हार्दिक की गुजरात सरकार को चेतावनी, सब्र की परीक्षा मत लो

 पटेलों को आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार आरक्षण समिति के संयोजक 22 साल के युवा नेता हार्दिक पटेल ने ये रैली बुलाई थी।

पटेलों को आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार आरक्षण समिति के संयोजक 22 साल के युवा नेता हार्दिक पटेल ने ये रैली बुलाई थी।

पटेलों को आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार आरक्षण समिति के संयोजक 22 साल के युवा नेता हार्दिक पटेल ने ये रैली बुलाई थी।

  • News18India
  • Last Updated: August 21, 2015, 4:12 PM IST
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वडोदरा। गुजरात के वडोदरा में पटेल समाज की आज एक बड़ी रैली हुई। पटेलों को आरक्षण की मांग को लेकर पाटीदार आरक्षण समिति के संयोजक 22 साल के युवा नेता हार्दिक पटेल ने ये रैली बुलाई थी। वहीं गुजरात सरकार को आरक्षण पर होने वाली अहमदाबाद रैली को लेकर भी आखिरकार झुकना पड़ा। 25 अगस्त को अहमदाबाद में होने वाली रैली को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि ये रैली अब रिवर फ्रंट की जगह OMDC मैदान पर होगी।

रैली में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। हर तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे। रैली में हार्दिक ने सरकार को चेतावनी दी है कि हमें आरक्षण दे, हमारे सब्र की परीक्षा ना लें। अभी हम सरदार और महात्मा के रास्ते पर हैं, पर भगत सिंह के रास्ते पर जाना भी आता है। 25 तारीख की रैली देखिए, हम कितने बड़े पैमाने पर करते हैं। उधर, पाटीदार आंदोलन को लेकर गुजरात के डीजीपी ने सारे पुलिसकर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी है।

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पढ़ें कौन हैं हार्दिक पटेल :
हार्दिक पटेल मामूली ग्रैजुएट है। उम्र भी कम है, सिर्फ 22 साल लेकिन उसके पीछे खड़े हैं 2 करोड़ पटेल आखिर चंद महीने में गुजरात का एक मामूली नौजवान कैसे बन गया राज्य के सबसे असरदार पटेल समुदाय का नेता। अहमदाबाद के विरमगांव के चंद्रपुर में 20 जुलाई 1993 को जन्मा है हार्दिक पटेल। एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुए हार्दिक को भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि इतनी कम उम्र में वो अपने समाज का नेता बनेगा और एक ऐसे आंदोलन का अगुवा बनेगा जिसने सरकार को हिला कर रख दिया है।

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जिसके एक इशारे पर 5 लाख लोग इकट्ठा हो जाते हैं, जिसने गुजरात के कडवा और लेऊवा पटेलों को एकजुट किया। जिसने राज्यभर में 82 रैली कर पूरे गुजरात के करीब 2 करोड़ पटेलों को जोड़ा। हार्दिक पटेल आज पटेल समुदाय का चेहरा बन गया है। खासकर युवा पटेलों का इसने उनमें आरक्षण की उम्मीद जगाई है।

आरक्षण को लेकर हार्दिक ने इस आंदोलन कि शुरुआत तब की जब खुद वो इसका शिकार बना। उसके पड़ोसी लड़के को कम नंबर के बावजूद सरकारी नौकरी मिल गई और वो मुंह देखता रहा। हार्दिक ने जब युवाओं की बात को मंच पर उठाना शुरू किया तो उसे मंझे हुए नेताओं ने भी तवजों नहीं दी। लेकिन हार्दिक को पता था की उसने जिस बात को छेड़ा है वह उसके समाज के तार को जरूर छुएगी, हुआ भी वही महज एक साल के अंदर हार्दिक पटेल का नाम हर पटेल की जुबान पर चढ़ गया खासकर युवाओं के।

इस आंदोलन को शक्ल देने और पटेलों के आरक्षण की मांग को मजबूत करने में पटेल समुदाय के रिटायर्ड अफसरों का भी अहम रोल रहा है। सरकार चलाने वाले इन IAS और IFS अफसरों ने रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई। बिल्कुल उस तर्ज पर जैसे इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मुहिम चली थी।

 

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