जैसलमेर में हिस्ट्रीशीटर की मौत पर भड़का आंदोलन

राजस्थान के जैसलमेर में एक अपराधी चतुर सिंह को पुलिस के मुठभेड़ में मार गिराने के बाद बवाल खड़ा हो गया। विरोध में जैसलमेर जिला बंद रहा है।
राजस्थान के जैसलमेर में एक अपराधी चतुर सिंह को पुलिस के मुठभेड़ में मार गिराने के बाद बवाल खड़ा हो गया। विरोध में जैसलमेर जिला बंद रहा है।

राजस्थान के जैसलमेर में एक अपराधी चतुर सिंह को पुलिस के मुठभेड़ में मार गिराने के बाद बवाल खड़ा हो गया। विरोध में जैसलमेर जिला बंद रहा है।

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भवानी सिंह

जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर में एक अपराधी चतुर सिंह को पुलिस के मुठभेड़ में मार गिराने के बाद बवाल खड़ा हो गया। विरोध में जैसलमेर जिला बंद रहा है। जैसलमेर और बाड़मेर में इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे के लिए बंद कर दी गई। जयपुर समेत कई जिलों में इस एनकाउटंर की सीबीआई जांच और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। बीजेपी के कई स्थानीय नेता और विधायक भी आंदोलनकारियों के समर्थन में उतर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एनकाउटंर फर्जी था, मृतक ने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को लेकर आंदोलन किया इस वजह से निशाना बनाकर उसकी हत्या की।

आंदोलनकारी मनीष ने कहा कि 25 जून की रात चतुरसिंह नाम के शख्स को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था लेकिन वह स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाने के लिए सरकार के खिलाफ कई बार आंदोलन कर चुका था इसलिए पुलिस ने उसकी हत्या की, मुठभेड़ फर्जी है। नेता राजेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस की ये कहानी फर्जी है कि गोली टायर में मारी थी और फिर बोनट से टकराकर उसे लग गई थी। हमारी स्पष्ट मांग है कि सीबीआई से जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।



पुलिस ने किसी तरह चतुरसिंह का अंतिंम संस्कार तो एक समझौते के बाद करवा दिया लेकिन दो दिन बाद आरोपी पुलिसकर्मियों और एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जैसलमेर समेत तीन जिलों के राजपूत समुदाय ने आंदोलन शुरू कर दिया। विरोध में स्थानीय बीजेपी के नेता और विधायक भी सरकार के खिलाफ उतर गए। जैसलमेर के बीजेपी के विधायक छोटूसिंह ने तो एसपी, कलेक्टर को चेतावनी दे डाली कि कुछ भी हो सकता है।
पुलिस ने सफाई दी कि चतुरसिंह मासूम नहीं हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत 17 केस दर्ज थे। पुलिस का दावा है कि चतुरसिंह ने एक सिपाही का अपहरण कर लिया था। उसे छुड़ाने के लिए फायरिंग की थी। जैसलमेर के एसपी राजीव पचार ने बताया कि चतुर सिंह के खिलाफ 17 केस दर्ज थे, जिनमें हत्या का प्रयास, लूट जैसे मामले शामिल थे। वह सिपाही को उठाकर ले गया था। साथियों की रक्षा के लिए फायर करने का कानूनी हक है।

बीजेपी के ही कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं के आंदोलनकारियों के समर्थन में उतरने के बाद राज्य सरकार ने मुठभेड़ की सीआईडीसीबी से जांच के आदेश दिए हैं लेकिन आंदोलनकारी सीबीआई जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़े है। चेतावनी दी है कि दो दिन में अगर सरकार ने फैसला नहीं किया तो 02 जुलाई को जैसलमेर में एक लाख लोगों के साथ महापड़ाव किया जाएगा। पुलिस के दावे के मुताबिक चतुर सिंह एक सिपाही को अगवा कर स्कॉर्पियो कार में लेकर जा रहा था, तभी उसका पीछा करते हुए रामगढ़ थाना पुलिस ने मोकला के पास कार पर फायरिंग की।
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