क्‍या वाकई 'उड़' रहा है 'पंजाब', सेंसर बोर्ड सही या अनुराग कश्‍यप?

निर्माता अनुराग कश्‍यप की फिल्‍म उड़ता-पंजाब को लेकर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। आखिर पंजाब में युवाओं के नशे की गिरफ्त में होने का क्‍या है सच? क्‍या ये फिल्‍म सच्‍च्‍चाई बता रही है? या फिर वाकई ये पंजाब को बदनाम करने की साजिश है..?

निर्माता अनुराग कश्‍यप की फिल्‍म उड़ता-पंजाब को लेकर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। आखिर पंजाब में युवाओं के नशे की गिरफ्त में होने का क्‍या है सच? क्‍या ये फिल्‍म सच्‍च्‍चाई बता रही है? या फिर वाकई ये पंजाब को बदनाम करने की साजिश है..?

निर्माता अनुराग कश्‍यप की फिल्‍म 'उड़ता-पंजाब' को लेकर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। आखिर पंजाब में युवाओं के नशे की गिरफ्त में होने का क्‍या है सच? क्‍या ये फिल्‍म सच्‍च्‍चाई बता रही है? या फिर वाकई ये पंजाब को बदनाम करने की साजिश है..?

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नई दिल्‍ली। पंजाब में 2017 की चुनावी आहट के बीच फंसी निर्माता अनुराग कश्यंप और अभिषेक चौबे निर्देशित फिल्म 'उता-पंजाब' रिलीजिंग के लिए हाथ-पैर मार रही है। फिल्म पंजाब में ड्रग्स की लगातार बढ़ती खपत और खपत की उस सच्चाई में पंजाब के युवाओं की तस्वीर को दिखाती है।



पंजाब की राजनीति पर बारीकी से नजर रखने वाले कई पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि फिल्‍म को बिना किसी कांट-छांट के रिलीज होने देना चाहिए, तो वहीं दूसरी ओर राज्‍य में पहले से ही सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही अकाली दल और भाजपा का यह मानना है कि फिल्‍म पंजाब को बदनाम करने की साजिश है। राज्‍य के युवाओं के नशे में फंसे होने की बात को कुछ ज्‍यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है।



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ये कहते हैं पंजाब को नजदीक से जानने वाले  : पंजाबी समाज और राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले भोपाल से युवा पत्रकार तेजिंदर सिंह कहते हैं कि पंजाब का युवा यदि आज नशे की गिरफ्त् में है, तो उसके लिए सरकारें जिम्मेदार है। तेजिंदर कहते हैं कि एक समय पंजाब देश का सबसे समृद्ध राज्य हुआ करता था, राज्य की अर्थव्यस्था बेहतर थी, लेकिन बीते दशकों में यह हाशिये पर चली गई और यहां बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं को भटका दिया और वे नशे की गिरफ्त में चले गए।
तेजिंदर के मुताबिक पंजाबी युवा खेलकूद की गतिविधियों में भी आगे रहते थे, वे पढ़ाई में भी तेज थे, लेकिन सरकारों ने यहां कृषि पर तो ध्यान दिया,  लेकिन यहां का औद्योगिक विकास पिछड़ गया, नतीजा यह हुआ कि एमबीए, इंजीनियरिंग किया युवा, या तो राज्य के बाहर चले गया, या खेतीबाड़ी में लगा, उसमें भी वे युवा, जिनके पास खेती थी। इधर, जो बेरोजगार था, नशे की ओर मुड़ गया।



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तेजिंदर कहते हैं कि पंजाब में 50 फीसदी कॉलेज ऐसे हैं, जहां का युवा नशे की गिरफ्त में है। तेजिंदर के मुताबिक फिल्म 'उता-पंजाब' का विरोध यदि केवल राज्य की छवि खराब करने के चक्कर में किया जा रहा है, तो यह कोई कारण नहीं है।



वे कहते हैं पंजाब में यदि ड्रग्स की समस्या इतना बड़ा रूप ले चुकी है, तो इसे रोकना चाहिए। ये हमारी आने वाली नस्ल का सवाल है। सिख धर्म किसी तरह के नशे की इजाजत नहीं देता। मुझे याद है पुराने बुजुर्ग जिन्हें मैं बचपन में जानता था,  तो चाय तक नहीं पीते थे। कहते थे इसमें भी नशा है। तेजिंदर सिंह के मुताबिक ड्रग्ज के कारण इंफर्टिलिटी बढ़ रही है और आने वाले वक्त में हम कैसी पीढ़ी ला रहे हैं। ये पंजाबियों की नहीं बल्‍कि पंजाब के सिख युवाओं के सामने बड़ी चुनौती है।



अमृतसर में अकाली दल में ऑर्गनाइजिंग कमेटी के पूर्व मेंबर, एड्वोकेट और एसजीपी यानी की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्‍य और सामाजिक कार्यकर्ता जसविंदर सिंह कहते हैं, 'उड़ता-पंजाब' को बिना किसी कांट-छांट के रिलीज करना चाहिए। वे कहते हैं- 'सवाल यह है कि नशा क्‍या है, यकीनन पंजाब के युवा नशे में है, लेकिन सभी स्‍मैक नहीं लेते हैं, पर देश में शराब की सबसे ज्‍यादा खपत पंजाब में ही होती है, लेकिन सरकार शराब को नशा नहीं मान रही, ये तो अजीब बात है।



