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मुगल गॉर्डन: बसंत ऋतु में मानों धरती का स्वर्ग

मुगल गॉर्डन: बसंत ऋतु में मानों धरती का स्वर्ग

 दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है। मतलब कश्मीर में हैं। लेकिन ठहरिए जनाब। इसके अलावा भी स्वर्ग है। कश्मीर सरीखा ही ट्यूलिप के फूलों से सजा।

दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है। मतलब कश्मीर में हैं। लेकिन ठहरिए जनाब। इसके अलावा भी स्वर्ग है। कश्मीर सरीखा ही ट्यूलिप के फूलों से सजा।

दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है। मतलब कश्मीर में हैं। लेकिन ठहरिए जनाब। इसके अलावा भी स्वर्ग है। कश्मीर सरीखा ही ट्यूलिप के फूलों से सजा।

    श्रवण शुक्ल, राष्ट्रपति भवन के पिछले भाग में बसे सर्वश्रेष्ठ फूलों के संगम से।
    नई दिल्ली। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है। मतलब कश्मीर में हैं। लेकिन ठहरिए जनाब। इसके अलावा भी स्वर्ग है। कश्मीर सरीखा ही ट्यूलिप के फूलों से सजा। वो है दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक भारत देश के राष्ट्रपति निवास के मुगल गॉर्डन में। जी हां! बसंत माह में मुगल गॉर्डन यकीनन स्वर्ग सरीखा है।

    यहां न सिर्फ दुनिया के तमाम किस्मों के फूल मिलेंगे, बल्कि नजारे ऐसे कि लोग भौचक्क रह जाएं। इस खूबसूरती का आलम ये है कि इसे विशेष तौर पर जनता के लिए बसंत ऋतु के माह में खोला जाता है। और इतने लोग जुटते हैं कि पूछिए मत। दिल तो चाहता है कि यहीं स्वर्ग में रहें, लेकिन सुरक्षा के इंतजामात ऐसे, जैसे इंद्रदेव की नगरी हो। हां, ये खास जगह बनाई कुछ उसी अंदाज में गई थी, जहां भारत का वायसराय अपनी बेगम के साथ रहता था। लेकिन आजादी के बाद से वायसराय भवन जब राष्ट्रपति भवन के तौर पर जाना गया तो पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इस बाग को आम लोगों के हवाले कर दिया।

    मुगल गॉर्डन में फूलों की ऐसी प्रजातियां हैं, जो दूर देशों में कहीं-कहीं, कभी-कभी ही मिलती है। मदर टेरेसा, अर्जुन, राजा राम मोहन राय, जवाहर, जॉन एफ. कैनेडी, क्वीन एलिजाबेथ से मिलना हो तो मिल सकते हैं। लेकिन कुदरत की बनाई सबसे खास चीज फूलों की शक्ल में। मुगल गॉर्डन जाने पर लगता है, मानों पूरी कायनात उतर आई हो। मुगल गॉर्डन में न सिर्फ फूल, बल्कि आध्यात्मिक फूलों और पौधों की 40 प्रजातियां भी हैं। जी हां। सही पढ़ा आपने, आध्यात्मिक फूल। जो अलग अलग धर्मों में पवित्र माने गए हैं।

    यहां इस बार 10,000 ट्यूलिप के फूल लगाए गए हैं। जोकि अबतक के किसी भी साल से दोगुना है। गुलाबों की यहां पर 120 प्रजातियां हैं, जिनमें हरा गुलाब भी है। वहीं, 70 से ज्यादा मौसमी फूलों की फुलवारियां देख चहचहा उठेंगे आप। यही नहीं, अगर गुलाब और ट्यूलिप हैं, तो 33 सुगंधित या औषधीय फूलों के पौधे भी हैं। आप यहां लौंग के पेड़ देख सकते हैं, तो दश्मिक गुलाबों का भी दीदार कर सकते हैं। यहां बोंसाई पौधों के उद्यान हैं, तो नागफनी की बगिया भी आपका मन मोह लेगी।

