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मुफ्ती ने माना सीमा पार से फायरिंग बड़ी चुनौती

मुफ्ती ने माना सीमा पार से फायरिंग बड़ी चुनौती

जम्मू कश्मीर के सीएम मुफ्ती ने कहा कि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी बड़ी चुनौती है और वह पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे।

जम्मू कश्मीर के सीएम मुफ्ती ने कहा कि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी बड़ी चुनौती है और वह पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे।

जम्मू कश्मीर के सीएम मुफ्ती ने कहा कि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी बड़ी चुनौती है और वह पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे।

    जम्मू। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी एक बड़ी चुनौती है और वह पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति सुनिश्चित कराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। मुफ्ती ने राज्य विधान परिषद में कहा कि जम्मू क्षेत्र में साल 2002 से 2010 तक सीमा पार से संघर्ष विराम के उल्लंघन की कोई घटना नहीं हुई थी।

    उन्होंने कहा कि हमें समस्या को सुलझाना होगा और सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए शांति सुनिश्चित करनी होगी। मुफ्ती ने कहा कि हमारी सीमा पर रहने वाले किसान सबसे ज्यादा पीड़ित हैं, क्योंकि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी में उनकी फसलें बर्बाद हो जाती हैं और उनकी जानें जोखिम में पड़ जाती हैं।

    मुफ्ती ने ये बातें जम्मू क्षेत्र के जम्मू, सांबा, कठुआ जिलों में पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा पार से होने वाली गोलीबारी पर चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान से शांति रखने का वचन लेंगे। मैं सुनिश्चित करूंगा कि हमारे सीमावर्ती इलाकों में शांति लौट आए।

    साल 2003 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय संघर्ष विराम समझौते का पिछले दो-तीन सालों तक सही ढंग से पालन हुआ। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर अर्थात भारत में नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रह रहे हजारों ग्रामीणों का जीवन काफी हद तक सामान्य रहा।

    साल 2013 से पाकिस्तान के सैनिक लगातार भारतीय सीमा सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले स्थानीय लोगों को निशाना बनाते आ रहे हैं। सीमा पार से होने वाली इस गोलीबारी के कारण अक्सर हजारों ग्रामीण अपने घरों और खेतों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

    Tags: Mufti Mohammad Sayeed, Pakistan

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