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बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा, क्या स्कूल-दफ्तरों का वक्त बदल सकते हैं?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा, क्या स्कूल-दफ्तरों का वक्त बदल सकते हैं?

मुंबई लोकल ट्रेन से लगातार हो रहे हादसों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से कई सवाल पूछे हैं। पढ़ें क्या है वो सवाल।

    मुंबई। मुंबई लोकल ट्रेन से लगातार हो रहे हादसों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से कई सवाल पूछे हैं। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या वो हादसे रोकने के लिए स्कूल, कॉलेजों और दफ्तरों का वक्त बदल सकती है? और क्या वो रेलवे के परिचालन में मदद कर सकती है।

    डोंबिवली का एक दर्दनाक वीडियो को देखने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या वो मुंबई में लोकल ट्रेन चलाने में मदद करेगी। एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में रेलवे से पूछने का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि ये आपके शहर में हो रहा है कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से सख्त लहजे में पूछा कि क्या कॉन्स्टेबल मुहैया कराने भर से आपकी ड्यूटी खत्म हो गई।

    एक आरटीआई के जवाब में जीआरपी से मिली जानकारी के मुताबिक वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन पर यात्रा करते वक्त पिछले 10 साल में 25722 यात्री चलती ट्रेन से गिर गए। इसमें से 6989 की मौत हो गई जबकि 1733 लोग घायल हो गए। ट्रेन में भीड़भाड़ की वजह से हो रहे हादसों के मद्देनजर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेल मंत्रालय से पूछा कि आखिर क्यों वो ट्रेन का संचालन सरकार और महानगर पालिका के हाथ में देने की नहीं सोचता। सभी रूट रेलवे ही क्यों संभालेगा कोर्ट ने ये भी सुझाव दिया कि क्या ट्रायल के तौर पर सरकार और महानगर पालिका कुछ रूट का संचालन नहीं संभाल सकते।

    Tags: Bombay high court, Mumbai

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