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टैटू बनवाने वाले अब नहीं कर पाएंगे ब्लड डोनेट

टैटू बनवाने वाले अब नहीं कर पाएंगे ब्लड डोनेट

हरियाणा में टैटू बनवाने वाले लोग अब ब्लड डोनेट नहीं कर पाएंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय हरियाणा ने जिला सिविल सर्जन को आदेश जारी किए हैं।

हरियाणा में टैटू बनवाने वाले लोग अब ब्लड डोनेट नहीं कर पाएंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय हरियाणा ने जिला सिविल सर्जन को आदेश जारी किए हैं।

हरियाणा में टैटू बनवाने वाले लोग अब ब्लड डोनेट नहीं कर पाएंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय हरियाणा ने जिला सिविल सर्जन को आदेश जारी किए हैं।

    हरियाणा। हरियाणा में टैटू बनवाने वाले लोग अब ब्लड डोनेट नहीं कर पाएंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय हरियाणा ने जिला सिविल सर्जन को आदेश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टैटू बनवाने वाले लोग कई तरह की एलर्जी और गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। इनके द्वारा डोनेट किया गया ब्लड किसी स्वस्थ व्यक्ति को बीमारी कर सकता है।

    उल्लेखनीय है कि अब मशीन के जरिए टैटू बनाए जाते हैं और इसमें सूई का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक बार इस्तेमाल करने से संक्रमित हो जाती है और दोबारा इस्तेमाल करने से सूई पर लगा संक्रमण दूसरे व्यक्ति के खून में पहुंच कर कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। स्वास्थ्य अधिकारी का मानना है कि टैटू बनवाने में मेटल कलरों का इस्तेमाल किया जाता है और वह मेटल खून में पहुंच जाता है। इससे ब्लड में विकार पैदा हो जाता है और इसे नॉर्मल होने में काफी समय लग जाता है।

    डॉक्टर और पैथलॉजिस्ट भी मानते हैं कि टैटू बनवाने वाले लोग ब्लड डोनेट नहीं कर सकते। डॉक्टरों का कहना है कि इससे इन्फेक्शन ट्रांसफर होने का खतरा है और इस खतरे का विंडो पीरियड लगभग 6 महीने से 12 महीने का होता है। इसलिए कम से कम 6 से 12 महीने तक लोगों को ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए। इस संबंध में एसएमओ डॉ. विरेंद्र यादव ने बताया कि निश्चित रूप से इससे इन्फेक्शन फैलने का खतरा है।

    टैटू बनाने के लिए जिस तरह का नीडल का इस्तेमाल होता है, उससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है। जो नीडल यूज होते हैं, उसे अगर ठीक से स्ट्रेलाइज नहीं किया जाता है तो उससे ब्लड ट्रांसमिशन होने का खतरा है। इसलिए सरकार का यह प्रयास सही है और लोगों को भी इस बारे में अलर्ट रहना चाहिए।

    यदि किसी को ब्लड डोनेट करना पड़े तो उसके लिए कुछ प्रावधान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों से उसके ब्लड की अच्छी तरह जांच कराई जाए। जिससे यह पता चल सके कि व्यक्ति एचआईवी, किसी प्रकार की एलर्जी और हैपेटाइटिस बी या सी से तो ग्रसित नहीं है। इसके अलावा उसे टैटू बनवाए हुए 12 महीने से ज्यादा का समय हो गया है या नहीं। उन्होंने कहा की सरकार को चाहिए की वह मापदण्डों के आधार पर टैटू स्टूडियो अधिकृत करे जो स्वास्थ्य के हिसाब से हाइजीनिक हो और सभी मापदण्डो को पूरा करते हो।


    कई इंटरनेशनल टैटू सेमीनार आयोजित कर चुके टैटू एक्सपर्ट भारत सुनेजा ने स्वास्थ्य विभाग के जारी निर्देशों का स्वागत किया उनका कहना था कि यदि हाइजीनिक टैटू स्टूडियो में टैटू बनवाया जाए तो वह किसी भी रूप में घातक नहीं हो सकता। उन्होंने बताया की टैटू बनाने की मशीन से लेकर तमाम अन्य उपकरण और सामान विदेशों से आयात किया जाता है जिसमें खासकर सुई और इंक डिस्पोजेबल होते है जो एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिए जाते है।

    लेकिन यह सच है कि बहुत से टैटू कलाकार सस्ते में टैटू बना रहे हैं और जाहिर सी बात है कि ऐसे अनहाइजीनिक तरीके से बने टैटू लोगों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा की विदेशों में टैटू स्टूडियो खोलने से पहले टैटू कलाकार को स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होता है लेकिन भारत में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

    यहां झोलाछाप डॉक्टरों की तरह जगह-जगह टैटू कलाकार सस्ते के लालच में बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में विदेशी तर्ज पर सरकार को उन्ही टैटू स्टूडियो को परमिशन देनी चाहिए जो स्वास्थ्य विभाग के निर्देशो के मुताबिक काम करें।

    Tags: HIV, हरियाणा

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