देवघर: दूसरों के खाते से रकम उड़ाने वाले 22 साइबर क्रिमिनल गिरफ्तार, पासबुक-ATM कार्ड बरामद

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से फोन पर झांसा देकर उनके आधार कार्ड के डीटेल और OTP हासिल कर लेते थे

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से फोन पर झांसा देकर उनके आधार कार्ड के डीटेल और OTP हासिल कर लेते थे

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए लोग खुद को फोन पर खुद को बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों से KYC अपडेट और अन्य तरह का प्रलोभन देकर उनसे OTP और आधार कार्ड नंबर मांग लेते थे. OTP हासिल करने के बाद यह शातिर अपराधी लोगों के बैंक खाते से उनकी गाढ़ी कमाई की रकम उड़ा लेते थे

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देवघर. झारखंड के देवघर (Deoghar) में साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर गिरोह के 22 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस की विशेष टीम ने देवघर के बूढ़ई, करौं, पथरोल, मधुपुर और सारठ थाना क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर इन साइबर अपराधियों को धर दबोचा. आरोपियों के पास से पुलिस ने 32 मोबाइल फोन, 59 सिम, 11 ATM कार्ड, 12 पासबुक और दो चेकबुक बरामद किया है.

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए लोग खुद को फोन पर खुद को बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों से KYC अपडेट और अन्य तरह का प्रलोभन देकर उनसे OTP और आधार कार्ड नंबर मांग लेते थे. OTP हासिल करने के बाद यह शातिर अपराधी लोगों के बैंक खाते से उनकी गाढ़ी कमाई की रकम उड़ा लेते थे.

देवघर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि गिरफ्तार साइबर अपराधियों में एक सीताराम मंडल पहले से साइबर अपराध का अभियुक्त है. वहीं जाहिद अंसारी नाम का साइबर क्रिमिनल 20 प्रतिशत कमीशन पर फर्जी खाता उपलब्ध कराता था. उन्होंने बताया कि बाकी गिरफ्तार अभियुक्तों का भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है. इनके पास से पुलिस ने 32 मोबाइल फोन, 59 सिम, 11 ATM कार्ड, 12 पासबुक और दो चेकबुक बरामद किया है.



उन्होंने बताया कि आरोपियों द्वारा सर्च इंजन गूगल पर विभिन्न प्रकार के मोबाइल वॉलेट और बैंक के कस्टमर केयर नंबर का विज्ञापन देकर भी ठगी की जाती थी. साथ ही इ लोगों द्वारा ग्राहकों से उनके डिवाइस में टीम व्यूअर और क्विक सपोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करवा कर गूगल पर मोबाइल नंबर का फर्स्ट फोर डिजिट सर्च कर अपने मन से छह डिजिट जोड़कर भी फ्रॉड किया जाता था. यह शातिर साइबर अपराधी यूपीआई वॉलेट से ठगी किए गए पीड़ित को उसके खाते में रिफंड करने के नाम पर फिर पिन नंबर को लॉग इन करने की बात कह दोबारा ठगी कर लेते थे.
पुलिस गिरफ्तार साइबर अभियुक्तों से पूछताछ कर उनसे जुड़े अन्य साइबर अपराधियों के गिरोह के बारे में सुराग जुटाने की कोशिश कर रही है.
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