आज भी मौजूद है ‘सती प्रथा'

पुलिस की माने तो महिला अपने पति के मरने पर सती होने की बात करती थी।


Updated: October 13, 2008, 1:46 PM IST
News18india.com

Updated: October 13, 2008, 1:46 PM IST
छत्तीसगढ़। आजादी के 60 साल के बाद छत्तीसगढ़ के कसडोल जिले के छेछर गांव में में एक शर्मनाक हादसा हुआ।

75 साल के शिवनंदन वर्मा की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई। अपने पति की मौत से दुखी उनकी पत्नी लालमती से ये सहन नहीं हुआ और अपने पति की जलती चिता में कूद गईं।

जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस की माने तो महिला अपने पति के मरने पर सती होने की बात करती थी लेकिन इसके बावजूद परिवार के किसी शख्स ने उसे रोकने की कोशिश तक नहीं की। पुलिस ने महिला के परिवार के 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।



इस घिनौने हादसे के बाद जहां पुलिस और प्रशासन शर्मसार है वहीं गांव के लोग महिला को सती का दर्जा देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

गांववालों का कहना है कि महिला सती होकर देवी बन गई है इसलिए गांव में उसका मंदिर बनवाया जाएगा। इस गांव में 46 साल पहले भी एक ऐसी घटना के बाद भी लोगों ने सती प्रथा को मान्यता देते हुए एक मंदिर बनवाया था।

सबसे शर्मनाक बात ये है कि गांव में हादसे के बाद भी किसी को जरा भी शर्मिंदगी नहीं है। घटना पर दुख जताने की बजाय पूरे गांव ने पूजा पाठ करना शुरू कर दिया है जिसके देखते हुए पुलिस ने गांव में धारा 144 लगाकर पूरे गांव को घेर लिया है।

मामला चाहे कुछ भी हो लेकिन ये घटना हमारी तरक्की पर मुंह चिढ़ाते हुए नजर आ रही है।
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शिवपुराण की कथा बताती है कि सती शब्द पति के प्रति अथाह प्रेम का प्रतीक है, न कि पति की मृत्यु के बाद पत्नी को जबरन चिता पर जलाने की।

लेकिन पुरुष प्रधान मानसिकता ने जब इस कहानी को अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश किया तो इसका घीनौना रूप सामने आया। पति की मौत के बाद पत्नी को चिता में जबरन जिंदा जलाया जाने लगा। मुगल काल से लेकर अंग्रेजों के भारत आने तक धर्म के नाम पर ये पाप खुलेआम जारी रहा।

सदियों से चली आ रही घिनौनी परंपरा के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई बंगाल के समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय ने। उन्होंने उस समय के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक की मदद से 1829 में सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित कराया।

राजा राममोहन रॉय की ही पहल पर बैंटिक ने सती प्रथा के खिलाफ कानून बनाया। जिसके मुताबिक सती के नाम पर किसी भी हिंदू विधवा महिला को पति की चिता में जिंदा जलाना घोर अपराध है।

सती प्रथा को खत्म करने के लिए मौजूदा कानून नाकाफी है। देश की आजादी के बाद से अब तक सती होने के करीब 40 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 28 मामले केवल राजस्थान के सीकर जिले और उसके आसपास के गांवों से हैं। कहने को तो कानून में सारे प्रावधान हैं।

लेकिन हकीकत की जमीन पर ये खरे नहीं उतरते। आरोपी कानूनी खामियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं।

आज कानून भी है और एक व्यवस्था भी, लेकिन जब इस तरह की कोई घटना होती है तो कानून व्यवस्था कहीं नजर नहीं आती। लोग तमाशबीन बने देखते रहते हैं, पुलिस मौके पर देर से पहुंचती है। सवाल है आखिर ऐसा कबतक चलता रहेगा।

कभी धार्मिक अंधविश्वास तो कभी जुनून, सती होने की घटनाएं गाहे बगाहे लोगों के सामने आ ही जाती हैं। मालूम हो कि साल 2006 में बिहार के गया जिले के एक गांव में एक शर्मनाक घटना सामने आई।

सिद्दपुर गांव में सुग्रीव प्रसाद नाम के एक शख्स की मौत होने पर उसकी पत्नि ने जलती चिता पर बैठकर अपनी जान दे दी, परिवार वालों ने इसे सती का नाम दिया।

इससे पहले 2004 में बिहार के समस्तीपुर जिले में अस्सी साल की रुकिया देवी भी पति के साथ जल मरीं, मौत के बाद रुकिया को सती के तौर पर महिमामंडित करने की कोशिश भी की गई।

2002 में भी मध्यप्रदेश में पैंसठ साल की कुट्टू बाई भी जलती चिता में बैठ गई। इस केस में कुट्टू बाई के दो बेटों को उम्र कैद मिली। उनके खिलाफ आरोप था कि उन्होंने अपनी मां को अपनी नजरों के सामने जिंदा जल जाने दिया।

ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती ही रहीं। 1999 की एक घटना भी सुर्खियों में रही। चरण शाह नाम की एक दलित महिला पति के साथ जल गई। 55 साल की इस महिला का पति तीस बरसों से बीमार था, उस महिला ने सभी के सामने अपने पति के साथ जलने का फैसला किया। गांव वालों के सामने वो सज धज कर चिता पर बैठी और जिंदा जल गई। बाद में गांव वालों ने सफाई दी कि सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि वो चरण शाह को नहीं बचा सके।

ऐसे ही 1987 में सती को लेकर अभी तक का सबसे चर्चित मामला करीब दो दशक पहले सामने आया था। राजस्थान में अठारह साल की विधवा रूपकंवर अपने पति के साथ चिता पर जल मरी। आरोप लगे कि रूपकंवर को जबरदस्ती चिता में बैठा दिया गया था।

आनन फानन में वहां मंदिर भी बनाया गया और रूपकंवर को सती घोषित कर दिया गया। ग्यारह लोगों के खिलाफ मुकदमा बना। लेकिन पुलिस ये साबित नहीं कर पाई कि उन्होंने सती का महिमामंडन किया था। नतीजा सभी आरोपी बरी हो गए।

कुल मिलाकर सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद सती होने की घटनाएं लगातार जारी हैं।

इतना ही नहीं वजह चाहे जो हो सती प्रथा की आड़ में ऐसी घटनाओं को समाज का एक तबका गौरवान्वित करने की कोशिश में भी लगा रहता है।
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