दिल्ली में फोन से फ्रॉड करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश, आठ गिरफ्तार, 300 फोन बरामद

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक फोन टू फ्रॉड गिरोह का नेटवर्क देश के अठारह राज्यों में फैला हुआ था (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ देश के 18 राज्यों में अभियान चलाया, इसमें 350 लोग शामिल थे. यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा शाखा एफसीओआरडी, मध्य प्रदेश पुलिस और कुछ अन्य राज्यों के पुलिस बलों ने विशिष्ट सूचना पर चलाया था

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    नई दिल्ली. सुरक्षा एजेंसियों ने ‘फ्रॉड टू फोन’ नेटवर्क (Fraud To Phone Network) का पर्दाफाश करते हुए अलग-अलग राज्यों से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए लोगों के पास से लगभग 300 नए मोबाइल फोन (Mobile Phone) बरामद किए गए हैं जो उन्होंने चोरी की रकम से खरीदे थे. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इस शातिर गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा इस गिरोह के 900 मोबाइल फोन, 1000 बैंक खाते और सैकड़ों एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) और ई-कॉमर्स आईडी की भी पहचान की गई है और इसकी जांच जारी है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक करीब 100 बैंक खातों और डेबिट व क्रेडिट कार्ड के लेन-देन पर भी रोक लगाई है.

    गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कुल मिलाकर ‘फ्रॉड टू फोन’ (एफ2पी) गिरोह के आठ मास्टरमाइंड गिरफ्तार किए गए हैं जिनमें से चार झारखंड के जबकि मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से दो-दो आरोपी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन लोगों के पास से चोरी की रकम से खरीदे गए करीब 300 नए मोबाइल फोन भी जब्त किये गए हैं.

    गिरोह के खिलाफ अभियान 18 राज्यों में चला और इसमें 350 लोग शामिल थे. यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा शाखा एफसीओआरडी, मध्य प्रदेश पुलिस और कुछ अन्य राज्यों के पुलिस बलों ने विशिष्ट सूचना पर चलाया था.

    सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने 18 राज्यों में गिरोह के खिलाफ चलाया अभियान

    एक अधिकारी ने बताया कि उदयपुर निवासी 78 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीते 11 जून को साढ़े छह लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत गृह मंत्रालय द्वारा संचालित साइबरसेफ ऐप पर दी थी. एफ2पी कॉल करने वाला झारखंड से ऑपरेट कर रहा था. जांच के दौरान सामने आया कि ठगी गई रकम सीधे तीन एसबीआई कार्ड में जमा हुई, जिनका इस्तेमाल फ्लिपकार्ट से 33 चीन निर्मित श्योमी पोको एम3 मोबाइल फोन खरीदने के लिये किया गया. कुछ ही मिनटों के अंदर यह सूचना प्राप्त कर ली गई कि मध्य प्रदेश के बालाघाट में यह फोन किस पते पर मंगाए गए और बालाघाट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को इस बारे में सूचित किया गया.

    एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस मास्टरमाइंड को पकड़ने में सबसे प्रभावी रही और उसके पास से सभी 33 नए मोबाइल फोन के अलावा कुछ अन्य फोन भी बरामद हुए. वहीं, झारखंड पुलिस ने एफ2पी कॉलर को गिरफ्तार किया. एफ2पी गिरोह ने यह फोन करीब 10,000 रुपये प्रतिफोन के हिसाब से खरीदे थे और उन्हें पांच से 10 प्रतिशत की छूट के साथ ब्लैक मार्केट में बेच देते थे.

    बता दें कि एफ2पी गिरोह में सैकड़ों सदस्य होते हैं जो एक लेनदेन के विभिन्न चरणों का संचालन करते हैं जिनमें ओटीपी फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, ई-कॉमर्स फ्रॉड, फर्जी आईडी, फर्जी मोबाइल नंबर, फर्जी पता, काला बाजारी, कर चोरी, धन शोधन और चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त शामिल है.

    आरोपियों से इस बाबत भी पूछताछ की जा रही है कि वो चीन में बने मोबाइल फोन को ही क्यों तरजीह देते थे, विशेष रूप से श्योमी द्वारा बनाए गए फोन को. ‘साइबरसेफ’ एफसीओआरडी द्वारा निर्मित एक ऐप्लीकेशन है जिसका संचालन अगस्त 2019 से किया जा रहा है. (भाषा से इनपुट)

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