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एक महीने के लिए पैरोल पर छूटा था लेकिन 25 साल बाद लौटा जेल

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 4:53 PM IST
एक महीने के लिए पैरोल पर छूटा था लेकिन 25 साल बाद लौटा जेल
सांकेतिक चित्र.

यह कहानी केरल के एक कैदी की है जिसने पैरोल को जेल से फरार होने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. पूरी साज़िश के तहत उसने पैरोल का फायदा उठाकर देश भी छोड़ दिया था लेकिन किस्मत कहें या ज़िंदगी के मोड़, उसी जेल में उसे लौटना ही पड़ा.

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  • Last Updated: August 9, 2019, 4:53 PM IST
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जब हवाई जहाज़ से नज़र अरब पहुंचा तब जाकर उसे यकीन हुआ कि अब वह पुलिस से छूट गया है. एयरपोर्ट के बाहर आकर उसने देखा तो टैक्सियों की कतारें, चमचमाती हुई बिल्डिंग्स और चिकनी सड़कें उसे एक नई ज़िंदगी का पता दे रही थीं. कत्ल और सज़ा के बाद अब एक नई शुरुआत के लिए निकला नज़र बिल्कुल बेखबर था कि वह जिस जेल से भागा है, आखिरकार उसे फिर वहीं पहुंचना होगा.

आपने सुना है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं लेकिन इस कहानी में कानून के हाथ लंबे होने का कोई सबूत नहीं है. अगर होते तो नज़र 25 साल तक कानून के हाथों से बच नहीं पाता. यह कहानी उस कहावत के इर्द-गिर्द है जिसमें कहा गया है कि आपके गुनाह आपका पीछा नहीं छोड़ते. आप दुनिया से भाग सकते हैं लेकिन अपने आप से नहीं. बहरहाल, केरल से सउदी अरब पहुंच चुका था नज़र और पिछला सब कुछ भूलकर नये सिरे से जीना चाहता था.

हुआ इस तरह था कि साल 1991 में करीब 27 साल के नज़र को कत्ल के एक मामले में दोषी पाया गया और उसे उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई. केरल की पूजाप्पुरा सेंट्रल जेल में नज़र को कैद कर दिया गया. इसके बाद उसने कुछ दिनों की पैरोल मांगी. उसे छोड़ा गया और वह कुछ दिन अपने परिवार के साथ बिताकर फिर जेल पहुंच गया. अगले डेढ़ साल में कुछेक बार इसी तरह नज़र पैरोल पर कुछ दिनों के लिए जेल से जाता और तय वक्त पर वापस आ जाता.

पैरोल पर जेल से बाहर आकर नज़र चुपके-चुपके अपने आगे के प्लैन को अंजाम दे रहा था. नकली पासपोर्ट, वीज़ा वगैरह का इंतज़ाम कर रहा था. और इस बात की भनक किसी को नहीं थी. उसके परिवार को भी इस बारे में कोई पुख्ता खबर नहीं थी. फिर दिसंबर 1992 में नज़र की अर्ज़ी पर उसे एक महीने की पैरोल पर छोड़ा गया. तब उसने अपने घर जाकर अपने परिवार को बताया कि अब वह जेल वापस नहीं जाएगा.

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पूजाप्पुरा जेल, केरल का मैप.


यह बात सुनकर उसका पूरा परिवार हैरान रह गया कि उसे तो उम्र कैद की सज़ा मिली है फिर ऐसा कैसे हो सकता है. नज़र ने बताया कि उसने सब इंतज़ाम कर लिया है और अब वह देश छोड़कर चला जाएगा. यही नहीं बल्कि उसने सबसे कहा कि वहां काम धंधा जमते ही पूरे परिवार को वह धीरे-धीरे वहीं बुला लेगा. नज़र ने सबको यह हिदायत भी दी कि अगर पुलिस आए तो सब यही कहें कि वह कोयंबटूर जाने की बात कहकर चला गया.

इसके बाद नज़र वाकई कोयंबटूर गया और वहां उसने अपने संपर्कों से कुछ फर्ज़ी कागज़ात हासिल किए. इसके बाद नज़र एकाध जगह और होते हुए मुंबई गया और वहां से उसने हवाई जहाज़ पकड़ा. फिर सउदी अरब पहुंचकर नज़र यह सोचकर खुश था कि अब वह पुलिस को चकमा देकर हमेशा के लिए यहां आ गया है. अब उसे यहां काम धंधे की तलाश थी. उसके कुछ पुराने संपर्क यहां थे जिनकी मदद से उसने यहां शुरुआत की.
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निताकत कानून ने छीने नज़र के ख्वाब
होटलों में, टैक्सी ड्राइविंग, लॉंड्री जैसे कई काम करते हुए नज़र अरब देशों में कई सालों से रह रहा था लेकिन फिर वहां निताकत कानून लागू हुआ. इस कानून का असर अरब देशों में रह रहे उन बाहरी देशों के लोगों पर हुआ जो पूरी तरह से स्किल्ड या जानकार नहीं थे और छोटे-मोटे काम करते हुए अरब में रह रहे थे. धीरे-धीरे ऐसे कई लोगों को वहां से लौटने पर मजबूर होना पड़ा. नज़र उन दिनों बहुत परेशान था और वह भारत लौटना नहीं चाहता था.