    यही नहीं, यहां संगीतमय फौव्वारे भी लगे हैं। जो वंदे मातरम और शहनाई की धुनों पर चलते हैं। यकीनन आप इन 12 फौव्वारों के पास पहुंचकर दुनिया की सारी तकलीफें फूल थिरकने को मजबूर हो जाएंगे। यहां जल प्रपात भी है, जो कमल और कुमुद से भरा है। एक बार तो सबकुछ देखने के बाद यकीन ही नहीं आता कि कैसे सबकुछ एक जगह पर आ सकता है। आप ट्यूलिप के फूलों के बीच पहुंचेंगे तो लगेगा कश्मीर में हैं। नक्षत्र उद्यान(राशियों से संबंधित पौधों के बीच) पहुंचेंगे तो लगेगा आप अध्यात्मिक उचांइयों तक पहुंच गए हैं। आप खुद के बारे में तमाम भविष्यवाणियां करने लग जाएंगे। ये उद्यान 2006 में बनकर तैयार हुआ, जिसमें 27 तरह के पौधे हैं।

    राष्ट्रपति भवन अगर भवनों में सर्वश्रेष्ठ है, तो करीब 15 एकड़ में फैला मुगल गॉर्डन दुनिया का अनूठा उद्यान है। क्या आप जानते हैं कि भारत के कई राष्ट्रपतियों ने अपनी मर्जी के मुताबिक मुगलत गॉर्डन में कुछ नए प्रयोग किए? अगर नहीं तो हम ये भी आपको बताते हैं। पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन जनता के लिए खोलकर इसे सबसे बड़े बदलाव का रूप दिया तो डॉ जाकिर हुसैन ने देश-दुनिया के गुलाबों को यहां लगवाया।

    हुसैन के बाद ज्ञानी जैल सिंह बागवानी को लेकर खासे सक्रिय थे। हर दिन घंटों मुगल गॉर्डन में बिताते थे। खास डेरा(डेलिया) बनवाकर वहीं बैठे रहते थे। गुरुबानी का पाठ भी सुनते थे। वहीं, डॉ फखरुद्दीन अली अहमद की बेगम साहिबा ने फूलों को सवांरने में खासी रूचि ली। डॉ शंकर दयाल शर्मा ने खुशबूदार भारतीय फूलों को वरीयता दी, जिनमें चंपा, चमेली, हरसिंगार जैसे फूल हैं। वहीं, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी ने बोंसाई के पेड़ों को देखते हुए 5 साल गुजार दिए। वो इस पेड़ों के नीचे खुद में उर्जा पाते थे। कलाम साहब की कोशिश थी, कि इस बगिया का हर कोना महकता रहे।

    मुगल गॉर्डन हर बसंत ऋतु में आम लोगों के लिए खुलता है। फरवरी मध्य से मार्च मध्य तक। इसी समय ट्यूलिप के फूल अपने शबाब पर होते हैं, जो लोगों का मन मोह लेते हैं। इस साल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पहले मुगल गॉर्डन का जायजा लिया, फिर लोगों को आमंत्रित किया। मुगल गॉर्डन हर सोमवार को बंद रहता है, ताकि साफ सफाई हो सके और मुरझाए फूलों को हटाया जा सके।

    कैसे पहुंचें: राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 35 से मुगल गॉर्डन में इंट्री कर सकते हैं, जो नॉर्थ ब्लॉक के साथ है। यहां पहुंचने के लिए आप दिल्ली मेट्रो की सहायता ले सकते हैं। इसके लिए नजदीकी मेट्रो स्टेशन केंद्रीय सचिवालय है। हालांकि थोड़ा बहुत पैदल चलना पड़ सकता है या फिर ऑटो पर भी थोड़े पैसे खर्च किए जा सकते हैं। तो फिर इस बसंत ऋतु में आप भी पहुंचे धरती के इस 15 एकड़ में फैले स्वर्ग में। यकीन मानिए, मुगल गॉर्डन का रोमांच आप पूरी जिंदगी भूल नहीं पाएंगे।

    Tags: Delhi, New Delhi

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