्ल, नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 23वें विश्व पुस्तक मेले से।

    नई दिल्ली। मेला है भाई किताबों का, लेकिन कुछ अलग चाहते हैं तो भी आपके लिए बहुत कुछ है। ई-लर्निंग, ई-प्रिंटिंग, 3डी प्रिंटिंग, ई-क्लासेज। बच्चों को सिखाने की नई तकनीकें। शैक्षिक पुस्तकों के साथ ही बेहतर तरीके से शैक्षिक कार्य। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हॉल नंबर 1 में तमाम ऐसी कंपनियों के स्टॉल हैं, जो न सिर्फ शैक्षिक किताबें मुहैया करा रहे हैं, बल्कि देश में शिक्षण पद्धति में भी क्रांतिकारी बदलाव की ओर अग्रसर हैं। ऐसे ही प्रकाशकों में से एक है एमबीडी प्रकाशन। एमबीडी प्रकाशन पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की शैक्षिक किताबों का प्रकाशन करता है, जो देश के तमाम राज्यों में जाना माना नाम है। लेकिन हम यहां चर्चा कर रहे हैं शिक्षा में तकनीकी के समावेश की।

    शिक्षा में तकनीकी को लाने की दिशा में हॉल नंबर 1 के स्टॉल नंबर 1 से 30 तक पहुंच जाएं। भव्य स्टॉलों को देखकर मन मोह सकता है और जब अंदर जाते हैं, तो रूबरू होते हैं शिक्षण क्षेत्र की ऐसी तकनीकों से, जिनके बारे में खासकर भारत देश के लोगों ने सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में ही जाना होता है। ऐसी ही तकनीकों में 3डी प्रिंटिंग बेहद खास है। एमबीडी ग्रुप के अलावा भी तमाम बड़े प्रकाशक इस ओर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन यहां मिली मशीनें बेहद अलग नजर आईं। दिखने में छोटी सी प्रिंटिंग मशीन। मटेरियल के तौर पर प्लास्टिक के बने तार। सोच आपकी, और पलक झपकते ही आपके सामने आपकी सोची हुई आकृति। मसलन आप अगर चूहे के सिर के अंदरूनी हिस्सों पर शोध कर रहे हैं, और उसका पूरा डायाग्राम आपके पास महज डिजाइन में है, तो आप इस खास मशीन के माध्यम से प्लास्टिक से बना चूहे या बिल्ली जिसका भी चाहे, उसका दिमाग पा सकते हैं। यकीनन ये हैरतअंगेज तो है ही, साथ ही बड़ा मजेदार भी। इसके प्रिंटिंग मटेरियल को पीएलए-एबीएस जैसा कुछ कहते हैं, अब ये क्या है, इस बारे में विशेषज्ञ ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं।

    इस तकनीक के माध्यम से लाइन मॉडल्स बनाने बेहद आसान हो गए हैं। ये सिर्फ शिक्षा में ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मॉडलों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं। मतलब अगर आप भवन निर्माता हैं, और अबतक सिर्फ कागजों पर ही भवनों का मॉडल बनाते रहे हैं, तो इस तकनीक के प्रयोग से आप अपने भवन का जीता-जागता मॉडल बना सकते हैं। बात दाम की करें, तो कंपनी का दावा है कि कीमतें आम-खास सबकी पकड़ के अंदर ही हैं।

    बात अगर ई-लर्निंग की करें, तो एमबीडी ग्रुप इसमें भी अन्य कंपनियों से आगे निकलती दिख रही है। आप ई-बुक में अगर सिर्फ तस्वीरों और शब्दों को ही डाल समझ रहे हैं, तो ई-लर्निंग से पूरी तरह आपका पाला नहीं पड़ा। एमबीडी ग्रुप की इन पेशकश में न सिर्फ आप बेहतर किताबें पढ़ सकते हैं, बल्कि उनमें बने ग्राफिक्स पर क्लिक करते ही आपके सामने वीडियो आ जाएगा। जो किसी भी पढ़ाई को न सिर्फ शब्द बल्कि दृष्य माध्यम में भी आसान बना देगा। है न कमाल की चीज?

    ऐसी ही कोशिश में नेत्र एप को विकसित किया गया। इस एप के माध्यम से आप एमबीडी ग्रुप की किताबों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। इन किताबों में एक खास प्रकार का लोगो बना होता है। जो किसी भी चित्र के ऊपर होता है। इसे एप के माध्यम से एक्सेस करते ही उस तस्वीर का पूरा डायाग्राम आपके मोबाइल पर आ जाता है, जिसके माध्यम से आप बेहतर तरीके से हर उस बड़ी बात को समझ सकते हैं, जो अमूमन शिक्षकों को भी समझाने में परेशानी आती है। एमबीडी ग्रुप न सिर्फ भारतीय भाषाओं और भारतीय शैक्षिक परिक्षेत्र में काम करता है, बल्कि अफ्रीकी देशों में भी इसका अलग नेटवर्क है। तमाम किताबों, सीडी, ई-बुक्स, ई-प्रिंटिंग, 3डी प्रिंटिंग से लेकर और भी तमाम खास बाते हैं, जिन्हें आप स्टॉल पर जाकर पता कर सकते हैं।

    Tags: Pragati maidan

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