हवाला कारोबारी नरेश जैन के बयान के बाद ED ने दिल्ली समेत कई राज्यों में की 66 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच 

प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला कारोबारी नरेश जैन के एक मामले में दिल्ली समेत कई राज्यों में संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की है

प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला कारोबारी नरेश जैन के एक मामले में दिल्ली समेत कई राज्यों में संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की है

जांचकर्ताओं के मुताबिक इस मामले में तफ्तीश करने के बाद हाल फिलहाल कई अन्य आरोपियों का नाम सामने आया था, इसके बाद ही उनसे संबंधित प्रॉपर्टी को अटैच करने की कार्रवाई की गई है

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 1, 2021, 11:31 PM IST
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नई दिल्ली. केन्द्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने देश के चर्चित हवाला कारोबारी नरेश जैन (Naresh Jain) से जुड़े मामले में अन्य आरोपियों से संबंधित कई राज्यों में करीब 65 करोड़ 75 लाख रूपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच (Property Attach) किया है. ईडी के अधिकारी के मुताबिक राजधानी दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई की है. ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों में कई आवासीय प्रॉपर्टी, प्रोजेक्ट वाली जमीन है, तो कई इंड्रस्टीज योग्य जमीन हैं जिसे नाजायज तरीके से अर्जित पैसे से खरीदने का आरोप है.

जांचकर्ताओं के मुताबिक इस मामले में तफ्तीश करने के बाद हाल फिलहाल कई अन्य आरोपियों का नाम सामने आया था, उसके बाद ही उनसे संबंधित प्रॉपर्टी को अटैच करने की कार्रवाई की गई है.

ईडी की तफ्तीश में कुछ प्रमुख आरोपियों के नाम इस प्रकार से सामने आये हैं... 



- मेसर्स बिमल कुमार जैन
- सुनिता जैन
- विजय अग्रवाल
- मेसर्स जयना इंफ्राटेक्चर लिमिटेड
- मेसर्स ग्राफिक बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड
- मेसर्स एरो बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड
- मेसर्स सीजन बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड
- मेसर्स कोनार्क क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड

जांच एजेंसी के अधिकारी के मुताबिक इन कारोबारियों का सीधा कनेक्शन हवाला कारोबारी नरेश जैन के साथ रहा है. इन आरोपियों की मदद से नरेश जैन अपना हवाला कारोबार चलाता था, लिहाजा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी द्वारा नरेश जैन और उससे जुड़े अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रि्ंग एक्ट (PMLA) कानून के तहत मामला दर्ज कर उनकी पड़ताल की जा रही है.

कौन है हवाला कारोबारी नरेश जैन?

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नरेश जैन और उसके हवाला कनेक्शन के मामले में एक एफआईआर दर्ज किया था, उसके बाद उसे आधार बनाते हुए ईडी ने अन्य मामला दर्ज किया था. शुरुआत में यह मामला आपराधिक साजिश रचने, फर्जीवाड़ा और लोगों के साथ वित्तीय मामले में धोखाधड़ी का लग रहा था. लेकिन ईडी ने इसकी गंभीरता को देखते हुए तफ्तीश करना शुरू किया तो जांचकर्ताओं के होश उड़ गए. उन्हें पता लग चुका था कि यह देश का बहुत बड़ा हवाला कारोबार का मामला बन सकता है.

आरोपी नरेश जैन ने सैकड़ों लोगों के मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, सैकड़ों लोगों के फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से सैकड़ों फर्जी शैल कंपनियों को बनाया, और इसके माध्यम से देश के सैकड़ों सफेदपोश लोगों के ब्लैकमनी को वो वाइट करने में जुट गया. इस दौरान उसने लगभग 565 करोड़ रुपया कमीशन के रूप में प्राप्त किया था. हालांकि ईडी के वरिष्ठ जांच अधिकारी की मानें तो इस मामले में तफ्तीश का दायरा बहुत बड़ा है.

पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय ने हवाला कारोबारी नरेश जैन को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसके दर्ज बयान के आधार को खंगालने और तफ्तीश के बाद ही ईडी ने यह कार्रवाई शुरू की है.
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