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रोजाना सैकड़ों को खाना खिलाकर खुद 151 दिन से अन्न उपवास पर हैं ‘तारा’

रोटी बैंक के जरिए रोजाना करीब एक हजार लोगों को खाना खिलाने वाले महोबा के तारा पाटकर खुद 155 दिन से भूखे हैं। वह महोबा में एम्स की स्थापना चाहते हैं।

रोटी बैंक के जरिए रोजाना करीब एक हजार लोगों को खाना खिलाने वाले महोबा के तारा पाटकर खुद 155 दिन से भूखे हैं। वह महोबा में एम्स की स्थापना चाहते हैं।

रोटी बैंक के जरिए रोजाना करीब एक हजार लोगों को खाना खिलाने वाले महोबा के तारा पाटकर खुद 155 दिन से भूखे हैं। वह महोबा में एम्स की स्थापना चाहते हैं।

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नई दिल्‍ली। वो कहते हैं कि भूखों के लिए खाने का जुगाड़ तो हो गया अब बस किसी तरह से बुंदेलखंड के लोगों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं और मिल जाए तो अपना जीवन सार्थक हो जाए। लेकिन ये इतना आसान नहीं है भाई। जी हां यहां हम बात कर रहे हैं महोबा के रहने वाले तारा पाटकर की। रोटी बैंक के जरिए रोजाना करीब 900 से एक हजार लोगों को खाना खिलाने वाले तारा ने खुद 151 दिन से दो वक्‍त का अन्‍न त्‍यागा हुआ है। देश को पहला रोटी बैंक देने वाले तारा उपवास पर हैं।

उनकी मांग बस इतनी है कि दो राज्‍यों और 12 जिलों के करीब दो करोड़ लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए महोबा में एम्‍स की स्‍थापना कर दी जाए। जबकि तारा के अभियान में उनके साथी और पूर्व सांसद एम्‍स के लिए 200 एकड़ जमीन फ्री में देने को तैयार हैं। हाल ही में खुद यूपी के मुख्‍यमंत्री ने बेहतर सामाजिक कार्यों के लिए तारा को सम्‍मानित भी किया था।

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आइए जानते हैं तारा पाटकर के मिशन को खुद उन्‍हीं की जुबानी

वैसे तो मेरी जिंदगी में कोई ऐसी घटना नहीं घटी की जिसने मेरी सोच को बदला हो। हां पेशे से पत्रकार था, तो खबरों के बीच जीते-जीते सोचा की चलो अब खबर बनने वाले लोगों के लिए कुछ किया जाए। इसी सोच को पहले रोटी बैंक में बदला। 15 अप्रैल 2015 को रोटी बैंक की स्‍थापना की। शुरूआत में 10 घरों से खाना लेकर 20 से 25 लोगों को खाना खिलाया। पहले खुद ही खाना घर-घर से लेकर रास्‍ते में मिलने वाले जरूरतमंदों को देता रहा।

उसके बाद सहायता के लिए कुछ और लोग भी जुड़ गए। धीरे-धीरे घरों की संखया भी बढ़ने लगी। इसके बाद हमने बाक्‍स रखने शुरू कर दिए। आज शहर में 15 जगह पर बाक्‍स रखे हुए हैं। लोग आते हैं और खाने के पैकेट बाक्‍स में रखकर चले जाते हैं। एक पैकेट में चार रोटी-सब्‍जी होती है। सब्‍जी न हो तो अचार भी चल जाता है। जहां बॉक्‍स रखा होता है वहां कोई दुकान या घर भी होता है। बस जैसे ही कोई जरूरतमंत आता है तो उसे एक पैकेट निकालकर दे दिया जाता है।

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एक साल बाद अब 10 नहीं 400 घरों से आ रहा है खाना

हम सुबह से रात तक लोगों को खाना खिलाते हैं। आज हमारे पास 400 घरों की सूची है जो हमे खाने के पैकेट बनाकर देते हैं। उन पैकेट से हम दिनभर में 900 से 1000 लोगों को खाना खिला रहे हैं। आज हमारे पास 10 ऐसे सदस्‍य भी हैं जो घरों से खाना लेकर आते हैं और जरूरतमंदों को बांटते हैं। शादी-ब्‍याह वाले घरों से भी खाने के लिए फोन आ जाता है। सेंट जोसफ स्‍कूल से भी रोजाना खाने के लिए फोन आता है। जब देश ही नहीं विदेश से भी मदद के लिए फोन आता है तो हम यही कहते हैं कि हमें चंदा नहीं चाहिए आप बस अपने आसपास किसी भूखे को खाना खिला दीजिए। अब तो हम सर्दी के मौसम में लोगों को गर्म कपड़े भी पहुंचा रहे हैं। जरूरतमंद हेल्‍पलाइन नंबर पर फोन कर देते हैं और हमारे साथी उन्‍हें कपड़े पहुंचा देते हैं।

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अब तो बस महोबा में एम्‍स के लिए जारी रहेगी लड़ाई

जान है तो जहान है। बस इसी को दिमाग में रखकर महोबा में एम्‍स की मांग उठाई है। अगर आप महोबा या उसके आसपास प्राथमिक और सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र की हालत देख लो तो सोचने को मजबूर हो जाआगे। जरूरी इलाज के लिए कानपुर, झांसी और ग्‍वालियर की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। बात सिर्फ महोबा की ही नहीं है। महोबा में एम्‍स बनने से यूपी-एमपी के 12 जिलों को फायदा पहुंचेगा। यूपी के हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, उरई आदि और एमपी के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्‍ना, सागर, दमोह आदि जिलों को सीधे-सीधे एम्‍स का फायदा मिलेगा। दोनों राज्‍यों के करीब दो करोड़ लोग एम्‍स की अच्‍छी सुविधाओं का फायदा उठा सकेंगे।

इतना ही नहीं झांसी, बांदा और उरई के मेडिकल कॉलेज भी एम्‍स का फायदा ले सकेंगे। 17 सितंबर को मेरे उपवास स्‍थल महोबा के आला चौका पर राहुल गांधी भी आकर मिले थे। उन्‍होंने इस मामले को संसद में उठाने का वायदा किया था। लेकिन वो सब भी नोटबंदी की भेट चढ़ गया। हमारे अभियान के साथी और यूपी के महाधिवक्‍ता विजय बहादुर सिंह एम्‍स के लिए 200 एकड़ जमीन महोबा के निसवारा गांव में फ्री में देने को तैयार हैं। इस बात को वो जब बसपा के सांसद थे संसद में भी बोल चुके हैं।

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तारा पाटकर को सीएम अखिलेश दे चुके हैं सम्‍मान

गांव कनेक्‍शन फाउंडेशन की ओर से यूपी के 10 प्रमुख समाजसेवियों को सम्‍मानित किया गया था। ये पुरस्‍कार अखिलेश यादव के हाथों दिए गए थे। तारा पाटकर को भी ये सम्‍मान दिया गया था। तारा की ओर से उनका पुरस्‍कार उनके मित्र प्रदीप कुमार सिंह और बीके श्रीवास्‍तव ने लिया था।

 

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