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दो मौके मिले नयी शुरुआत के, पूर्व रेसलर ने दोनों बार चुना जुर्म

दो मौके मिले नयी शुरुआत के, पूर्व रेसलर ने दोनों बार चुना जुर्म

सांकेतिक चित्र

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हरियाणा के रोहतक के एक पूर्व पहलवान को हत्या के एक केस में गिरफ्तार किया गया जिस पर इनाम भी घोषित किया जा चुका था. रोहतक के दंगल से जुर्म के दलदल में धंसते जाने की इस पहलवान की दास्तान कई मोड़ों से गुज़रती है.

कत्ल के इल्ज़ाम में सलाखों के पीछे पहुंच चुका राकेश 15 साल पहले एक नामी पहलवान था जिसने नेशनल गेम्स में राज्य के लिए गोल्ड मैडल हासिल किया था. इन 15 सालों में अगर कुछ मोड़ न आए होते तो शायद राकेश का नाम देश के नामी रेसलरों में शुमार होता और वह खेल जगत की एक कामयाब हस्ती होता लेकिन सवाल यह है कि करियर से समझौता कर राकेश जुर्म की दुनिया में धंसा कैसे?

साल 2003 में नेशनल गेम्स का आयोजन हुआ और दर्शकों से भरे हुए स्टेडियम में राकेश फाइनल मुकाबला खेलने जा रहा था. हरियाणा के रोहतक के रेसलर राकेश पर कई प्रशंसकों और अकादमियों की नज़र थी. फाइनल मुकाबला शुरू हुआ और राकेश ने देखते ही देखते अगले चंद मिनटों में विरोधी पहलवान को पटखनी देकर अपने प्रदेश के लिए गोल्ड मैडल हासिल कर लिया.

प्रशंसकों की वह भीड़, बधाइयां और मैडल मिलने के वो लमहे राकेश की आंखों मे एक लहर की तरह दौड़ते रहते थे. रेसलिंग में एक गौरवशाली करियर उसके सामने था. इसके बाद तालकटोरा स्टेडियम में हुए नेशनल गेम्स के लिए पूरी तैयारी कर चुका था राकेश. इस मुकाबले में उसने कांस्य पदक जीता. इसके बाद वह और ट्रेनिंग के साथ आगे बढ़ना चाहता था लेकिन एक दिन उसके पेट में अक्सर होने वाला दर्द बेहद बढ़ गया.

साल 2004 में राकेश को डॉक्टरों ने बताया था कि उसकी किडनी में एक स्टोन है जिसका इलाज आॅपरेशन है. रोग गंभीर हो चुका था और आॅपरेशन कर डॉक्टरों ने राकेश की एक किडनी निकाल दी. इस आॅपरेशन के बाद राकेश सामान्य जीवन तो जी सकता था लेकिन अब पहलवानी करना उसके नसीब में नहीं था. आॅपरेशन सफल होने के बावजूद राकेश के लिए असफल हुआ था क्योंकि उसका करियर अब खत्म हो चुका था.

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जीवन तो चलता ही है और नये सिरे से शुरुआत करना ही होती है इसलिए राकेश ने परिवार की ज़िम्मेदारियां निभाने और आगे बढ़ने के इरादे से खेलों से दूरी बना ली और निजी बिज़नेस के बारे में सोचा. रोहतक का रौबदार, दबंग और अब कुछ चिड़चिड़ा हो चुका राकेश अपने रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों की मदद से दिल्ली में फाइनेंस के कारोबार में दाखिल हुआ.

फाइनेंस के धंधे में अक्सर लठैत या बाउंसर किस्म के लोगों की ज़रूरत होती है और रिकवरी करने के लिए इनकी मदद ली जाती है. मज़बूत कद काठी के राकेश को इस कारोबार में जल्द ही जगह मिलने लगी और उसके संपर्क कई लोगों से बनने लगे. लेकिन इस दौरान उसे यह अंदाज़ा नहीं था कि इस कारोबार में कौन क्या है यानी कौन शरीफ है और कौन अपराधी.


