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मरे हुए बाघ के आगे वहशी हुए लोग, लाश से उतारी खाल, नोंचे बाल

अर्पिता आर्या | News18India
Updated: November 28, 2016, 10:44 PM IST
मरे हुए बाघ के आगे वहशी हुए लोग, लाश से उतारी खाल, नोंचे बाल
असम के जोरहाट में करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर एक बाघ को मार डाला। बाघ के मारने के बाद लोगों ने उसकी लाश के साथ ऐसी हैवानियत बरती कि देखकर कलेजा मुंह को आ जाता है।
अर्पिता आर्या | News18India
Updated: November 28, 2016, 10:44 PM IST
जोरहाट। असम के जोरहाट में करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर एक बाघ को मार डाला। बाघ के मारने के बाद लोगों ने उसकी लाश के साथ ऐसी हैवानियत बरती कि देखकर कलेजा मुंह को आ जाता है। लोगों ने बाघ की पूंछ और पैर काट डाले। उसके नाखून उखाड़ ले गए। उसकी लाश से चमड़ा उतार दिया। भीड़ में कुछ ऐसे थे जो बाघ के बाल नोचकर अपने साथ ले गए।

असम के जोरहाट में वन विभाग की टीम खेतों में एक बाघ की तलाश कर रही थी। कुछ लोग जीप पर सवार होकर बाघ के निशान खोज रहे थे क्योंकि इन्हें बाघ के हमले का डर था। खेतों के किनारे खड़े लोग पूरे मंजर को गौर से देख रहे थे कि अचानक हल्ला मचना शुरू हो गया। लोग खेतों की तरफ दौड़ने लगे। पता चला कि बाघ को मार दिया गया है। भीड़ बाघ की लाश देखने दौड़ पड़ी। करीब जाने पर लोगों का उन्माद साफ सुनाई देने लगा। वन विभाग के कर्मचारी भीड़ से दूर खड़े थे और भीड़ बाघ की लाश के साथ जो कुछ कर रही थी, वो दिल दहला देने वाला था।

लाठी-डंडा, बरछी, भाला, गंड़ासा, जिसके हाथ जो आया वही बाघ की लाश पर आजमाने लगा। जिसके पास कोई हथियार नहीं था वो बाघ के बाल नोंचने लगा। हैवानियत का ऐसा खेल शुरू हो चुका था, जिसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा था।

इस भीड़ में शामिल हर चेहरे पर बाघ के मारे जाने की खुशी साफ दिख रही थी। लाठी-डंडे लगातार बरस रहे थे। कुछ बहादुर ऐसे भी थे, जो मर चुके बाघ के चेहरे को अपने जूतों से रौंदने लगे। लाश को जूतों से कुचलने वालों के चेहरे की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी। जिंदा बाघ के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं होती, लेकिन यहां तो जैसे सबकुछ कर लेने की आजादी मिल गई थी।

भीड़ में शामिल कुछ नौजवानों ने अपने स्मार्ट फोन निकाल लिए और बकायदा मोबाइल फोन का कैमरा ऑन कर लाश की फोटो उतारने लगे। लेकिन फोटो उतारने के बाद फिर दरिंदगी के खेल में शामिल हो गए। इस खेल में हर कोई अपने-अपने तरीके से मजे ले रहा था। तभी एक शख्स आगे बढ़ा और बाघ की लाश पर कुल्हाड़ी चलाने लगा। अब तक दूर खड़े वन विभाग के कर्मचारी करीब आ गए और लोगों को रोकने के लिए जोर-जोर से सीटी बजाने लगे। लेकिन अब तक जिसे जो करना था, वो कर चुका था। कोई टांग काटकर ले गया, किसी ने नाखून उखाड़ लिए, कोई पूंछ काट ले गया तो कोई खाल उतारकर चलता बना। जिसे ये सब करने का मौका नहीं मिला उसने बाघ के बाल को ही नोचकर संतोष कर लिया।

अब बाघ को घसीटकर गांव तक लाने की कोशिश होने लगी। करीब एक हजार लोगों की भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर बाघ की लाश को वन विभाग के कर्मचारी अपने दफ्तर लाए। वन विभाग के दफ्तर में बाघ की लाश की हालत देखने के बाद कलेजा मुंह को आ जाता है। लोगों का कहना है कि इस बाघ ने तीन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। इसके बाद उन्होंने वन विभाग को खबर दी। लेकिन इससे पहले कि वन विभाग हरकत में आता, ये बाघ गांव के लोगों के हत्थे चढ़ गया और बाघ के मरते ही इन इंसानों के भीतर का जानवर बाहर निकल आया।
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