मंदिर-मस्जिद का फसाद, अटाली में नफरत की आग तस्वीरें

अटाली गांव में विवादित जगह स्थानीय लोगों के अलावा अन्य के पहुंचने की मनाही है और पुलिसवालों का इलाका उन पत्थरों के पार ही खत्म हो जाता है। यहां आने के लिए उच्चाधिकारियों से परमिशन लेनी होगी।

श्रवण शुक्‍ला | News18India.com
Updated: October 15, 2015, 8:14 PM IST
मंदिर-मस्जिद का फसाद, अटाली में नफरत की आग <a href='http://khabar.ibnlive.com/photogallery/clash-between-two-group-377933.html'><font color=red>तस्वीरें</a></font>
अटाली गांव में विवादित जगह स्थानीय लोगों के अलावा अन्य के पहुंचने की मनाही है और पुलिसवालों का इलाका उन पत्थरों के पार ही खत्म हो जाता है। यहां आने के लिए उच्चाधिकारियों से परमिशन लेनी होगी।
श्रवण शुक्‍ला
श्रवण शुक्‍ला | News18India.com
Updated: October 15, 2015, 8:14 PM IST

अटाली/बल्लभगढ़/फरीदाबाद। देश की राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद के बल्लभगढ़ का गांव अटाली सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के चलते सुर्खियों में है। गांव की बड़ी आबादी घर-बार छोड़ जान बचाने की गुहार लेकर थाने में डेरा डाले हुए है। कई घर जला दिए गए हैं। तोड़फोड़-लूटपाट हुई है। गाड़ियों को भी आग के हवाले किया जा चुका है। ये सब हुआ है इलाके में मंदिर-मस्जिद के नाम पर। दोनों ही पक्ष दशकों  से एक-दूसरे के साथ रह रहे थे लेकिन आज वो आमने-सामने हैं।


सांप्रदायिक आग में झुलस रहे अटाली गांव पहुंचते ही आपको पुलिस घेर लेगी। जान-पहचान पूछेगी। स्थानीय हुए तो गांव में जा सकते हैं, बाहरी हुए तो आउट। विवादित मंदिर-मस्जिद की तरफ जाने के लिए सामने से इंट्री पाते ही रैपिड एक्शन फोर्स के जवान खटियों पर बैठे मिले तो रास्ता पत्थरों से बंद कर दिया गया था। पूछने पर पता चला कि यहां आम लोगों के आने की मनाही है और पुलिसवालों का इलाका उन पत्थरों के पार ही खत्म हो जाता है। यहां आने के लिए उच्चाधिकारियों से परमिशन लेनी होगी।

वैसे, पूरे फसाद की जड़ है लगभग 4 बिस्वा की जमीन। जिसके उत्तरी कोने पर छोटे-छोटे कई मंदिर हैं, तो दक्षिण की तरफ बीच में मस्जिद बन रही है। मस्जिद के दक्षिण में सामुदायिक भवन है तो उससे सटी सड़क। ये तो गांव की स्थिति है। गांव के पलायन कर चुके लोग बल्लभगढ़ थाने में शरण लिए हुए हैं।


मुस्लिमों का पक्ष



थाने में शरण लिए बैठे हसमत अली कहते हैं कि पूरा गांव खाली है। हिंदू-मुस्लिम सभी गांव छोड़ चुके हैं। सभी मुस्लिम घर द्वार छोड़कर बल्लभगढ़ थाने में डेरा डाले हुए हैं, तो आरोपी लोग घर छोड़कर फरार हैं। फसाद की जड़ पूछने पर हसमत अली कहते हैं कि जिस मस्जिद को लेकर बवाल है, वो पहले चबूतरा था। हम वहीं नमाज पढ़ा करते थे। बिना लाउडस्पीकर, बिना शोर-शराबे के। बाद में वहां मुस्लिम समाज की ओर से छप्पर डालकर नमाज अता की जाने लगी। इस बीच दूसरे पक्ष के लोगों ने छप्पर को आग लगा दी, जिसके बाद हमने वहां टिन रखवाकर नमाज पढ़ना शुरू कर दी। पर अब हम टिन हटाकर पक्की मस्जिद बनाना चाहते हैं। हमने कोर्ट में भी मामला जीत लिया है। एसडीएम, सेशन कोर्ट ने फैसला हमारे पक्ष में दिया।


hasmat ali


हसमत अली के मुताबिक हम मस्जिद बना रहे थेपिलर पहले से पड़ा था। पुलिस-सरपंच की मौजूदगी में मस्जिद बनाने का काम शुरू हुआ था। पर लेंटर डालने की शुरुआत में ही दूसरे पक्ष ने हंगामा कर दिया। उन्हें छांयसा थाना  की पुलिस ने भरपूर साथ दिया। हसमत अली आरोप लगाते हैं कि छांयसा थाने के एसएचओ बाबूलाल ने दूसरे पक्ष के लोगों से मिलकर 2 घंटे के लिए पुलिस हटवा दी और दूसरे पक्ष को खुली छूट दे दी। जिसके बाद मुस्लिम आबादी पर खुलकर हमला किया गया। घरों में आग लगा दी गई। सिलेंडर फोड़े गए। लूटमार की गई। गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। और तब से सभी लोग डर की वजह से बल्लभगढ़ थाने में शरण लिए हुए हैं।

