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पढ़ें: महिला कैब ड्राइवर सरिता की 'डर पर जीत'

पढ़ें: महिला कैब ड्राइवर सरिता की 'डर पर जीत'

महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली की स्थिति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। उबेर रेप केस के बाद तो रेडियो टैक्सी को भी महिलाओं के लिए सुरक्षा की गारंटी मानने का भ्रम टूट चुका है।

महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली की स्थिति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। उबेर रेप केस के बाद तो रेडियो टैक्सी को भी महिलाओं के लिए सुरक्षा की गारंटी मानने का भ्रम टूट चुका है।

महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली की स्थिति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। उबेर रेप केस के बाद तो रेडियो टैक्सी को भी महिलाओं के लिए सुरक्षा की गारंटी मानने का भ्रम टूट चुका है।

नई दिल्ली। महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली की स्थिति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। उबेर रेप केस के बाद तो रेडियो टैक्सी को भी महिलाओं के लिए सुरक्षा की गारंटी मानने का भ्रम टूट चुका है। जाहिर है दिल्ली की सड़कें कई मायनों में डराती हैं लेकिन डर के आगे जीत है और यही फलसफा है सरिता दीक्षित का जो इस डर को पीछे छोड़ इन्हीं सड़कों पर सुबह से लेकर रात तक घूमती हैं और अपनी जीत की इबारत लिखती हैं। खास बात ये है कि सरिता सवारी नहीं बल्कि कैब की ड्राइवर है और दिल्ली में एक कंपनी की लेडीज स्पेशल कैब चलाती हैं।

सरिता दीक्षित मेरू कैब की महिला कैब सेवा की शुरुआत से ही उसके साथ जुड़ी हैं और मेरू ईव नाम से लांच महिला स्पेशल कैब चलाती हैं। सरिता कहती हैं कि शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई। डर भी लगता था, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को दिल्ली के सड़कों के माहौल के हिसाब से ढाल लिया। सरिता बताती हैं कि वो सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक दिल्ली की सड़कों पर चलती हैं, और अगर ज्यादा देर होती है, तो काम निपटा कर घर लौट जाती हैं। इस दौरान वो कहीं गाड़ी नहीं रोकतीं।

दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाते समय असुरक्षित महसूस नहीं करतीं इस सवाल के जवाब में सरिता कहती हैं कि डर तो स्वाभाविक है लेकिन वो सुरक्षित इसलिए महसूस करती हैं, क्योंकि पूरी तरह से अलर्ट रहती हैं। अपनी गाड़ी में पेपर स्पे रखती हैं, तो गाड़ी में जीपीएस होने के चलते हमेशा कंट्रोल रूम से भी जुड़ी रहती हैं। अगर रात 9 बजे के बाद किसी सवारी को छोड़ना होता है, तो कंपनी की तरफ से गार्ड भी उनके साथ जाता है। उनकी गाड़ी में पैनिक बटन भी है, जो इमरजेंसी के समय में काफी तेज आवाज करता है। सरिता कहती हैं कि उन्होंने सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली है, अगर कभी जरूरत पड़ी तो किसी से दो-दो हाथ करने को भी तैयार हैं।

ड्राइविंग फील्ड से महिलाओं की दूरी पर सरिता कहती हैं कि कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता। थोड़ी सी सावधानी बरतकर अच्छा किया जा सकता है। किसी भी जगह जाने से डरने की जरूरत नहीं है। पहले पुरुष ड्राइवरों के कमेंट्स से असहज महसूस होता था। वो तमाम बातें करते थे, लेकिन अब कोई कुछ नहीं बोलता। सरिता बताती हैं कि मेरू कैब के साथ जुड़ने से पहले वो एक प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर रह चुकी हैं, इसलिए यहां कोई खास दिक्कत नहीं आई।

सरिता दीक्षित कहती हैं कि दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियां चलाना खतरनाक तो है, लेकिन इतना भी नहीं, जितना हौवा बनाया जाता है। दिल्ली की महिलाओं को भी ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। थोड़ा सावधान रहने और सही कदम उठाने की जरूरत है। महिलाओं के लिए रेडियो कैब सेवा अच्छी पहल है। देश के अन्य बड़े शहरों में ये सुविधा अभी शुरुआती स्तर पर ही है, लेकिन पूरे देश में इसे शुरू किए जाने की जरूरत है। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और महिलाएं खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी।

Tags: New Delhi

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