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उनके मुताबिक पंजाब में 35 हजार इंजीनियरिंग सीटें हैं, लेकिन युवाओं को पंजाब में कोई नौकरी नहीं है, यदि युवा बाहर जाता है, तो उसे इतने कम पैसे मिलते हैं कि वह फ्रस्‍ट्रेट होकर घर लौट आता है, और फिर नशे की गिरफ्त में पहुंच जाता है।



पंजाब में चंडीगढ़ में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे गौतम चौधरी का मानना है कि दरअसल यह फिल्‍म राजनीतिक गोलबंदी में फंसी हुई दिखाई दे रही है। वे कहते हैं कि पंजाब में ये अफवाह अब सच बन चुकी है कि इस फिल्‍म में आम आदमी पार्टी का पैसा लगा है, लिहाजा यह पूरी तरह से अगले साल होने वाले चुनावों की तैयारी का एजेंडा है।



गौतम के मुताबिक जहां तक फिल्‍म में 70 फीसदी लोगों के नशे में फंसे होने की बात है, इसका हलफनामा तो खुद पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दिया है। उनके मुताबिक पंजाब नशे का सप्‍लाई सेंटर बन चुका है, यहां 50 फीसद ड्रग्‍स अफगानिस्‍तान के रास्‍ते आ रही है। फिल्‍म के मुद्दे पर गौतम कहते हैं कि सेंसर बोर्ड कुछ ज्‍यादा ही रोक लगा रहा है। सवाल फिल्‍म में आम आदमी पार्टी के पैसे लगे होने की अफवाहों के बीच सियासी हो गया है, असली दिक्‍कत यही है।



वहीं फिल्‍म का विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि यदि फिल्‍म के हिसाब से पंजाब की छवि को सही मानें, तो पंजाब में 10 में से प्रत्‍येक युवा नशे का शिकार है। देखा जाए तो आंकड़े भी कहते हैं कि पंजाब में नशा है, लेकिन इतना नहीं है जितना फिल्‍म में दिखाया जा रहा है।



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हालिया ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस यानी की एम्‍स की एक रिपेार्ट के मुताबिक पंजाब में तकरीबन 0.2 फीसदी युवाओं में नशे की लत है। बता दें कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर बादल भी नशे को लेकर बहस और फिल्‍म उड़ता पंजाब’  में दिखाई बातों से पंजाबियों को बदनाम करने की साजिश करार दे चुके हैं। गौरतलब है कि राज्य में अकाली दल के कुछ नेताओं पर भी ड्रग माफिया होने के आरोप लगे हैं, और बीते कुछ सालों में पंजाब नशे के गिरफ्त में तेजी से बढ़ा है।



ये दिखाया गया है ‘उड़ता पंजाब’  में इसलिए है सेंसर बोर्ड को आपत्‍ति  :   ‘उड़ता पंजाब’  फिल्म के निर्देशक इश्किया’  फेम अभिषेक चौबे हैं। फिल्‍म का निर्माण अनुराग कश्यप तथा तीन अन्य निर्देशकों की फिल्म निर्माण कंपनी ‘फैंटम’ और एकता कपूर की ‘बालाजी टेलीफिल्‍म्‍स ने किया है। फिल्‍म में सीन कटिंग के मुद्दे पर अनुराग कश्‍यप बॉम्‍बे हाईकोर्ट जा चुके हैं।



Censorship Row: IFTDA Press Conference In Support Of Movie Udta Punjab



आपको बता दें कि सेसंर बोर्ड ने फिल्‍म में 89 दृश्यों और संवादों को कट करने का सुझाव दिया है। सेंसर बोर्ड का कहना है कि फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत में ही शाहिद कपूर पंजाबी में यह बोलते दिखाई देते हैं कि ''पंजाब के 70 फीसदी युवा नशे के गिरफ्त में है, यदि इसे रोका नहीं गया तो यह दूसरा मैक्सिको हो जाएगा।'' यही नहीं इसके अलावा भी फिल्‍म में पंजाब को लेकर बातें कही गई हैं, जिन पर विवाद हो रहा है।



वैसे देखा जाए तो पंजाब में ड्रग्‍स की खपत कितनी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल ही पंजाब की सीमा के पास पुलिस ने भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किए थे। यह ड्रग्‍स पाकिस्तान से लाए जा रहे थे। इस छापे के बाद गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने मामले पर संजीदगी दिखाई थी। उस दौरान अधिकारियों ने भी माना था कि 275 किलो ड्रग्स का बरामद होना दिखाता है कि पंजाब में इसकी कितनी ज्यादा मांग है।



बहरहाल, इस फिल्‍म ने पंजाब में नशे के कारोबार और युवाओं के नशे की गिरफ्त में होने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
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