कुछ अपराधी तो शातिर किस्म तक के थे, जिनके संपर्क में राकेश आ चुका था. अपनी शारीरिक ताकत के बल पर दबंगई करने वाले राकेश को ये शातिर लोग इस्तेमाल करने लगे. इसी मारपीट के चक्कर में राकेश जुर्म तक पहुंच गया. 2005 में एक दिन झज्जर के जयकुंवर नाम के एक कारोबारी का कत्ल हो गया. इस मामले की तफ्तीश हुई तो पुलिस जल्द ही राकेश तक पहुंच गई. राकेश पर हत्या का आरोप लगा और उसे अगले 6 साल जेल में रहना पड़ा.

जेल जाने के बाद राकेश के पास फिर एक मौका था कि वह नये सिरे से जीवन शुरू करे. इस बार नयी शुरुआत करने के बजाय राकेश जेल में उन लोगों से मिला जो और भी शातिर किस्म के अपराधी थे. इन लोगों के प्रभाव में आकर 6 साल बाद जेल से छूटने पर राकेश ने शराब ठेकेदारी का धंधा शुरू किया. इस धंधे में जिनकी मदद राकेश ने ली थी, न तो वो दूध के धुले थे और जिन लोगों से वास्ता पड़ रहा था, न ही वो.

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शराब कारोबार के दौरान ही जल्द ही राकेश की पहचान कुख्यात रोहताश आसनिया से हुई. आसनिया गैंग का सरगना था रोहताश जिस पर पुलिस थानों में कई मामले दर्ज थे. रोहताश ने समय समय पर मदद की. कभी रुपये पैसों को लेकर तो कभी ठेके वगैरा को लेकर. रोहताश चूंकि शातिर अपराधी था इसलिए उसने सोच रखा था कि एक दिन वह राकेश का इस्तेमाल कर ही लेगा. मदद के एवज़ रोहताश कभी-कभी राकेश को छोटे-मोटे कामों के लिए इस्तेमाल करता भी था. कभी किसी रिकवरी के लिए या कभी किसी को धमकाने जैसे कामों में. इन्हीं कारणों से राकेश अब आसनिया गैंग के सदस्य के तौर पर पुलिस की वॉंटेड लिस्ट में आ चुका था.

जेल जाकर और भी निडर और दबंग हो चुका राकेश अक्सर मारपीट पर उतारू हो जाता था. 2017 में शराब के एक ठेके को लेकर राकेश का कुछ ठेकेदारों के साथ विवाद हो गया. शराब ठेकेदार बलबीर की कोई पुरानी रंजिश रोहताश के साथ रही थी, इस बात की भनक शायद राकेश को नहीं थी. राकेश के साथ बलबीर के विवाद को मौका देखते हुए रोहताश ने राकेश को बलबीर को जान से मारने के लिए उकसा दिया.


रोहताश की पहुंच का फायदा कई बार उठा चुके राकेश ने आव देखा न ताव और जून 2017 में साथियों की मदद से बलबीर की हत्या कर दी. बलबीर एक नामी शराब कारोबारी था इसलिए पुलिस फौरन हरकत में आई और कातिल की तलाश शुरू हुई तो राकेश फरार हो गया. पुलिस ने उसके पिछले रिकॉर्ड और इस घटना को मद्देनज़र रखते हुए राकेश पर 25 हज़ार रुपये का इनाम घोषित कर दिया.

READ: नामी पहलवान गिरफ्तार, एक साल से थी पुलिस को तलाश

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हत्या का आरोपी पूर्व पहलवान राकेश मोखरिया


इस केस में एक साल तक जुटी रही पुलिस ने इसी साल जून में बलबीर की हत्या के एक आरोपी अमित उर्फ मीता को पकड़ा. मीता से मिले लिंक्स के ज़रिये 6 दिन में ही पुलिस राकेश तक पहुंच गई और पूरे एक साल तक फरारी काटते रहे राकेश को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया. किसी ज़माने में रोहतक के नामी पहलवानों में शुमार रहा राकेश अब हरियाणा के नामी अपराधियों में शामिल है.

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Tags: Haryana news, Murder, Rohtak

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