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मोहम्मद अरशद खान फरीदाबाद के सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने समझौता कराने की जगह हिंदुओं का खुलकर साथ दिया, और मुस्लिम समाज को मस्जिद बनाने से मना कर दिया। याकूब खान व उनके साथी कहते हैं कि अटाली के 60-70 परिवारों के 350-400 लोग यहीं पड़े हुए हैं। हम अपने घर नहीं जा पा रहे। दूसरों की कृपा पर जिंदा हैं। अबतक स्थानीय मुस्लिम कमेटी हमें भोजन दे रही थी, फिर पिछले 2 दिन से एसडीएम की तरफ से भोजन पहुंच रहा है। आसपास के लोग भी मदद दे रहे हैं। पर ऐसा थाने में जीवन थोड़े न गुजरने वाला है। वो कहते हैं कि उनके नुकसान की भरपाई कर दी जाए।


हिंदुओं का पक्ष


गांव में मंदिर के पास मिले चंद्रपाल कहते हैं कि पूरा मामला 6 साल से चल रहा है। जब चबूतरा हुआ करता था। वो चबूतरा भी ग्राम पंचायत की जमीन पर था। जो मंदिर के तहत है। ये मंदिर तब से है, जब से गांव बसा। मंदिर कभी बड़ा नहीं किया गया, जैसे शुरू में छोटा सा था, वैसा ही अब भी है। लेकिन मुस्लिमों को चबूतरे पर नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी गई थी। उस समय मुस्लिम समाज ने कहा था कि वो बिना लाउडस्पीकर के इबादत करेंगे, पर अब मस्जिद बनाकर तो वो हमारा रहना मुश्किल कर देंगे। हमने मस्जिद बनाने से मना किया, तो हम पर ही हमले किए गए।


इस दौरान पूजा कर रही सैनी समाज की महिला भी सामने आ चुकी थी। वो कहती हैं कि हम जितनी छूट दे रहे हैं, ये उतना ही हमें दबा रहे हैं। ये कैसे चलेगा। हालांकि वो झगड़े की जगह प्यार से बात करने की बात कहती हैं। गांव के ही रहने वाले प्रेम सिंह का आरोप है कि पूरे मामले को राजनीति के चलते हवा दी गई। प्रेम सिंह कहते हैं कि गांव में पहले कोई मस्जिद नहीं थी। यहां सिर्फ चबूतरा था। अब इलेक्शन का दौर आया तो पिछली बार के पराजित सरपंच प्रत्याशी ने मुस्लिमों को मस्जिद बनाने की बात कही और आकर रिबन काट दिया।


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बुजुर्गों ने कहा कि मंदिर की सरकारी जगह है। मौजूदा सरपंच की पहल पर गांव में पंचायत हुई। और फिर तय किया गया कि गांव में मस्जिद भी बने, पर भीड़भाड़ से हटकर लड़कियों के स्कूल की तरफ। वहां एक एकड़ जमीन भी दे दी गई, जहां ईंट भी गिरा दी गईं। लेकिन इस दौरान दोनों ही पक्षों के युवाओं में तनातनी हो गई। और फिर दूसरे पक्ष ने मस्जिद बनाने से मना कर दिया।


प्रेम सिंह सीधे सीधे पूर्व सरपंच प्रत्याशी और उनके समर्थकों पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने मुस्लिमों को भड़काया। उन्हीं के भड़काने के बाद मुस्लिमों ने पथराव किया। और फिर हिंदुओं ने जवाब दिया। इस दौरान कई घरों पर कहर बरपा। कई लोग घायल हुए, और देखते ही देखते पूरा गांव सांप्रदायिक तनाव की आग में जलने लगा।


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प्रेम सिंह कहते हैं कि मुस्लिम समाज के कुछ युवकों ने बेकसूर हिंदू लड़के को पकड़ लिया, और जमकर पिटाई के बाद पुलिस के हवाले कर दिया, लेकिन ग्रामीणों के दबाव बनाने के बाद पुलिस ने लड़के को छोड़ दिया। इस दौरान लड़के को पीटने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।


पुलिस का बयान


गांव में पुलिस व्यवस्था की कमान थामे एसीपी, तिगांव विष्णु दयाल ने कहा कि  गांव में फिलहाल शांति है। किसी को भी बाहर रहने को नहीं कहा गया है, जैसी कि अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। लोग अपने घरों में हैं। गांव के दूसरे कोने के मुस्लिम लोग अपने घरों में हैं। मस्जिद के आसपास के जिन घरों को नुकसान पहुंचा था, वही के लोग थाने में शरण लिए हुए हैं।


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विष्णु दयाल कहते हैं कि इस समय कोई हंगामा नहीं चल रहा। गांव को किले में तब्दील कर दिया गया है। लगभग 650 पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान शिफ्ट बदल बदलकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान थामे हुए हैं। बाहरी लोगों का प्रवेश गांव में वर्जित है। अगले आदेश तक सुरक्षा की यही स्थिति रहेगी।


अटाली के हीरो बने हितेश

हरियाणा पुलिस के सिपाही हितेश की चर्चा पूरे गांव में है। हितेश ने उपद्रव के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर 15 लोगों को बचाया। उन्होंने जलते हुए घरों में से बच्चों को निकाला।


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हितेश कहते हैं कि उन्होंने किसी पर कोई अहसान नहीं किया। वो अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, और जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे पूरा कर रहे थे। हितेश कहते हैं कि अगर मेरे सामने उनमें से किसी को भी कुछ हो जाता, तो शायद मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाता।


सांप्रदायिक हिंसा से झुलसे फरीदाबाद के गांव की बोलती तस्वीरें

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