इस कानून से बचने के कई रास्ते खोजे नज़र ने लेकिन कामयाब नहीं हुआ. कुछ दिनों तक तो वह सिस्टम से छुपता रहा लेकिन फिर एक दिन नज़र की भारत वापसी का वक्त आ गया. 11 साल सउदी अरब में गुज़ारने के बाद नज़र भारत लौट रहा था और उसे डर था कि न जाने वहां क्या हालात होंगे और उसे कब, कहां, कैसे पकड़ लिया जाएगा. खैर डरा हुआ नज़र भारत वापस आ गया.

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केरल में अपने घर पहुंचने से पहले उसने अपने परिवार से फोन और अन्य ज़रियों से बातचीत की और पूरी खबर ली. हर तरह से संतुष्ट होने के बाद नज़र अपने घर पहुंचा. 11 साल पहले जब नज़र जेल से पैरोल पर छूटकर भाग गया था तब पुलिस ने सरगर्मी से उसकी तलाश की थी. पुलिस को पता चल गया था कि वह कोयंबटूर होते हुए मुंबई भाग गया है. फिर तलाश की जाती रही लेकिन उसका कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा था. अब 11 साल हो चुके थे और उसकी तलाश का केस पुलिस की तरफ से ढीला पड़ चुका था.

ऐसे हुई नज़र की जेल वापसी
पुलिस ने उसका केस बंद नहीं किया था और कभी-कभी कहीं कोई हरकत होती रहती थी. इतने सालों में नज़र के चेहरे में कुछ बदलाव आ चुका था और अब उसने यहां अपने परिवार के साथ जीना शुरू किया. इस बीच उसने कुछेक बार नाम भी बदला और वह ज़्यादा लोगों के बीच जाने से बचता रहा. कुछ साल ऐसे ही गुज़र गए और फिर नज़र के जीवन में एक और संकट खड़ा हो गया. उसे एक दिन खून की उल्टी होने लगी. इलाज हुआ और जांच में पता चला कि नज़र को कैंसर हो गया है.

नज़र और उसका पूरा परिवार इस खबर के बाद सकते में आ गया. अरब से जितना कुछ नज़र कमाकर लाया था, उसकी दम पर उसने इलाज कराने की कोशिश की और कुछ ही वक्त में इलाज में करीब 8 लाख रुपये खर्च हो चुके थे. इस चक्कर में उसका परिवार फिर एक बार गरीबी और तंगहाली से जूझने के लिए मजबूर होने लगा. इसी दौरान उसे पता चला कि पुराने अपराधियों की धरपकड़ का अभियान पुलिस ने फिर शुरू किया है और जगह जगह छापेमारी की जा रही है.

एक रात नज़र अपने बिस्तर पर करवटें बदल रहा था. 54 साल के हो चुके नज़र को महसूस होने लगा कि आज नहीं तो कल पुलिस उसे पकड़ ही लेगी. पुलिस न पकड़े तो वह अपनी बीमारी से मर जाएगा और जब तक ज़िंदा रहेगा इस बीमारी के इलाज पर खर्च होता रहेगा. यही सब सोचते हुए वह खुद को हर तरह से अपने परिवार पर बोझ समझने लगा था. फिर उस रात उसने एक फैसला किया. अगली सुबह नज़र खुद जेल अफसरों के पास गया और अपनी पहचान बताकर सरेंडर कर दिया.

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जुलाई 2017 में खुद को सरेंडर करने वाले नज़र ने उन अफसरों से कहा कि वह भागते-भागते थक चुका है इसलिए खुद यहां चला आया है. इसके बाद नज़र को कैद कर लिया गया. बाद में जांच में पता चला कि नज़र कैंसर से जूझ रहा है तो पहले जेल प्रशासन को कश्मकश हुई कि क्या फैसला करना चाहिए फिर तय किया गया चूंकि कत्ल के इल्ज़ाम में दी गई उसकी सज़ा बाकी है इसलिए सरकारी खर्चे पर उसका इलाज करवाया जाएगा.

 

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First published: July 13, 2018, 7:46 PM IST
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