कैसे, क्यों और कहां बेचा जा रहा है आपके एटीएम कार्ड का DATA?

प्रतीकात्मक फोटो.

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आपके एटीएम कार्ड से विदेश में पैसे निकाल लिए जाते हैं, उस कार्ड से खरीदारी कर ली जाती है तो आप चौंके न. कतई सोच में न पड़ें कि आपका कार्ड विदेश में कैसे पहुंच गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2019, 8:26 PM IST
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एमसीए पास अमित का एक दोस्त अतुल भी एमसीए पास थे. दोनों कंप्यूटर के अच्छे जानकार थे. अतुल ने अपने एक दोस्त और एमसीए के छात्र विक्रम को भी अपनी साज़िश में शामिल कर लिया था. हेल्प के लिए एक 10वीं पास युवक को भी शामिल कर लिया गया.



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अमित इन दोस्तों के साथ मिलकर पहले चुराए गए डेटा से कार्ड का क्लोन बनाकर एटीएम से पैसे निकलता था. एक दिन वह इंटरनेट पर कुछ सर्च कर रहा था. तभी उसकी मुलाकात एक हैकर से हुई. ये विदेशी हैकर था. ये हैकर एक बेवसाइट के माध्यम से डेटा खरीदने और बेचने का काम करता था. अमित को उसी से डेटा बेचने का आइडिया मिला.





एटीएम से इस तरह चुराते थे डेटा
अमित और उसके दोस्त अलग-अलग शहरों में जाकर ऐसे एटीएम चुनते थे, जहां न तो ज्यादा भीड़ रहती हो और न ही ऐसे कि जहां 10-12 लोग ही आते हों. दूसरी खास बात ये कि वहां सुरक्षा गार्ड न रहता हो. इसके बाद एटीएम मशीन में जहां कार्ड लगाया जाता है वहां पर स्कीमर (कार्ड रीडर) लगा देते थे. एक छोटा सा बटन के आकार का कैमरा भी कीपैड के ऊपर फिट कर देते थे. इस तरह से कार्ड का डेटा और पिन नम्बर दोनों एक साथ मिल जाते थे.



वह कम से कम लोगों के बीच अपने चेहरे को लाते थे. यही वजह थी कि स्कीमर, कैमरा, खाली कार्ड और मैग्नेटिक टेप आदि आनलाइन मंगाए थे. वह खुद कभी दुकान पर नहीं जाते थे. एहतियात बरतते हुए अमित और उसका गैंग अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहा था.



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देश का डेटा विदेशों में बेचने के साथ ही गिरोह ने विदेशी डाटा खरीदकर उसे दूसरे देश में बेचने का काम भी शुरू कर दिया था क्योंकि इसमें पकड़े जाने का रिस्क कम था. कुछ समय पहले उन्होंने दुबई से कार्ड का डेटा खरीदा था, जिसे बाद में आनलाइन श्रीलंका में एक हैकर को बेच दिया था. इस काम में उन्हें 3 लाख रुपये की कमाई हुई थी.



जब पुलिस के हत्थे चढ़ा गिरोह

लेकिन हाल में, हरियाणा के पानीपत में अमित और उसका गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ गए. यह गैंग हत्थे क्या चढ़ा, पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी और हरियाणा पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि आपके एटीएम कार्ड से विदेश में पैसे निकाल लिए जाते हैं, उस कार्ड से खरीदारी कर ली जाती है तो आप चौंके न. कतई सोच में न पड़ें कि आपका कार्ड विदेश में कैसे पहुंच गया या फिर कार्ड की जानकारी सात समुंदर पार कैसे पहुंच गई.



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पानीपत पुलिस ने एक एटीएम के पास से एमसीए पास लड़कों के एक गिरोह को गिरफ्तार किया है. गिरोह ने खुलासा किया कि वह एटीएम से कार्ड का डेटा चुराकर विदेशों में बेच देते थे. इसके बदले एक मोटी रकम मिल जाती थी. इसमे पकड़े जाने का जोखिम भी नहीं होता है. जबकि चोरी के डाटा से देश में पकड़े जाने की संभावना ज्यादा रहती है. गिरोह ने बताया कि वह विदेशी एटीएम कार्ड का डेटा खरीदकर देश में उससे खरीदारी करते थे.



इसलिए शुरू हुआ डेटा खरीदने का खेल

दिल्ली बेस्ड साइबर एक्सपर्ट दानिश शर्मा बताते हैं, ज्यादातर विदेशी देशों में सोशल सिक्योरिटी नम्बर (एसएसएन) से ही एटीएम से पैसा निकलता है और इसी एसएसएन से आप आनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. जबकि हमारे देश में कार्ड नम्बर, कार्ड की एक्सपायरी डेट और कार्ड के पीछे प्रिंट सीवी नम्बर से आप खरीदारी कर सकते हैं.



होता ये है कि कार्ड का चोरी किया हुआ डेटा जब हैकर अपने ही देश में उसे इस्तेमाल करता है तो उसके पकड़े जाने की संभावना ज्यादा होती है. विदेशों में भारत से ज्यादा साइबर सिक्योरिटी है. वहां साइबर क्राइम करने के बाद बचना बहुत मुश्किल है.




एक देश से दूसरे देश में डेटा बेचने की एक बड़ी वजह ये भी है कि जब दिल्ली के किसी शख्स के कार्ड से सिंगापुर में 50 हजार रुपये की खरीदारी कर ली जाती है या दुबई के डेटा से श्रीलंका में खरीदारी हो जाती है तो दूसरे देश का मामला होने के चलते पुलिस ठोस कार्रवाई नहीं कर पाती. हैकर इसी का फायदा उठाते हैं. इस मामले में भी यही हुआ.



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बिटकॉइन से करते थे चोरी के डेटा का पेमेंट

सीआईए-वन के इंचार्ज संदीप सिंह ने बताया कि आनलाइन डेटा खरीदने और बेचने के दौरान ये आरोपी वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन का इस्तेमाल करते थे. श्रीलंका में बेचे गए दुबई के डेटा वाले केस में भी आरोपियों ने 80 हजार दीनार के बदले बिटकॉइन में भुगतान किया था. इसी तरह श्रीलंका के हैकर से आरोपियों ने खुद भी बिटकॉइन में पेमेंट लिया था.



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