...तो संघ के दबाव में आकर पुलिस अधिकारियों का किया गया तबादला!

...तो संघ के दबाव में आकर पुलिस अधिकारियों का किया गया तबादला!
फाइल फोटो-गेटी इमेज

इस पूरे मामले पर बीजेपी लगातार ये दोहरा रही है कि सुरेश यादव को गंभीर चोटें आई थीं.. उनके साथ जमकर मारपीट की गई थी।

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भोपाल। मध्य प्रदेश में संघ प्रचारक की कथित पिटाई के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल हुए एक वीडियो में दिख रहा है कि मेडिकल जांच के वक्त बालाघाट ज़िले के संघ प्रचारक सुरेश यादव के शरीर पर जख्म का एक निशान नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संघ के दबाव में एडिशनल एसपी, एसएचओ, चार इंस्पेक्टर औऱ दो पुलिस कर्मियों पर हत्या की कोशिश, लूट औऱ बलवे का मामला कायम किया गया। सारे नौ पुलिसकर्मी निलंबित है और मौजूदा समय में फरार हैं।

मध्य प्रदेश में वायरल हुये इस वीडियो में बालाघाट ज़िला प्रचारक सुरेश यादव मेडिकल जाँच कराते दिख रहे हैं। ये वीडियो कब किसने शूट किया इसके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है। मगर वीडियो में साफ दिख रहा है कि सुरेश यादव के शरीर पर पिटाई के ज़ख्म मौजूद नहीं हैं। बनियान थोड़ी सी फटी हुई है। कपड़े उतारकर भी उनके शरीर में घाव देखने की कोशिश नाकाम होती वीडियो में साफ दिख रही है। आरोप है कि बालाघाट पुलिस ने थाने में 26 सितंबर को सुरेश यादव की जमकर पिटाई की। इसके बाद नौ पुलिस अफ़सरों औऱ जवानों पर आईपीसी की धारा 307 का मामला कायम हो गया। काँग्रेस की माने तो ये वीडियो सबूत है कि पुलिस को संघ के दबाव में फंसाया जा रहा।

एमपी कांग्रेस की प्रवक्ता दीप्ती सिंह ने कहा कि कितनी दुखद घटना है कि एक बार खबर आती है कि संघ प्रचारक को मारने की कोशिश की गई औऱ पुलिस पर कार्रवाई की गयी। अब जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें जब डॉक्टर ने चेक अप किया तो उस वीडियो में दिख रहा है कि उनके शरीर पर एक निशान नहीं है और पुलिस प्रशासन पर इतने गंभीर आरोप लगे कि उनको मारने की कोशिश की गई। जो रक्षक है बेचारे वही भागते घूम रहे हैं।



बालाघाट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज़िला प्रचारक सुरेश यादव के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने और सुरेश यादव को गंभीर चोटें आने की ख़बर से जुड़ा ये वीडियो है। इसमें सुरेश यादव एक डॉक्टर के पास बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सुरेश यादव पूरी तरह होश में हैं।



अब सवाल ये पैदा होता है कि क्या संघ के दबाव में आकर राज्य सरकार ने पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की ?

इस पूरे मामले पर बीजेपी लगातार ये दोहरा रही है कि सुरेश यादव को गंभीर चोटें आई थीं। उनके साथ जमकर मारपीट की गई थी। राज्य सरकार की मानें तो पुलिस किसी को नाजायज परेशान ना करे इसलिए सख्त कार्रवाई की गई है। एमपी के संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा कहते हैं कि वीडियो के बाद और पहले क्या हुआ, स्वाभाविक रूप से कोई बड़ी घटना हुई होगी। विश्वस्त रूप से तो होम मिनिस्टर बता सकते हैं लेकिन इतना सब कुछ हुआ तभी कहीं जाकर माननीय मुख्यमंत्री और सरकार ने ये निर्णय लिया।

इस वीडियो के बारे में बालाघाट एसपी अमित सांघी ने कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उनकी जानकारी में बात आएगी तो वे इस पर विवेचना कर सकते हैं। मामले में आरोपी सारे पुलिस अफ़सर और जवान फ़रार हैं। परिवार सरकार पर संघ के दबाव में पुलिस पर ज़्यादती करने का आरोप लगा रहे है। जांच के दायरे में इस वीडियो के आने पर शिवराज सरकार को इस सवाल का जवाब तो देना ही होगा कि बिना जांच-पड़ताल के पुलिस अफ़सरों पर दफ़ा 307 के तहत हत्या के प्रयास का केस दर्ज करना कहां तक सही है? क्या सरकार अपनी ही पुलिस का मनोबल तोड़ने पर आमादा है?
First published: October 18, 2016, 10:57 PM IST
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